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मंगलवार, 23 मार्च 2021

भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने के लिए मुखबिर राज समाप्त करें-रणधीर सिंह सुमन

 


बाराबंकीः भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने के लिए मुखबिर राज समाप्त कर किसान मजदूरों का राज स्थापित करना होगा अखिल भारतीय नौजवान सभा द्वारा आयोजित शहीद दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि भगत सिंह शोषण विहीन मजदूर किसान राज चाहते थे, वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि अगर आज भगत सिंह होते तो वर्तमान किसान मजदूर विरोधी सरकार उन्हे पुनः जीवित फांसी पर लटका देती है’’ भगत सिंह को फांसी कराने में इन्ही तत्वों का हाथ था। पार्टी के जिला सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि किसान आन्दोलन चल रहा है, मजदूर आन्दोलन चल रहा है सरकार चुनाव लड़ने में व्यस्त है। चुनाव मंे मोदी की लहर नहीं है लेकिन कार्पोरेट सेक्टर की धन की लहर है।
किसाना सभा के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कहा कि किसान आन्दोलन तय करेगा कि किसानों के हालात सुधरंगे या नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि किसानों मंे आन्दोलन को हम सब मदद कर भगत सिंह के सपनों को सरकार करें। 

श्रद्धांजलि सभा मेें  धीरेन्द्र कुमार यादव, रमेश कुमार सच्चिदानन्द, संदीप तिवारी, राम दुलारे यादव, लवकुश वर्मा, योेगेन्द सिंह, महेन्द्र यादव, राजकुमार दीपक वर्मा, आशीष शुक्ला, राजेन्द्र सिंह राणा, मो0 फदीर, धर्मेन्द्र, दिग्विजय सिंह, कुलदीप यादव, मुनेश्वर प्रसाद गोस्वामी, विनोद यादव, गिरीश चन्द्र तथा श्याम सिंह आदि प्रमुख लोग थे।
श्रद्धांजलि सभा का संचालन किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया सभा में प्रारम्भ मंे सभी लोगों ने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू के चित्रों पर माल्यापर्ण कर श्रद्धांजलि दी।

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माहौल बहाल करें

जिला अधिकारी बाराबंकी को ज्ञापन देते हुए
बाराबंकी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली छात्र संघ के अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी घोर निन्दनीय है क्योंकि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार ने कोई अपराध ही नहीं किया था अपितु नागपुरी मुख्यालय की विषाक्त विचारधारा से ग्रसित गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने षड्यंत्र कर दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी की मदद से फर्जी देश द्रोह का मुकदमा कायम कर गिरफ्तार कराया है जैसा कि आपको ज्ञात है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अद्भुत व महान नेता मोहनदास करमचन्द गांधी की हत्या नागपुरी विचारधारा से पोषित नाथुराम गोडसे ने कर दी थी यह वही लोग है कि गांधी की हत्या को सही साबित करते हुए गोडसे को महिमामंडित करते है इस देश के महान स्वतंत्रता संग्राम में नागपुरी मुख्यालय का कोई योगदान नहीं था अपितु अंग्रेजों की मुखबिरी का कार्य करने वाले यह लोग देश भक्ति-राष्ट्र भक्ति की नकली नकाब लगाकर अब देश भक्ति का प्रमाण पत्र जारी करने की कोशिश कर रहे हैं।
                                                  यह बाते भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व अखिल भारतीय किसान सभा ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन लिखते हुए आगे लिखा कि दिल्ली के अन्दर पटियाला कोर्ट के अन्दर व बाहर कन्हैया कुमार के समर्थकों की पिटाई इसी विषाक्त विचारधारा के लोगों ने की जिसका भी कोई संज्ञान गृहमंत्री ने नहीं लिया और न ही दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की गृहमंत्री कहता है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाफिज सईद प्रदर्शन करवा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि वेद प्रकाश वैदिक के माध्यम से गृहमंत्री हाफिज सईद से रिश्तेदारी जोड़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि हाफिज सईद की बात खूफिया एजेन्सी ने मनगढ़ंत पायी है।
                                        ज्ञापन में यह मांग की गई कि गृहमंत्री व दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी ने जो षड्यंत्र पूर्ण तरीके से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कराया है उन्हें अविलम्ब बर्खास्त करें तथा विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माहौल बहाल करें।
                                  ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में बृजमोहन वर्मा सचिव, कम्युनिस्ट पार्टी,  सह सचिव-रणधीर सिंह सुमन,  डा0 कौसर, डा0 उमेश चन्द्र वर्मा    अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह तथा महामंत्री सत्येन्द्र कुमार, अधिवक्ता निर्मल वर्मा, विजय प्रताप सिंह, आनन्द सिंह, नीरज वर्मा, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, कर्मवीर सिंह चैहान, प्रदीप सिंह, मु0 रईस कादरी, गनेश सिंह अनूप व संदीप वर्मा आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे। ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है।

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

जाति ने फिर जातिवाद किया

जबरदस्ती जाति बदल रहे है
 भा जा पा के  नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी के मामले में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों  की तुलना कुत्तों से की है।स्वामी   ने फिर  अपनी  जाति को पहचान कर जातिवाद किया और अपनी जाति को बढ़ाने का प्रयास कर रहे है लेकिन कुत्ते की उपमा देकर कुत्ते की वफ़ादारी का अपमान कर रहे है
                                          वही छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी मामले में हैदराबाद पुलिस ने विद्यार्थी परिषद के नेता सुशील कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है. बीते साल अगस्त महीने में सुशील ने वेमुला और उनके चार दोस्तों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की भी थी, वहीं सुशील ने यह कहकर मामले को नया मोड़ दे दिया है कि रोहित और उसके दोस्त याकूब मेमन के लिए नमाज पढ़ रहे थे. विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता सुशील कुमार ने कहा, 'रोहित वेमुला और उसके साथी स्टूडेंट्स मुंबई धमाकों के आरोपी याकूब मेमन के लिए नमाज पढ़ते थे.' सुशील ने कहा कि सुसाइड करने वाले रोहित और चार अन्‍य के खिलाफ उन्होंने पिछले साल पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी. अफवाहबाजी की मशीन  ने नई अफवाह  फैलाई .                          
                                          सुशील कुमार ने फेसबुक पर रोहित और उसके दोस्तों को 'गुंडे' कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद वह अपने दोस्तों के साथ विद्यार्थी परिषद के इस नेता से मिलने पहुंचा था. सुशील ने बताया कि इसी दौरान उन पर हमला किया गया, जिसके बाद वह अस्पताल में भर्ती हो गए. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक वह दो दिन बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे, जब उनका एपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ था. लेकिन सुशील की मानें तो वह उसी रात अस्पताल पहुंच गए थे.झूठ की पराकाष्ठा को पार करते हुए यह ड्रामा किया ,जो इनकी पुरानी फितरत है आज़ादी के बाद यह लोग बराबर इस हिकमत अमली  का प्रयोग दंगे फ़ैलाने  में करते रहे है
                                                           दत्तात्रेय ने ईरानी को लेटर लिखा था कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां चल रही हैं और इसमें शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके बाद मंत्रालय ने इस बारे में यूनिवर्सिटी को 4 रिमाइंडर भेजे थे। 

इनका असली चेहरा दलित ,पिछड़ा विरोधी है वह सामने आ रहा है 
-रणधीर सिंह सुमन

बुधवार, 20 जनवरी 2016

गांधी ही निशाने पर है

                      
  अमरीकी सम्राज्यवाद   ने जो जहर पाकिस्तान में बोया था उसका असर बराबर दिखाई दे रहा  है। आज भी इन आतंकवादियों  को हथियार कौन दे रहा है? यह बात जगजाहिर  है जिसने अफगानिस्तान में सोवियत संघ को परास्त करने के लिए आतंवादी संगठनों का निर्माण किया था  उन्ही ताकतों की हथियार सप्लाई है  अब यह छात्रो को भी नही बक्स रहे है पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के अशांत खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने बाचा खान प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में घुसकर छात्रों और शिक्षकों पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं जिससे कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 अन्य लोग घायल हो गए।  आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने पेशावर के पास स्थित बाचा खान विश्वविद्यालय पर हमले की जिम्मेदारी ली है। यह वही आतंकी संगठन है, जिसने 2014 में पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमला करके कई मासूम बच्चों को मौत की नींद सुला दिया था।              
                 यूनिवर्सिटी में आज  को बाचा खान की पुण्यतिथि मनाई जा रही थी।  20 जनवरी 1988 के दिन खान अब्दुल गफ्फार खान (बाचा खान) का निधन हो गया था। 1987 में भारत ने उन्हें भारत रत्न की उपाधि भी दी थी। सीमांत गांधी भी कहे जाने वाले ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान ताउम्र उदार और गांधीवादी रहे। वह भारत के बहुत क़रीब रहे।
                                         हमेशा गाँधी के विचार ही निशाने पर रहे है .  बाचा  खान  को सीमांत गाँधी कहा  जाता था हमारे यहाँ गाँधी को मार  डाला गया था और  अब जब  आज सीमांत गाँधी नही रहे तो उनके नाम की यूनिवर्सिटी  के बच्चो  को  मार डाला गया  है  आतंकवादी या सम्प्रदायिक   ताकते  यही करती है यहाँ ये ताकते कमजोर  है इसलिए दंगे कर अपनी मानव रक्त पिपाशा  को शांत  करती है इस हमले जितनी निंदा की जाए वह कम  है साम्राज्यवाद का अंत ही  आतंकवाद का अंत होगा  .          -
-रणधीर सिंह सुमन       

