रविवार, 11 अक्तूबर 2015

नेपाल में फेकू हारा -भारत नहीं

 भारत की विदेश नीति का यह प्रमुख हिस्सा रहा है कि पडोसी देशो की अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप न  किया जाय और इसी कारण उसके सम्बन्ध पाकिस्तान को छोडकर सभी से अच्छे सम्बन्ध रहे है भारत में नयी सरकार आने के बाद उसकी विदेश नीति अस्पष्ट हो गयी है जिसका नतीजा नेपाल में दिखाई दे रहा है वहां पर इस चुनाव में भारतीय हस्तक्षेप की बात खुल कर सामने आयी कि सांसदों को खरीदने के लिए रुपया तक भेजा गया हमारे प्रधानमंत्री की पहली नेपाल यात्रा पर उनका भब्य स्वागत हुआ था लेकिन दूसरी यात्रा में उनकी अनाप सनाप बातो ने नेपाली जनता को रुष्ट  कर दिया था. नेपाली संविधान को बनाये जाने की प्रक्रिया में उनकी पार्टी के हस्तक्षेप ने नेपाली जनमानस में देश के प्रति आक्रोश पैदा  कर दिया. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार नागपुरी दिशा निर्देशों के अनुरूप संविधान में वह हिन्दू राष्ट्र घोषित कराना चाहते थे जिसको वहा के संविधान निर्माताओ ने अस्वीकार कर दिया .जिसके फलस्वरूप हस्तक्षेप कर्ताओं को मुहं की खानी पडी वहीँ आज नए संविधान के बाद नेपाल ने अपना  प्रधानमंत्री भी चुन लिया है। 558 मेंबर वाली संसद ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्कसिस्ट लेनेनिस्ट  के नेता खडग प्रसाद शर्मा ओली को पीएम को तौर पर चुना। केपी शर्मा ने नेपाली कांग्रेस पार्टी के नेता व पूर्व प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को हराया है .
संसद में आज हुए मतदान में सीपीएन-यूएमएल के प्रमुख ओली को 338 मत मिले, जबकि नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष कोइराला ने सिर्फ 249 मत हासिल किए. प्रधानमंत्री चुने जाने के लिए 299 मतों की जरुरत थी.कुल 587 सदस्यों ने मतदान किया.हस्तक्षेप न किया होता तो शायद परिणाम दुसरे होते . इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री लगातार विदेश यात्राएं करते रहते है और अप्रवासी भारतीयों से जय जयकारा करते रहते है विरोध वहां भी शुरू हो गया है.विरोध में अप्रवासी भारतीयों द्वारा अपशब्दों का प्रयोग भी किया जा रहा है. प्रधानमंत्री विदेश में भी चुनाव सभा संबोधित करते है और विपक्षी दलों  के ऊपर आरोप- प्रत्यारोप करके  देश की गरिमा  को ठेस पहुचाते है .पहले यह नीति थी कि जो भारतीय किसी भी देश का नागरिक हो गया है वह उसी मुल्क की बेहतरी के सम्बन्ध में सोचे तथा उसी मुल्क के प्रति निष्ठावान रहे. अब यह नीति बदल गयी है अप्रवासी भारतीयों को बार -बार  संबोधित करने से अगर उनकी निष्ठां संदेह के घेरे में आयी तो निश्चित रूप से जिस मुल्क में रह रहे है दिक्कते पैदा हो जायंगी . इस सम्वन्ध में नागपुरी सोचने में असमर्थ है.अमरीकियों ने सुनियोजित तरीको से मुसलमानों में यह नारा दिया कि पहले वह मुसलमान है फिर जिस देश में रहते है वहां के नागरिक है.जिसका असर यह हुआ कि दुनिया में उनके ऊपर सवाल भी अमरीकियों ने ही खड़ा करा दिया. उनकी दिक्कते बढ़ी.नेपाल की जनता और भारतीय जनता में घनिष्ट सम्वन्ध है फेकू की उल्टी सीधी हरकतों से सम्वन्ध खत्म नही होने जा रहे है लेकिन एक विवाद बढ़ रहा है . समय रहते जिस दिशा में कदम उठाने की जरुरत है. भारत -नेपाल की जनता की एकता जिंदाबाद ! -रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !

कोई टिप्पणी नहीं: