मंगलवार, 10 जून 2014

सम्मोहित मतदाता

कचेहरी बाराबंकी में 90 के दशक में अक्सर यह दृश्य दिखाई देता था कि एक आदमी जोर-जोर से भाषण दे रहा होता था कि भाइयों, बहनों अभी आदमी के दो टुकड़े किए जाएँगे, फिर दोनों टुकड़ों को स्वयं जुड़कर जिन्दा होता हुआ दिखाया जाएगा। धीरे-धीरे भीड़ इकट्ठा हो जाती थी, फिर भीड़ में से एक आदमी को भाषणकर्ता बुलाकर कहता था कि लेट जाओ, वह लेट जाता था। कपड़ा उढ़ाकर उसके दो टुकड़े कर दिए जाते थे फिर दो व्यक्तियों को बुलाकर एक टुकड़ा एक तरफ फेंकने के लिए तथा दूसरा टुकड़ा दूसरी तरफ फेंकने के लिए दे दिया जाता था और फिर वह जोर-जोर से चिल्लाता था कि अपने-अपने मन से खुदा या भगवान को याद कर लो ताकि वह व्यक्ति पुनः जिन्दा होकर आ सके, फिर वह ताली बजाता था और वह कटा हुआ व्यक्ति तीसरी तरफ से आता हुआ दिखाई देता था और जनता आश्चर्य मिश्रित खुशी से तालियाँ बजाती थी। इस प्रकार वह भाषणकर्ता भीड़ को सम्मोहित कर  जवानी बढ़ाने के नाम पर अपनी पुडि़या बेंचकर निकल जाता था। जब सम्मोहन टूटता था तो भीड़ के कानों में मात्र तालियोें की आवाज ही शेष बचती थी। इसी तरह धार्मिक स्तर पर सम्मोहित करने का एक काम पूरी दुनिया में प्रयोग हुआ कि एक निश्चित तारीख व समय पर गण्ेाश की मूर्ति को दूध पिलाने का कार्य सफलता पूर्वक किया गया, पूरे विश्व में एक धार्मिक मतावलम्बियों ने एक साथ टनों दूध गणेश की मूर्ति को पिला डाला। फिर प्रयोग शुरू होता है, भारत के लोगों के मध्य भारत के संसदीय चुनाव में आधुनिक तकनीक का, कारपोरेट सेक्टर, इलेक्ट्रानिक व प्रिंटमीडिया द्वारा कई माह पूर्व गुजरात के निरमा वाशिंग पाउडर की तरह नमो ब्राण्ड का। इसमें सफलता भरपूर मिली। गुजरात की निरमा वाशिंग पाउडर कम्पनी ने कुछ वर्ष पूर्व अपने ब्राण्ड के प्रचार में यह नारा दिया था कि ‘‘दूध की सफेदी निरमा से आये’’ उसका प्रभाव यह पड़ा था कि कोई भी व्यक्ति वाशिंग पाउडर या साबुन खरीदने जाता था तो उसके मुँह से दुकान पर निरमा का नाम अनायास ही निकल आता था। उसी तरह का प्रचार अभियान लोक सभा चुनाव में नमो ब्राण्ड का हुआ था झूठ पर गोयबल्स स्टाइल में चांदी का वर्क लगाकर
धार्मिक, सांस्कृतिकवाद का लबादा ओढ़े हुए हिन्दुत्ववादी संगठन ने सम्मोहित करने की शक्ति को एक स्थायी आधार प्रदान किया, जिसका असर यह हुआ कि ‘सम्मोहित जनता के घरों में लोग गुनगुनाने लगे कि अबकी नमो सरकार और जहाँ-जहाँ पर हिन्दुत्व वादियों का थोड़ा सा भी आधार था वह बढ़कर पूरे देश में 31 प्रतिशत हो गया। जनता के मुद्दे गायब थे, चरित्र हनन प्रमुख था और पूरे इतिहास को झूठा साबित कर भारतीय गणतंत्र पर कब्जा कर लिया गया।
-मुहम्मद शुऐब
-रणधीर सिंह ‘सुमन’
सम्पादकीय  -लोकसंघर्ष  पत्रिका

1 टिप्पणी:

dr.mahendrag ने कहा…

भा ज पा की जीत का दंश अभी भी रड़क रहा है ,पर कोई इलाज नहीं