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

एक चमन के दो फूल

14-15 अगस्त 1947 में साम्राज्यवादी शक्तियांे ने एक चमन में लगे दो फूलों को अलग-अलग कर दिया था और भारत-पाकिस्तान बना दिए थे। विभाजन से पहले दोनों धर्मों के कट्टरवादी तबके आन्दोलन चला रहे थे कि दोनों धर्म के मानने वाले लोग एक साथ नहीं रह सकते हैं और धर्म के आधार पर भारत और पाकिस्तान बना। एक धर्म होने के बावजूद पाकिस्तान का विभाजन हो गया। भारत ने धर्म निरपेक्षता की नीति अपनाई और सरसब्ज बाग हुआ। वहीं पाकिस्तान ब्रिटिश साम्राज्यवाद से आजाद होने के बाद अमरीकी साम्राज्यवाद के खेमे में चला गया। साम्राज्यवादी लूट के चलते जो विकास होना चाहिए वह नहीं हुआ। जो शक्तियां ब्रिटिश कालीन भारत में हिन्दू राष्ट्र बनाने की रणनीति के तहत समाज में विघटनकारी बीज बो रही थीं वह आज पेड़ के रूप में धीरे-धीरे तैयार हुई। 2014 के चुनाव में वही ताकतें पाकिस्तान से 10 सर लाने की बात या युद्ध करने की बात करने लगी। कश्मीर सीमा पर आए दिन गोलाबारी होती रहती है वह भी अमरीकी साम्राज्यवाद के इशारे पर होती है। पाकिस्तान की सेना व आईएसआई अमरीकी नियंत्रित  हैं और आज अपना भी देश काफी कुछ अमरीकी खेमे में है। बाघा बाडर से लेकर हर बाडर पर शान्ति बनी रहती है और बराबर व्यापार भी चलता रहा है लेकिन क्या कारण हैं कि कश्मीर सीमा पर हमेशा छाया युद्ध चला करता है, मोदी से लेकर सुषमा स्वराज तक पाकिस्तान को नेश्तनाबूद कर देने की बात पिछले आम चुनाव में करते रहे हैं और देश के अंदर विषाक्त वातावरण तैयार किया गया लेकिन आज फिर वार्ता के दौर की बात शुरू हो गई और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान की यात्रा भी कर आई हैं। इसके पहले का यह इतिहास रहा है कि कारगिल से पूर्व इन्हीं ताकतों ने बस सेवा से लेकर तमाम सारी वार्ताए की और फिर कारगिल का अघोषित युद्ध भी किया। उसी तरह की स्थितियां फिर देश में पैदा की जा रही हैं कि शान्ति वार्ताओं का दौर शुरू होगा और फिर साम्राज्यवादी ताकतों के इसारे पर युद्ध। यह भारतीय जनता के लिए एक बहुत ही घातक रणनीति साबित होती है। इस समस्या का समाधान तब तक नहीं हो सकता है जब तक साम्राज्यवादी ताकतों के इसारे पर कश्मीर सीमा पर लोग युद्धरत रहेंगे। विदेश नीति का पाकिस्तान के संदर्भ में अचानक बदलने का कारण यह भी है कि मोदी की व्यक्तिगत चमक भारतीय जनता में फीकी पड़ी है और उनका हिन्दुत्ववादी शक्तियों का अन्तिम अस्त्र कथित देशभक्ति व राष्ट्रवाद से पुनः जीवन पाने की कोशिश होती है और इन्हीं शब्दों से यह कई बार जीवन पा चुके हैं। मुख्य बात यह भी  है कि  दोनों देशों  की जनता में कोई टकराव नही है .
  बॉलीवुड के प्रभावशाली अभिनेता ओम पुुरी हाल ही पाकिस्तान में एक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बने।जहां उन्होंने पाकिस्तान में बस जाने की बात कही।ओमपुरी ने कहा कि दादरी भीड़ ने एक मुस्लिम शख्स को मारने की बात हमारे देश को शर्मिंदा कर देने वाली है।पाकिस्तान के तीन दिवसिय दौरे पर उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया से कहा कि यदि उनके इस बयान पर भारत में कट्टरपंथी उन्हें परेशान करेंगे तो वे भारत छोड़ पाकिस्तान में आ बसेंगे।भारत में गोहत्या के मामले पर उन्होंने कहा कि जो भारत में गोहत्या को बैन करना चाहते है वे ढोंगी है।हम खुद ही बीफ निर्यात करके डॉलर कमाते है।पुरी ने बताया कि अगर पाकिस्तान भारत से अलग ना हुआ होता तो फिल्म इंडस्ट्री मुंबई की जगह लाहौर में होती।
उन्होंने आगे कहा कि 80 से 90 प्रतिशत लोग भारत में सेक्युलर है और वे पाकिस्तानियों से नफरत नहीं करते।भारतीय समाज में सारे लोग हिंसक नहीं है।चंद भ्रमित लोग है जो दोनों देशों के संबंधों को बिगाडऩा चाहते है।उन्होंने दोनों ही देश के लोगों से अनुरोध किया कि नफरत की राह छोड़कर आपस में मेलजोल की बात पर ध्यान दें।लोग क्यों जानवर की जैसी हरकतें करते है?अल्लाह भी निर्दोषों को मारने की इजाजत नहीं देता।
 इसी से सम्बन्धित   दूसरा मुद्दा आतंकवाद का है। आतंकवाद के नाम पर कथित राष्ट्रभक्ति का ज्वार शुरू होता है। जैसे-जैसे मोदी की चमक ढीली होती जा रही है वैसे-वैसे ही छदम्य आतंकवाद का खतरा दिखाई देने लगता है और इस समय जब उनकी चमक फीकी पड़ रही है तो तरह-तरह के समाचार आतंकवाद से सम्बन्धित प्रकाशित किये जा रहे हैं जिससे फिर उनको पुनः जीवन मिल सके। कौन नहीं जानता है कि तालीबान या आईएसआईएस को अमरीकी मदद से तैयार किया गया था और फिर उनका विनाश करने के लिए उन देशों के ऊपर भयानक बमबारी कर उन देशों को तबाह किये जाने की  बात उनकी  रणनीति का एक हिस्सा है। जब तक अमरीकी साम्राज्यवाद को परास्त नहीं किया जायेगा तब तक आतंकवाद दुनिया में समाप्त नहीं हो सकता है, साम्राज्यवाद का दूसरा स्वरूप ही आतंकवाद है। इस संबंध में भारतीय जनगण को सोचना होगा मीडिया द्वारा एक छदम्य आतंकवाद का वातावरण तैयार किया जा रहा है जो एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
-रणधीर सिंह सुमन

शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015

संघी खाएगा स्वर्ग जाएगा ! अल्पसंख्यक खाएगा नरक जाएगा !

