रविवार, 30 मार्च 2014

आतंकवाद का एक रूप यह भी

  आतंकवाद का सम्बन्ध माफिया ड्रग्स तथा नारकोटिक्स ड्रग्स तस्करों से होता है। सूत्रों के अनुसार इस देश से नारकोटिक्स ड्रग्स की सप्लाई होती है।उसके बदले रूपया देश में आने के बजाय आतंकवाद फैलाने के लिए हथियार आते है। इस रैकेट में राजनेता, नारकोटिक्स ड्रग्स स्मगलर अधिकारियों और आतंकवादियों का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से गठजोड़ होता है। हवाला काण्ड में भी आतंकवादियों को नगद रूपया देने वाले हवाला कारोबारी राजनेताओं को भी रूपया देते थे। खबरों के अनुसार देश के आई0पी0एस0 अधिकारी शाजी मोहन की गिरफ्तारी अन्र्तगत धारा-8(1)(सी) 21 एन0डी0पी0एस0 एक्ट के तहत की गयी है। भारी मात्रा में हिरोइन बरामद हुई। हुजूर सरकार श्री शाजी मोहन साहब देश में नारकोटिक्स पदार्थो के तस्करी रोकनेे वाले विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी थे।                         
    श्री शाजी मोहन की गिरफ्तारी ने आतंकी ढाचे की मजबूती की ओर इशारा करता है। 2006 से 2008 में श्री शाजी मोहन नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरों चण्डीगढ़ में जोनल डायरेक्टर रहे है। सभी जानते है कि नारकोटिक्स पदार्थ के तार अन्तर्राष्ट्रीय है और उक्त धन्धे से जुड़ा हुआ व्यक्ति किसी न किसी रूप से विदेशी शक्तियों से जुड़ जाता है। जो इस देश को कमजोर करना चाहती है। अपने जनपद बाराबंकी से लेकर प्रदेश के कई राजनेता मादक पदार्थो की तस्करी में लिप्त रहे है और लिप्त है। जाॅच का यह भी विषय है कि राजनेता अगर अप्रत्यक्ष रूप से नारकोटिक्स ड्रग्स की तस्करी में लिप्त है तो इनके तार कही न कही आतंकियों से निश्चित रूप से जुड़े हुए है। यदि आतंकवाद को समाप्त करना है तो निश्चित रूप से राजनेताओं और भ्रष्ट नौकरशाहों व नारकोटिक्स तस्करों के गठजोड़ को समाप्त करना होगा। 
    आय से अधिक सम्पत्ति रखने का निषेध करने वाले कानून को पूरी ईमानदारी से यदि लागू किया जाय तो नौकरशाहों, राजनेताओं और नारकोटिक्स तस्करों के गठजोड़ को तोड़ा जा सकता है। इस गठजोड़ के टूटने का अर्थ है कि आतंकवादियों को संरक्षण तथा आर्थिक मदद मिलनी बन्द हो जायगी।

  -पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, एडवोकेट
लोकसंघर्ष  पत्रिका मार्च २००९ से

1 टिप्पणी:

shubham sharma ने कहा…

आतंकवाद आज पूरे विश्व में मंडरा रहा है...आखिर ये होते कौन है हिन्दुस्तानी या पाकिस्तानी या कोई और....आपने आज आतंकवाद का एक नया रूप बताया है जो कि कुछ हद तक सही भी है...ऐसी ही रचना जो की आतंकवाद से सम्बंधित है जैसे आतंकवाद तेरे कितने रूप भी आप शब्दनगरी के माध्यम से पढ़ सकतें हैं....