बीफ के सवाल पर जहाँ देश के अन्दर पीट-पीटकर लोगों को मार डाला जा रहा है या पशुधन के व्यापारियों की पिटाई करके जान ले ली जा रही हो। वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख पदाधिकारी श्री मनमोहन वैद्य ने स्वीकार किया है कि संघ के लोग बीफ खाकर भी उसमें रह सकते हैं। टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार संघ के 3000 लोग बीफ का आनंद लेते हैं। संघ के लोग हिन्दी भाषी प्रदेश में बीफ के सवाल को लेकर समाज में कटुता पैदा करते हैं वहीं स्वयं उसका सेवन करने से परहेज नहीं करते हैं यह उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है। मुख्य सवाल यह है कि इनके दोहरे चरित्र के कारण देश के अन्दर निवास करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भयभीत होते हैं। दूसरी तरफ यह लोग भी बीफ के सवाल ऊपर तमाम सारी पूर्वाग्रह भरी बातें कर धार्मिक उन्माद पैदा करते हैं।
    मनमोहन वैद्य के बीफ खाने की बात स्वीकार करने के बाद भी संघ के लोग उन्माद फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ईमानदारी की बात तो यह है कि नागपुर मुख्यालय को बीफ के सवाल के ऊपर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए तथा गौरक्षा समिति से लेकर तमाम सारी सेनायें उन्होंने बना रखी है उसको भंग करें। अन्यथा उनकी दोगली राजनीति के कारण देश के एकता और अखण्डता विविधता को गम्भीर खतरा पैदा हो रहा है।
-रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

मोदी का नया गीत अम्बेडकर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' के मंत्र को अहम बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अंबेडकर के विचारों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। मोदी ने कहा कि देश की एकता में अंबेडकर के योगदान को कभी नकारा नहीं जा सकता है
अम्बेडकर  ने 1935 कहा कि ' हमें हिन्दू नहीं रहना चाहिए मैं हिन्दू धर्म में पैदा हुआ यह मेरे बस की बात नहीं थी लेकिन मैं हिन्दू रहते हुए नहीं मरूंगा यह मेरे बस की बात है
 रामास्वामी पेरियार को उन देवताओ को नष्ट कर दो जो तुम्हे शुद्र कहे , उन पुराणों ओर इतिहास को ध्वस्त कर दो , जो देवता को शक्ति प्रदान करते है |
यह तीन बाते  है दो  बाते एक दुसरे की पूरक है तथा मोदी  की बात दोनों बातो के विपरीत है प्रधानमंत्री मोदी का अटूट सम्बन्ध आर.एस.एस.से है |वोटो को प्राप्त करने के लिए  मोदी अम्बेडकर के साथ रहना चाहते है संघ की विचारधारा के विपरीत अम्बेडकर  की  विचारधारा है इसलिए अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म छोड़ कर बौद्ध धर्म अपनाया था |संघ अब उद्घोषणा राम मंदिर की कर रहा है वही मोदी अम्बेडकर का जाप शुरु कर दिए है |सामाजिक आर्थिक व राजनैतिक संघर्ष जब तेज होगा तो संघ का राम कमजोर होगा जिसका नतीजा बिहार  चुनाव परिणाम है |संघ ने   अयोध्या में तो मस्जिद तोड़वा दी ,  राम को तिरपाल में कर दिया.  अम्बेडकर वादी शक्तिया अगर तेजी से बढ़ेगी तो संघ के राम तिरपाल में ही बने रहेंगे |अम्बेडकर से आगे रामास्वामी पेरियार तक विचार पहुचेंगे तब संघ के हिन्दुवत्व का क्या होगा ? ज्यादा दिन मुखौटा नही चल सकता है चाहे मुखौटा पटेल का लगाओ या चाहे अम्बेडकर का असली सूरत सामने आ ही जायेगी |वह चेहरा भयानक होगा


रणधीर सिंह  सुमन

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

रामनामी ओढ़कर, बधिक मत बने


    भारतीय संसद में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बड़े गर्व से कहा कि संविधान में 'धर्मनिरपेक्षता' शब्द का सबसे ज्यादा दुरूपयोग हुआ है इस शब्द के दुरूपयोग को रोका जाए कहीं न कहीं उनके मन कि कसक छलक आयी आजादी की लड़ाई के लि नौजवानों को रोकने का प्रयास किया था और कहा था कि हिन्दुत्व मुख्य चीज है और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को पेश किया था ब्रिटिश-साम्राज्यवाद से हिन्दुत्ववादी शक्तियों को कोई दिक्कत नहीं थी। ‘सेकुलरिज्म’ संविधान की प्रस्तावना  में ही निहित है जिसका आशय यह है कि ‘देश का कोई धर्म नहीं है देश में रहने वाले विभिन्न धर्मों के नागरिकों को अपने-अपने धर्म है नागरिकों द्वारा माने जा रहे धर्म उसके अपने हैं वह अपने जीने के पद्धति राज्य के हस्तक्षेप के बगैर स्वतंत्रपूर्वक करेगा एक तरफ संविधान दिवस मनाया जा रहा था दूसरी तरफ संविधान को किस तरह से समाप्त किया जाए उसकी भी साजिश की जा रही थी डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान को रामनामी लोगों ने कभी माना नहीं है।
    राजस्थान में भाजपा सरकार ने उच्च न्यायालय के सामने ‘मनु महाराज’ की मूर्ति स्थापित कर यह सन्देश दिया था कि देश का संविधान ‘मनुस्मृति’ होना चाहिए यह पीड़ा इनके हमेशा भाषणांे में भी झलकती रहती है यह देश को मनुस्मृति संविधान की किताब से संचालित कर डा भीमराव अम्बेडकर समेत बहुसंख्यक आबादी को सेवक की भूमिका में पहुँचा देना चाहते है इनकी इस अवधारणा में देश के अन्दर अन्य धर्मों के नागरिकों का कोई अर्थ नहीं है।
 समय रहते हुए यदि जागरूक लोग नहीं चेते तो निश्चित रूप से इस देश के इतिहास को संघी प्रयोगशाला हिन्दू और मुसलमान के आधार पर विभक्त कर देगी और मुस्लिम शासकों द्वारा किये गए अच्छे कार्यों को वह हिन्दू विरोध में बदल देगी. मुख्य कारण यह है कि संघी प्रयोगशाला के लोगों का चेहरा भारतीय इतिहास में ईस्ट इंडिया कंपनी या अंग्रेजों की चापलूसी करने का ही रहा है. इनके पास कोई नायक नहीं है इसलिए भारतीय इतिहास के महानायकों को यह लोग खलनायक की भूमिका में बदल देना चाहते हैं. इसके लिए इतिहास इन्हें माफ़ नहीं करेगा. कर्नाटक सरकार जब टीपू सुलतान का जन्मदिन मना रही है तो तथाकथित हिन्दुवत्व वादी इतिहास के इस महानायक की चरित्र हत्या कर रहे हैं. इन मुखौटाधारियों की पोल खुल चुकी है इसीलिए दिल्ली, बिहार में बुरी तरह पराजित होने के बावजूद कोई सबक नहीं ले रहे हैं.
    आधुनिक भारत में बहुसंख्यक आबादी कर्पोरेट सेक्टर की गुलामी करने के लिए मजबूर हो चुकी है उनका सिकन्जा धीरे-धीरे राज्य के अधिकारों पर भी होता जा रहा है जिसका परिणाम यह हो रहा है कि देश के अन्दर महंगाई, बेरोजगारी, भूखमरी तेजी से बढ़ रही है। लोग कर्ज के मकड़जाल में फंसकर आत्महत्या कर रहे है उनकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता न पड़े तो ताकतवर तबकों को हिन्दू राष्ट्र का सपना दिखाया जा रहा है और हिन्दू राष्ट्र के सहारे उनको यह भी लालीपाॅप दिखाया जा रहा है कि बहुसंख्यक आबादी उनके सेवक की भूमिका में होगी मनुस्मृति का राज्य होगा इसके लिए दलित समुदाय में क्रान्तिकारी परिवर्तन करने वाले लोगों का भगवाकरण किया जा रहा है और उन्हें राममानी ओढ़ाकर उनके वध की तैयारियाँ की जा रही हैं। इसलिए हिन्दुत्व वादी शक्तियों से होशियार रहने की जरूरत है नहीं तो यह रामनामी ओढ़कर बधिक का कार्य करने वाले हैं।
-रणधीर सिंह सुमन

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

आतंकवाद पर नंगे है -यह सब

आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी व नाटो देश अब बुरी तरह बेनकाब होना शुरू हो चुके हैं. बगदादी के खिलाफ चल रहे युद्ध में नाटो सदस्य तुर्की ने सीरिया की सीमा में रूसी वार प्लेन को मार गिराया है और यह आरोप लगाया है कि उस विमान ने तुर्की की सीमा को क्रॉस किया था. दक्षिण पश्चिम एशिया काफी समय से अशांति का क्षेत्र बना हुआ है. जिसके मुख्य जिम्मेदार अमेरिकी व नाटो सदस्य देश हैं. यह वही मुल्क है जोकि आतंकवाद को समाप्त करने के लिए विभिन्न देशों में सरकारों को गिरा कर अपनी कठपुतली सरकार बनाने का काम कर रहे हैं. आतंकवाद के नाम पर आतंकी संगठनो को यह पहले बनाते हैं और फिर उनको नष्ट करने के नाम पर उस देश के नागरिकों के उपर हवाई हमले करते हैं, इस तरह से इन देशों ने लाखों लोगों की हत्याएं कर दी हैं और लाखों लोगों को बेघर कर दिया है यह लोग इस क्षेत्र की सम्पूर्ण मानव प्रजाति को नष्ट करने पर तुले हुए हैं. मानवता का कोई मामला नहीं रह गया है दैत्य दानव की तरह से सस्ते में पेट्रोल खरीदना और फिर आतंकी संगठनो को हथियार की सप्लाई करना मुनाफा इनका मुख्य उद्देश्य है. अगर यही नीतियां दुनिया में जारी रही तो मानव की तमाम सारी नस्लों को यह नष्ट कर देंगे. तुर्की, अमेरिका और फ्रांस साथ हैं। वहीं, रूस खुद आईएसआईएस पर हमले कर रहा है
वहीँ, कलकत्ता विश्वविद्यालय  के प्रोफेसर  जगदीश्‍वर चतुर्वेदी लिखते है आईएस की भाड़े की फौज को देखकर ऐसा लग रहा है कि यह नया फिनोमिना है। लेकिन सच यह है कि भाड़े की फौज खड़ी करना,आतंकी हमले करना,स्थिर सरकारों को गिराना और उनके स्थान पर कठपुतली सरकारों को बिठाने का धंधा बहुत पहले से सीआईए करता रहा है। मध्यपूर्व में दाखिल होने के पहले अनेक देशों में भाड़े के सैनिकों की भर्ती करके हमला करने,हमला गुटों को हथियार देने,पैसा देने,प्रशिक्षण देने आदि के काम भी सीआईए करता रहा है। मीडिया में आईएस और उसकी भाड़े की सेना का कवरेज कुछ इस तरह आ रहा है कि यह कोई नई बात हो। शीतयुद्ध के दौरान सीआईए ने भाड़े की सेना खड़ी करने के मामले में विशेषज्ञता हासिल कर ली थी और अनेक देशों में जनता के द्वारा चुनी गयी सरकारों को गिराया,उनके खिलाफ भाड़े के सैनिकों के जरिए युद्ध चलाए, उन देशों में अस्थिरता पैदा की । 
रूस के लड़ाकू विमान को नाटो सदस्य देश द्वारा मार गिराए जाने की घटना के बाद एक बड़े युद्ध की भूमिका बन रही है. जिसमें उस क्षेत्र के निवासियों को ही मरना है, अपंग होना है. संयुक्त राष्ट्र संघ, सुरक्षा परिषद् जैसे संगठन साम्राज्यवादी मुल्कों के आगे काफी पहले ही बौने साबित हो गए हैं. सी आई ए अपनी नापाक गतिविधियाँ जारी किये हुए है. उसकी योजनाओं को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ  के पास कोई योजना नहीं है. सी आई ए पहले भी दुनिया में किस देश में कौन शासक होगा यह तय करता आया है. उसकी इच्छा के विपरीत अगर कोई शासक हुआ तो उसके कत्लेआम करने की एक बड़ी परंपरा है.

सुमन 

रविवार, 25 अक्टूबर 2015

गांधी व नेहरू के व्यक्तित्व को दागदार करने में जुटे -ओंकार सिंह

जिन लोगो का देश की आजादी व उसके निर्माण में कोई योगदान नही रहा वह आज गांधी व नेहरू के व्यक्तित्व को दागदार करने में जुटे है। अपने राजनीतिक हितो की खातिर वह देश की अखण्डता, अस्मिता व सामाजिक समरसता को समाप्त कर देना चाहते है। देश आज संकट के दौर से गुजर रहा है। युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह अपने गौरव मय अतीत का अध्ययन करे। इन विघटनकारी शक्तियों द्वारा नित्य परोसे जा रहे दिग्भ्रमित विचाारो को नकार कर एक मजबूत भारत का निर्माण करें।
    यह विचार प्रदेश क्रांग्रेस कमेटी के महासचिव ओंकार सिंह रविवार को गांधी भवन में जिले के पूर्व विधायक सामाजिक विचारक एवं सीनियर कांग्रेसी लीडर स्वर्गीय गजेन्द्र सिंह की तीसरी पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित श्रृद्धांजलि सभा के मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त कर रहे थे। उन्होने स्वर्गीय गजेन्द्र सिंह के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह एक ईमानदार, स्पष्टवादी, निर्भीक एवं जनहित व राष्ट्रहित प्रेमी व्यक्ति थे। उन्होने राजनीति में कभी अपने वसूलो व नैतिक मूल्यो से समझौता नही किया। शायद यही कारण है कि राजनीति में जिस शिखर पर पहुंचना चाहिए था वह वहाॅ नही पहुॅच सके।
    उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व एम0एल0सी0 गयासुद्दीन किदवई ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह देश प्राकृतिक सम्पदा सम्पन्न है। इसकी गरीबी विचारो की गरीबी है। उन्होने देश की नौजवान पीढ़ी को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश के लोकतन्त्र व संविधान की रक्षा के लिए सामने आए और धन दौलत अर्जित करने के स्थान पर विचारो का बैंक बैलेन्स अर्जित करे।
    जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश कुमार दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि दादा गजेन्द्र सिंह हम सभी के प्रेरणा स्रोत थे और उनकी अनुपस्थिति में उनके विचारो का अनुसरण करना ही उनकी सच्ची श्रृद्धांजलि होगी।
    पत्रकार मोहम्मद तारिक खान के संचालक में सभा को प0 राजनाथ वर्मा, महन्त गुरू शरणदास, केदार बख्श सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार सिंह, डा0 तसखीरूल हसन, नवीन सेठ, जिला उपभोकता फोरम के पूर्व सदस्य हुमायू नईम खान, प्रशांत मिश्र व जैनुल कदर ने भी सम्बोधित किया।
    इस अवसर पर सत्येन्द्र, बलराम सिंह, निर्मल वर्मा, विजय प्रताप सिंह, करमवीर सिंह, राजेन्द्र सिंह, रामलखन, अतुल, पुष्पेन्द्र सिंह, अब्दुल सलाम, प्रदीप सारंग, मो0 अतहर, अमर प्रताप सिंह, अजय सिंह, बब्बन सिंह, पुर्णांशू सिंह, डा0 कौसर हुसैन, वसीम राइन, राजेश सिंह, प्रदीप सिंह, मो0 आलम, डा0 उमेश वर्मा, बी0पी0दास, विनय दास, नीरज वर्मा एडो0 आदि उपस्थित थे।

-रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !
      


मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

नागपुरी हिन्दुवत का असर


हरियाणा में फरीदाबाद के सनपेड गांव के एक दलित परिवार पर दबंगई का कहर टूट पड़ा। बदमाशों ने मंगलवार तड़के पेट्रोल छिड़ककर पूरे दलित परिवार को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में कच्चे मकान में सो रहे दो मासूम बच्चों की मौत हो गई और उनके माता-पिता गंभीर रूप से झुलस गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह परिवार अपने घर में सो रहा था तभी कुछ लोगों ने उनके मकान में पेट्रोल डाल कर आग लगा दी। घटना में नौ महीने के एक बच्चे और उसकी ढाई साल की बहन की मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसे उनके माता- पिता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हरियाणा के फरीदाबाद में चार दलितों के उपर पेट्रोल डालकर जलाने की घटना कोई आश्चर्य पूर्ण बात नही है यह तो होना ही है नागपुरी हिन्दुवत की विषाक्त विचारधारा ने अल्पसंख्को के खिलाफ जो वातावरण तैयार किया उसका प्रभाव समाज में असर दिखने लगा है .हिन्दुवत की विचारधारा के अनुसार दलित सेवा करने के लिए है और उन्हें सेवा के अलावा कोई कार्य नही कर सकते है . भारतीय समाज में जातिव्यवस्था के अनुसार वह मंदिर में प्रवेश करने के अधिकारी नही है लेकिन समाज सुधारको के प्रयासों से उन्हें मंदिर में प्रवेश करने का थोडा अधिकार मिला तो वह सबसे बड़े हिन्दू हो गएफिर क्या था संघियों ने उन्हें अपना निशाना बनाकर उग्र हिन्दुवत में बदल दिया और मस्लिम विरोध का झंडा भी पकड़ा कर देश में दंगो की अगवाई कराई.लेकिन जब हिन्दुवत मजबूत हुवा तो जातीय व्यवस्था की सिरमौर जातियों की बांछे खिल गई और उन्होंने पुरानी व्यवस्था लागू करना शुरू कर दिया ..जातीय उच्चता बात ने विभिन्न जगहों पर जाति के नाम पर दलितों को मरना पीटना आरम्भ कर दिया . अधिकांश दलित नेता भा ज पा की और से एम. पी.-एम.एल .ए. है वह कुछ बोलने की स्थिथि में नही होता है हरियाणा में बहुत जगहों पर दलितो पर  अत्याचार जैसे  दलित बस्तियों में आग लगाना -पिटाई  करना व बलात्कार आम बात हो गई.भा ज पा शासित प्रदेशो में वोट तो लेने के दलित हिन्दू हो जाता बाद में उसे मनुस्मति के हिसाब  से जीना होता है
सवर्ण  मानसिकता कट्टर हिन्दुवत  से ही पैदा होती है उन विचारो का वाहक संघ है वह देश को एक ऐसे देश में बदलना चाहती है जहाँ सवर्ण जातियों की सेवक अन्य जातिया हो .यह सब ऐसे कदम है जो विनाशकारी है हिटलर का युग वापस लेने  वाले लोगो के यह मंसूबे पुरे नही होने वाले है लेकिन कष्ट तो देगे ही . भारतीय संविधान व कानून न मानने वालो  को अब देशद्रोही  नही  कहा जाता है नई राष्ट्र भक्ति की परिभाषा के अनुसार देश्द्रोहिता  करो -संविधान कानून न मानो उलटे राष्ट्र भक्ति  के गीत गुनगुनाओ तभी आप संघी राष्ट्र वादी होगे.
-रणधीरसिंह   सुमन
लो क सं घ र्ष !

रविवार, 18 अक्टूबर 2015

नया वेद- संघियों का नरसंघारी वेद

वेद के समय में न तो मुसलमान थे न इसाई ही थे तो किन लोगो की हत्या गाय खाने के आरोप में कर दी जाती रही है इस बात कोई भी जवाब नागपुरी गैंग के पास नही है अगर वेद में यह कही नही  लिखा है तब  गौ मांस खाने वालो का वध कर दिया जाना चाहिए वाली यह बात कहाँ से आई .नागपुरी प्रयोगशाला में  दंगे भडकाने के जो रोज -रोज प्रयोग किए जाते है उसी समझ के तहत जानबूझकर यह कहानी भी प्रकाशित की गई है बुधि निरपेक्ष भक्तो ने मान लिया और गली -गली गाने लगे ,फिर गिरगिट की तरह रंग बदला हमने नही कहा-बात नही समझ पाए है लोग .जब तक शैतानो का चेहरा लोग नही पहचानेगे तब तक यह लोग झूठ दर झूठ बोलकर देश की एकता और अखंडता  को नुकसान पहुचाते रहेगे .
 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पाञ्चजन्य में गाय को मारने की अफवाह के बाद दादरी में इकलाख की पीटकर हत्या करने के मामले को सही ठहराया गया। पाञ्चजन्य के एक लेख में कहा गया है कि वेदों में गाय को मारने वाले पापियों की हत्या का आदेश दिया गया है. आरएसएस के डॉक्टर मनमोहन वैद्य ने कहा कि पाञ्चजन्य और आर्गेनाइजर आरएसएस के मुखपत्र नहीं हैं। 
दूसरा नाटक भी जारी हो गया है कि मोदी व अमित  शाह ने  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा, विधायक संगीत सोम और सांसद साक्षी महाराज को चेतावनी दी है।अगर जरा सी नैतिकता शेष है तो निकालो पार्टी से -लेकिन यह सब बाते ऊपरी दिखावा है अन्दर से खुश बाहर से नाराज यह इनकी सोची समझी  रणनीति का हिस्सा है 
वेद  के समय में भी नरसंघार हुए थे और अब भी यह लोग नरसंघार  कर रहे है यह मानवीय तो हो नही सकते है जानवर के लिए हत्याए करने का आदेश जरुर देते रहेगे -यह इनकी फितरत है 
झूठ के यह सौदागर   कभी भी कुछ कह  सकते है गाँधी की हत्या के बाद कहा था कि गोडसे  से हमारा कुछ लेना देना नही है फिर आज भी गोडसे का प्रचार करते रहते है ---आज कहा  है कि पाञ्चजन्यमुख  पत्र नही है फिर कहेंगे कि  कौन मोदी -हमारे यहाँ कोई सदस्यता  रजिस्टर  ही नही होता है आज कहेगे जायज 'वेद के अनुसार गौ हत्‍या करने वाले को मौत की सजा, दादरी हिंसा जायज 'कल कहेगे हमने  कहा ही नही .
 -रणधीरसिंह सुमन 

शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

न मांस खाओ, न दाल खाओ ,न पानी

इसी  से काम चलाओ
मांस  न खाओ धर्म नष्ट होगा .शाकाहारी खाना  भी नही खाने देगे पानी में भी घोटाला करेगे . यह बाते  केंद्र सरकार के काम काज करने के ढंग से निकल कर आ रही है . केंद्र सरकार की नीतियों के कारण २०० रूपए किलो अरहर की दाल हो गई है . अन्य दाले भी; चिकन मीट से महंगी  हो गई है | दूसरी ओर प्रधानमंत्री विदेश यात्राओ या चुनाव सभाओ से फुरसत ही नहीं मिल पा रही  है. नरेन्द्र मोदी की स्तिथ यह हो गई है की वह बेलगाम घोड़े पैर सवारी कर रहे है .साक्षी महराज ,योगी आदित्यनाथ , साध्वी प्राची , महेश शर्मा , गिरिराज सिंह , जैसे   हवाबाज नेतागण लोगो की धार्मिक भावनाए भड़काने वाले बयांन देकर इतने विवाद पैदा कर दिये  है कि उन्हें ही निपटाना मुश्किल  हो गया है . भूख , महगाई , बेरोजगारी , शिक्षा , स्वास्थ ,सुरक्षा , कानून ब्यवस्था जैसे शब्द परदे के पीछे चले गये है. रह गई है गाय उसका गोबर और उसका मूत यह लोग देश की सारी समस्याओ का समाधान गाय के गोबर व मूत में ही देख रहे है.
वहीँ उत्तर रेलवे के रेलवे की  प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को रेल नीर न देकर दूसरी कंपनियों को दिया जा रहा था।नीर घोटाले में को सीबीआई ने सात प्राइवेट कंपनियों के 13 ठिकानों पर छापेमारी कर 20 करोड़ रुपए कैश जब्त किया।रेल मंत्री का रेलवे  से कोई मतलब ही नही है .
जमाखोरों , मुनाफाखोरो के सम्बन्ध में शासक दल उनका मालिक नागपुरी मुख्यालय हमेशा चुप्पी साधे रहता
है .वह सिर्फ और सिर्फ दंगा कराने  का उस्दाद  है इन सारी समस्याओ  से  मुसलमानों से ही दिक्कत है हिन्दुओ को  नही यह उसकी समझदारी है .दाल और सब्जियो के दाम में साथ-साथ विभिन्न वस्तुओ के जो दाम बढ़ रहे है उसका सीधा सम्बन्ध जमाखोरों की जमाखोरी है . मुख्य बात यह है की उद्योगपतियों के मुनाफे की दर हजारो गुना बढ़ी है उसके ऊपर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है . यह समझते है कि जनता को मुसलमान विरोध व गाय के सवाल को खड़ा कर हम शांतिपूर्वक तरीके से हम सरकार चला लेंगे यह उनकी विकृत मानसिकता की समझ हो सकती है लेकिन जनता की बेहतरी के सवाल को लेकर अगर कोई सकारात्मक कदम न उठाया गया तो यह फासिस्ट सरकार का  भी चलना मुश्किल  होगी .
 गांवो के अंदर खेत मजदूर निचले तबके के लोग अब न दाल खाने की स्थित में है ,न सब्जी .न खाना है न पानी -मोदी नाम से ही काम चलाओ -हिन्दुवत  का बाजा बजाओ . भूखे मर जाओ .इस जन्म  में नही -अगले जन्म में सब कुछ मिलेगा का गीत गुनगुनाओ .इस जन्म में पिछले जन्म के पापो  को भुक्तो .भूखे मर कर  जन्नत  पाओ-वहां सोमरस का पान  करो --अप्सराओ का सानिध्य  प्राप्त करो ---संघर्ष  मत  करो -ढोगियो को संसद  पहुँचाओ ---------------राम -राम जपना ,पराया माल अपना ------------

-रणधीर सिंह  सुमन 


रविवार, 11 अक्टूबर 2015

नेपाल में फेकू हारा -भारत नहीं

 भारत की विदेश नीति का यह प्रमुख हिस्सा रहा है कि पडोसी देशो की अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप न  किया जाय और इसी कारण उसके सम्बन्ध पाकिस्तान को छोडकर सभी से अच्छे सम्बन्ध रहे है भारत में नयी सरकार आने के बाद उसकी विदेश नीति अस्पष्ट हो गयी है जिसका नतीजा नेपाल में दिखाई दे रहा है वहां पर इस चुनाव में भारतीय हस्तक्षेप की बात खुल कर सामने आयी कि सांसदों को खरीदने के लिए रुपया तक भेजा गया हमारे प्रधानमंत्री की पहली नेपाल यात्रा पर उनका भब्य स्वागत हुआ था लेकिन दूसरी यात्रा में उनकी अनाप सनाप बातो ने नेपाली जनता को रुष्ट  कर दिया था. नेपाली संविधान को बनाये जाने की प्रक्रिया में उनकी पार्टी के हस्तक्षेप ने नेपाली जनमानस में देश के प्रति आक्रोश पैदा  कर दिया. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार नागपुरी दिशा निर्देशों के अनुरूप संविधान में वह हिन्दू राष्ट्र घोषित कराना चाहते थे जिसको वहा के संविधान निर्माताओ ने अस्वीकार कर दिया .जिसके फलस्वरूप हस्तक्षेप कर्ताओं को मुहं की खानी पडी वहीँ आज नए संविधान के बाद नेपाल ने अपना  प्रधानमंत्री भी चुन लिया है। 558 मेंबर वाली संसद ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्कसिस्ट लेनेनिस्ट  के नेता खडग प्रसाद शर्मा ओली को पीएम को तौर पर चुना। केपी शर्मा ने नेपाली कांग्रेस पार्टी के नेता व पूर्व प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को हराया है .
संसद में आज हुए मतदान में सीपीएन-यूएमएल के प्रमुख ओली को 338 मत मिले, जबकि नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष कोइराला ने सिर्फ 249 मत हासिल किए. प्रधानमंत्री चुने जाने के लिए 299 मतों की जरुरत थी.कुल 587 सदस्यों ने मतदान किया.हस्तक्षेप न किया होता तो शायद परिणाम दुसरे होते . इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री लगातार विदेश यात्राएं करते रहते है और अप्रवासी भारतीयों से जय जयकारा करते रहते है विरोध वहां भी शुरू हो गया है.विरोध में अप्रवासी भारतीयों द्वारा अपशब्दों का प्रयोग भी किया जा रहा है. प्रधानमंत्री विदेश में भी चुनाव सभा संबोधित करते है और विपक्षी दलों  के ऊपर आरोप- प्रत्यारोप करके  देश की गरिमा  को ठेस पहुचाते है .पहले यह नीति थी कि जो भारतीय किसी भी देश का नागरिक हो गया है वह उसी मुल्क की बेहतरी के सम्बन्ध में सोचे तथा उसी मुल्क के प्रति निष्ठावान रहे. अब यह नीति बदल गयी है अप्रवासी भारतीयों को बार -बार  संबोधित करने से अगर उनकी निष्ठां संदेह के घेरे में आयी तो निश्चित रूप से जिस मुल्क में रह रहे है दिक्कते पैदा हो जायंगी . इस सम्वन्ध में नागपुरी सोचने में असमर्थ है.अमरीकियों ने सुनियोजित तरीको से मुसलमानों में यह नारा दिया कि पहले वह मुसलमान है फिर जिस देश में रहते है वहां के नागरिक है.जिसका असर यह हुआ कि दुनिया में उनके ऊपर सवाल भी अमरीकियों ने ही खड़ा करा दिया. उनकी दिक्कते बढ़ी.नेपाल की जनता और भारतीय जनता में घनिष्ट सम्वन्ध है फेकू की उल्टी सीधी हरकतों से सम्वन्ध खत्म नही होने जा रहे है लेकिन एक विवाद बढ़ रहा है . समय रहते जिस दिशा में कदम उठाने की जरुरत है. भारत -नेपाल की जनता की एकता जिंदाबाद ! -रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !

सोमवार, 21 सितंबर 2015

सोशल मीडिया पर पहली बार कार्यशाला

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सोशल मीडिया पर पहली बार कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्घाटन डॉ गिरीश द्वारा किया गया और अरविन्द राज स्वरूप ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यशाला में सोशल मीडिया पर प्रभावी उपस्थिति और सोशल नेटवर्किंग को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर विचार विमर्श किया गया जिससे कि पार्टी के विचारों का लोगों में सार्थक एवं अधिकाधिक प्रसार किया जा सके। रवीन्द्र प्रभात एवं रणधीर सिंह सुमन ने लोगों को इस दिशा में कैसे काम किया जाए यह समझाने में मदद की। सभी कामरेड्स ने अपने विचार साझा किए कि इस दिशा में कैसे आगे बढ़ना है।
एक नई पहल करते हुए 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश ईकाई ने अपनी सोशल मीडिया यूनिट का गठन भी किया। देश में सीपीआई की यह पहली सोशल मीडिया सेल होगी और पार्टी के विचारों से लोगों को जोड़ने की दिशा में काम करेगी। वहाँ उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों ने इस कदम का स्वागत किया और हरसंभव योगदान का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन समय पर पुन: इस कार्यशाला के और बड़े स्तर पर करने का संकल्प भी पार्टी पदाधिकारियों ने लिया। सभी साथियों ने माना कि यह सोशल मीडिया की पहल उत्तर प्रदेश में पार्टी की जड़ें मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
सोशल मीडिया सेल की औपचारिक जिम्मेदारी निम्नलिखित लोगों को दी गई :
संयोजक -रणधीर सिंह सुमन सहसंयोजक. जितेन्द्र हरि पाण्डेय
सहसंयोजक - मयंक चक्रवर्ती सदस्य - . मसीरउद्दीन संजरी
सदस्य - प्रभात त्रिपाठी सदस्य -  अमित यादव

शनिवार, 19 सितंबर 2015

सुभाष राजवंशी की थाने में हत्या

मजिस्ट्रीरियल जांच सं0-55 दि0 01.09.2015 व जांच सं0 0.66 दि0 07.09.2015 के सम्बन्ध मेें रणधीर सिंह सुमन सहसचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी का बयान मैं सशपथ बयान करता हूँ कि जनपद बाराबंकी के देवां थाने की चौकी माती में सरकारी कार्य के अतिरिक्त प्रापर्टी डीलिंग का भी कार्य होता था और प्रापर्टी डीलर के विवाद जमीन पर कब्जा दिलाना कब्जे को हटाना ही होता था। सुभाष राजवंशी उर्फ सुुभाष रावत वर्तमान नि0 सरसौंदी था। उसकेे मां-बाप मर जाने के कारण सरसौंदी स्थित ननिहाल में तीन वर्ष की आयु से रहता था। उसका पता सरसौंदी थाना, देवां नि0 बाराबंकी था लखनऊ नही दिनांक 30.08.2015 को माती बाजार मेें उसको माती चौकी इंचार्ज समेत जयप्रकाश यादव, प्रभूनाथ यादव, राजेन्द्र विष्ट सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने पकड़कर सुभाष राजवंशी को पीटना प्रारम्भ कर दिया और फिर माती चौकी में ले जाकर मारा-पीटा क्योंकि सुभाष राजवंशी द्वारा प्रापर्टी बेचने के लिए तैयार नही था जब उसकी स्थित अत्याधिक खराब हो गयी तो उसकी मृत्यु हो जाने से बचाव के लिए 4 बजे दिनांक 30.08.2015 को देवां थाने ले जाकर पुलिस ने अपने बचाव में लाकप में आत्म हत्या की कहानी बनाकर सरकारी अभिलेखों में लिखा पढ़ी कर दी। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी थाना देवां जिला बाराबंकी पहंुचकर सुभाष राजवंशी की कथित खुदकुशी साबित करने के लिए प्रयास शुरू हुआ और रात को ही प्रशासनिक अधिकारियों ने चिकित्सा विभाग के डाक्टर व वीडियोग्राफर को मोबाइल से दिशा निर्देश देने लगे। इसी बीच में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी लखनऊ से सुभाष राजवंशी के सौतेले बाप को भी ले आई व सुभाष राजवंशी के सगे मामा रामसुचित रावत व नरेन्द्र रावत को ले आई और 31.08.2015 को प्रातकाल में पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम करा दिया जाता है। फिर भारी पुलिस बल व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भैंसाकुण्ड लखनऊ ले जाकर मामा व सौतेले पिता के सादे कागज पर हस्ताक्षर कराकर शव को जला दिया जाता है। जिससे पुनः पोस्टमार्टम संभव न हो सके। पोस्टमार्टम में एन्टी मार्टम इंजरी नही आई यदि पोस्टमार्टम के समय वीडियों रिकार्डिंग कैसेट की फोरेंसिक लैब में जांच करायी जायेगी तो यह साबित हो जायेगा की वीडियों में चोटों का निशान मिटाने के लिए कहाँ -कहाँ पर छेड़छाड़ की गयी है। 10 बजे 31.08.2015 को दिन में पुलिस व प्रशासनिक अमला सुभाष राजवंशी की शव दाह करके फुरसत पायी अगली कड़ी में दोषी कर्मचारियों ने सम्बंधित थाना देवा माती चैकी फूंकने की बात अधिकारियों को बतायी जाने लगी जिस पर कथित रूप से फूंकी चौकी में देखने के लिए उप जिलाधिकारी नवाबबगंज बाराबंकी का अगला जिलाधिकारी बाराबंकी पुलिस अधिकारी माती पुलिस चौकी माती पहुंच जाते हैं और उसके बाद थाना देवा की पुलिस बल व अमला पुलिस बल माती पहुंचकर पूरे माती बाजार को बलपूर्वक बन्द करा दे देती है। इसके बाद जरूवा गांव में पुलिस बल पहुचंकर राम दुलारे वर्मा व पूर्व प्रधान कल्लू राम जरूवा के घर में घुसकर जो मिला उसको मारा पीटा घर के सारे सामान को तोड़ दिया घर के बाहर जो सामान मिला उसको तोड़ डाला। पानी के इंजन व मोटर साइकिल कुए में डाल दिया। कल्लू व पूर्व प्रधान के घर में जीना तोड़ डाला इस तरह जरूवा गांव में पुलिस बल ने 50 लाखों के सामान को नष्ट कर दिया । इसके पश्चात मुरादाबाद मुजफ्फरमऊ सरसौंदी में भी लोगों को मारा पीटा गया और तोड़फोड़ किया गया सरसौंदी में पूर्व प्रधान कन्हैया लाल पूर्व प्रधान रमता के घर में पुलिस ने घुसकर मारा पीटा सामान तोड़ दिया राशन फेंक दिया दीवार तोड़ दी औरतों व बच्चों को भी मारा पीटा इस काण्ड में सभी पुलिस बल के हाथ में बेत की बजाए दुरमुट कुदाल बेलचा थे। दरवाजे तोड़ डाले हृदयराम पूर्व सरपंच के घर में डबल बेड दो पलंग व 2 गेट 2 स्टूल, टी0वी0 सी0डी0 गैस चूल्हा इंजन खाना बनाने वाला 10 लीटर पिपरमेंट का तेल बहा दिया। 6400 रूपये नकद उठा लिए एक जंजीर सोने की 15 ग्राम, 1 अंगूठी सोने की, कान की झुमकी लूट ली गोदरेज की अलमारी तोड़ डाली चार पंखे, तोड़ डाले, पानी टुल्लू पम्प तोड़ डाला, 6 कुर्सियां तोड़ डाली सोफा सेट तोड़ डाला बर्तन 2 कुकर, 2 लोहे की बाल्टी एक स्टील की बाल्टी एक प्लास्टिक की बाल्टी, 8 थाली, 2 जग 1 दर्जन गिलास, 1 दर्जन कटोरी, 2 जंगाल, व चम्मच पुलिस वालों ने तोड़ डाले। राशन 10 किलो अरहर की दाल, 50 किलो चावल, 50 किलो चने की दाल, 3 किलो उरद की दाल, 5 किलो चीनी में पिपरमिंट का तेल डाल दिया। एक साइकिल एक बच्चे की साइकिल एक बड़ी बैट्री इन्वर्टर तोड़ डाला 6 सेफेल बिजली वाले एवं घर की समस्त तार नोच डाले। मकान के पल्ले व दरवाजे तोड़ डाले। इसी तरह पुलिस की यह टीम जानता के विरूद्ध युद्ध करती हुई सर्वजीत के घर में घुस गयी उसके सुन्दर लाल, घनश्याम नि0 सरसौंदी जिला बाराबंकी में तोड़फोड़ लूटपाट मार पीट की गयी। प्रशासनिक अधिकारी गण प्रेस के सामने माती में इन्टरव्यू देते रहे कि बदला लिया जायेगा और वह बदला लेने का कार्यक्रम 5 जीपों पर सवार पुलिस कर्मी गण क्षेत्र में करते रहे। माती बाजार में जो मिला उसको मारापीटा गया और आज भी यह धमकाया जा रहा है कि मजिस्ट्रीरियल जांच में तुम लोग शामिल होगे तो तुम सबको मुकदमें में फंसा दिया जायेगा। इसकी जनता व पीडि़तों में भय व्याप्त है। अब सवाल यह उठता है कि जरूवा मुरादाबाद सरसौंदी में यह तोड़फोड़ पुलिस बल द्वारा की जा रही थी, मारपीट की जा रही थी। पुलिस व प्रशासन के उच्च अधिकारी भी माती चौकी पर डेरा डाले हुए थे तो वह क्या कर रहे थे। जिन पुलिस अधिकारियों व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों मीडिया प्रिंट मीडिया को जनता से निपट लेने की धमकी दी जा रही थी यह बाते टी0वी0 चैनेल व प्रिंट मीडिया में प्रकाशित हुई है। यह भी जांच का विषय है। जांच का विषय यह भी है कि कौन कौन से प्रशासनिक अधिकारी माती चौकी 31.08.2015 को गये और क्या दिशा निर्देश दिये।
     
सुभाष राजवंशी
   

जिरह -------------उप जिला मजिस्ट्रेट मैं सुभाष राजवंशी को लगभग 2 वर्षों से इसलिए जानता हूं कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व किसान सभा की बैठके में सरसौंदी मुरादाबाद माती में होती रहती थी, तो कभी सरसौंदी में कभी माती बाजार में मुलाकात हो जाती थी। वह प्रापर्टी डीलर का काम करता था। प्रश्न- क्या आपने घटना को स्वयं देखा है। उत्तर- लेकिन आपके दिनांक 31.08.15 को समय लगभग 3 बजे हम सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बृजमोहन वर्मा, हनोमान प्रसाद, पुष्पेन्द्र कुमार गये थे। यह घटना मैंने देखी नही है लोगों ने बताया है। प्रश्न-आपने अपने बयान में कहा है कि पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी फोन से दिशा निर्देश देने लगे। उत्तर-इलेक्ट्रानिक मीडिया व प्रिंट मीडिया द्वारा प्रकाशित सूचनाओं को आधार पर उनका विश्लेषण करने पर यह बात मैं कह रहा हूं। प्रश्न-पोस्टमार्टम् रिपोर्ट क्या आपने देखी है। उत्तर- नहीं देखी है। प्रश्न- पुलिस अधिकारियों द्वारा माती बाजार बन्द कराने की घटना को देखा है? उत्तर- जी हां, साढ़े तीन बजे 31.08.15 को माती बाजार में मैं प्रतिनिधि मण्डल में शामिल था। मैं चाय की दुकान पर रूका था तो 5 गाडि़यां एक साथ आकर रूकी और कहा जाता है आप लोग यहां से चले जाये। -रणधीर सिंह सुमन

सोमवार, 31 अगस्त 2015

थाने में हत्या

बाराबंकी। थाने में सुभाष रावत की हत्या, उसकी लाश को भैसाकुंड पर ले जाकर जला देना, माती बाजार में जनता को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना और बाजार बंद करा देना, फिर अपने बचाव में माती पुलिस चौकी में   आग लगाना यह सभी कृत्य अंग्रेजों की बर्बरता और जुल्म को पुनः ताजा कर देता है।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधि मण्डल सरसौंदी ,माती बाजार, जरवा, मुजफ्फरमऊ जाकर जनता से बात की और पुलिस बर्बरता को देखा। मृतक के परिवारिक सदस्य कुसमा रावत ने प्रतिनिधि मण्डल को बताया कि तीस अगस्त को तीन बजे माती बाजार में सुभाष रावत को पुलिस ने पकड़ा और सरेआम प्रभुनाथ सिपाही, राजेन्द्र व जे पी यादव ने बुरी तरह से पीटा। फिर माती पुलिस चैकी में ले जाकर पीटा गया जहां वह बेहोश हो गया था। बेहोशी की हालत में ही देवां कोतवाली ले जाया गया और होश आने पर पुनः पिटाई की गयी जिससे उसकी मृत्यु हो गयी। रात से ही पुलिस अपने मैनेजमेंट में लग गई और सुबह होते-होते उसका पोस्टमार्टम अपने अनुरूप कराकर आनन-फानन में मृतक के मामा रामसजीवन व रामसुचित का मोबाइल स्वीच आॅफ कराकर भैसाकुंड ले जाकर जलवा दिया। उसके पश्चात पुलिस का अपने बचाव में ड्रामा शुरू होता है भारी संख्या में पुलिस बल माती पहुंचता है और वहां बाजार में लोगों को पीट-पीटकर बाजार बंद करा दी और तभी पुलिस बल के बीच माती चैकी फूंकने की बात प्रारम्भ हो गई। पुलिस ने कानून व्यवस्था के नाम पर गांवों के अंदर घुसकर दलितों, कुर्मियों के घरों में तोड़-फोड़ करनी शुरू कर दी। रामदुलारे वर्मा के घर में घुसकर उनकी मोटरसाइकिल, फ्रिज तोड़ दिया तथा राशन को भी एक में मिला दिया और उनके लड़के को पकड़ ले गये। विभिन्न गांवों में पुलिस द्वारा की जा रही उत्पीड़न और गिरफ्तारियों का दौर जारी है। प्रतिनिधि मण्डल ने देखा कि पुलिस वाले बेतों की बजाय हाथों में बांस लिए हुए थे जिससे वह किसी को मारे तो बेतों के निशान न आवें।
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश सरकार से मांग करती है कि अविलम्ब सम्बन्धित पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों पर 302 आईपीसी का मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाये और बेगुनाह लोगों को जो विभिन्न मुकदमें में फंसाने का कार्य किया जा रहा है उसे अविलम्ब बंद किया जाये। कम्युनिस्ट पार्टी इस सवाल को लेकर आन्दोलन चलायेगी। प्रतिनिधि मण्डल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा, रणधीर सिंह सुमन, हनोमान प्रसाद, किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह तथा सत्येन्द्र कुमार शामिल थे। रिहाई मंच के अध्यक्ष मो0 शुऐब एडवोकेट ने कहा कि पुलिस अल्पसंख्यकों का ही उत्पीड़न नहीं करती है वरन दलितों, पिछड़ों का भी उत्पीड़न करने में आगे है। रिहाई मंच इस हत्या को पूरे देश के अंदर विभिन्न मंचों के ऊपर उठायेगी।
-रणधीर सिंह सुमन


सोमवार, 21 अप्रैल 2014

मुसलमानों के बच्चे दहशतगर्दी के नाम पर जेलों में डाले जा रहे हैं

बाराबंकी। मुल्क में मुसलमानों के बच्चे दहशतगर्दी के नाम पर जेलों में डाले जा रहे हैं। आम आदमी परेशान है, मँहगाई बढ़ती जा रही है और अराजकता का माहौल है। इसकी वजह है कि पूरी दुनिया का सरमायादार एक है और उसी को सत्ता दिलाने के लिए तरह-तरह के प्रचार किये जा रहे हैं।
    यह विचार व्यक्त करते हुए आतंकवाद में फर्जी फंसाए गए मौलाना तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद के अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब एडवोकेट ने लोक संघर्ष पत्रिका द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज मुसलमान बच्चों को आतंकवाद के इल्जाम में जिस तरह से फर्जी तरीके से गिरफ्तार किया जा रहा है उसका मकसद है हिन्दू मुस्लिम में नफरत पैदा करके फूट डालना क्योंकि जब कोई मुसलमान आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार किया जाता है तो कुछ संगठन हिन्दुओं के दिलों में नफरत के बीच बोते हैं, राजनैतिक लाभ उठाते हैं। यह वही संगठन है जो विश्व सरमायेदारों के गुलाम हैं।
    कस्बा फतेहपुर के अंजुमन मार्केट में लोकसंघर्ष पत्रिका के चुनाव विशेषांक को प्रसारित करते हुए मौलाना हबीब कासमी ने कहा कि प्रदेश की हुकूमत की बेईमानी का ही नतीजा है कि आर0डी0 निमेष कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर आतंकवाद के इल्जाम में गिरफ्तार किये गए खालिद मुजाहिद और मौलाना तारिक कासमी का मुकदमा वापस नहीं लिया गया बल्कि अदालत को एक खत लिखकर मुसलमानों को बहलाने की कोशिश की गई। आर0डी0 निमेष कमीशन ने जब दोनों मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी को फर्जी माना है तो भी प्रदेश सरकार उनको कैद से मुक्त नहीं दिला पा रही है।
    कार्यक्रम को जनपद गाजीपुर से आये हुए मौलाना राशिद उमर ने कहा कि मुल्क में जो भी बिगाड़ है उसके जिम्मेदार हम मुसलमान और उलेमा है इसलिए कि हमने जो तालीम हासिल की है उसे हमने दूसरों तक पहुंचाया ही नहीं है। आज हम मुलायम सिंह, लोहिया के ख्वाबों को मायावती, डा. अम्बेडकर के ख्वाबों को लागू करने की बात करते है जबकि हकीकत यह है कि इस तरह के ख्वाबों को ताबीर होने से हम लोगों की मुसीबतों में मजीद इजाफा होगा इसलिए हम लोगों को सकून व चैन उस वक्त नसीब होगा जब हम निजाम-ए-मुस्तफा पर कायम होंगे।
    इस मौके पर लोक संघर्ष पत्रिका के सम्पादक बृजमोहन वर्मा, प्रबंध सम्पादक रणधीर सिंह सुमन नेशनल इण्टर कालेज के प्रबंधक श्याम बिहारी वर्मा व लखनऊ के पत्रकार हरेराम मिश्रा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में डा. उमेश चन्द्र वर्मा, डा. कौशर हुसैन, मुहम्मद असलम एडवोकेट, अब्दुल मन्नान खां, मुहम्मद आरिफ हैदर, मुहम्मद गुफरान खां, मौलाना साबिर कासमी, महमूद हसन, मौलाना फैजी मजाहरी, इकबाल अजीम, मुहम्मद आकिल रजा, हाफिज मुहम्मद उस्मान, मुहम्मद सभी उल्ला, नईम अंसारी, आमिर एडवोकेट, आजम अली, नीरज वर्मा, आनन्द प्रताप सिंह, विनय कुमार सिंह, रामनरेश, दलसिंगार सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।

रविवार, 2 जून 2013

रणधीर सिंह सुमन खालिद मुजाहिद की हत्या के सम्बन्ध में प्रत्यावेदन देते हुए

खालिद मुजाहिद की हत्या पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त टीम को खालिद मुजाहिद के अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, सूफी उदेबुर्र रहमान तथा पीस पार्टी के प्रदेश सचिव एखलाख अहमद, गृह सचिव राकेश मिश्रा व एडीजीपी जावेद अख्तर पॉवर कार्पोरेशन को प्रत्यावेदन देते हुए. जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी एस मिनिस्ती व एडीएम जे पी सिंह भी थे. 


सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

न्याय पालिका की सांप्रदायिकता

अधिवक्ता शाहिद आजमी की की शहादत की तीसरी बरसी पररिहाई मंच द्वारा आयोजित सम्मेलन न्याय पालिका की सांप्रदायिकता और लोकतंत्र में आतंकवाद के मामलों में आरोपित मुस्लिम युवकों के प्रति न्याय पालिका द्वारा सांप्रदायिक आधार पर भेदभाव किए जाने की अलोचना करते वक्ताओं इससे देश के सामने एक न्यायिक फासीवाद का खतरा उत्पन्न हो गया है जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
सम्मेलन की शुरुआत में इस सम्मेलन के प्रमुख वक्ता पत्रकार इफ्तिखार गिलानी जिन्हें आज सुबह सम्मेलन में आते वक्त बीच रास्ते से जबरन दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा रोक दिया गया की निंदा करते हुए इसे कांग्रेस
सरकार की शर्मनाक करतूत बताया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकता हिमांशु कुमार ने कहा कि विधायिका और कार्यपालिका की तरह ही न्यायपालिका भी अब मजबूत तबकों के पक्ष में गरीबों के खिलाफ खुल कर खड़ी हो गई है। इसलिए जरुरी है कि
न्यायपालिका की भूमिका पर समाज मुखर होकर आंदोलित हो।

वरिष्ठ पत्रकार प्रशान्त टंडन ने सांप्रदायिक मीडिया द्वारा मुस्लिम युवकों के खिलाफ किए जा रहे मीडिया ट्रायल का न्याय पालिका पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि न्यायिक फासीवाद के खतरे को राज्य
मीडीया के साथ मिलकर बढ़ा रहा है। इस तरह जनता के एक ऐसे सामूहिक चेतना का विकास हो रहा है जो अपने ही देश के नागरिकों के फर्जी एनकाउंटरों और बिना निष्पक्ष जांच के ही फांसी पर लटका देने से संतुष्ट होने लगा है,
अफजल गुरु की फांसी जिसकी नजीर है। यह भारत के एक फासिस्ट राज्य में तब्दील होने का उदाहरण है।

शाहिद आजमी के भाई खालिद आजमी ने कहा कि उनके भाई की कुर्बानी जाया नहीं जाएगी क्योंकि उनकी लड़ाइ्र न्याय की लड़ाई थी जिसके लिए आज पूरे देश में लड़ने के लिए खड़े हो रहे हैं।

गुलबर्गा कर्नाटक से आए अयाज अल शेख ने कहा कि अगर यह व्यवस्था अपने नागरिकों से जीने का अधिकार छीनती है तो उसे वजूद में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आतंकवाद के आरोप में कैद निर्दोषों की रिहाई के लिए एक मजबूत राजनीतिक आंदोलन के साथ-साथ न्यायपालिका को धर्मनिरपेक्ष बनाने के
लिए आंदोलन की मांग। जिससे सच्चे लोकतंत्र की स्थापना हो सके।

एपीसीआर के नेता अखलाक अहमद ने न्याय पालिका की सांप्रदायिकता के लिए इस समाज मे व्याप्त अल्पसंख्यक विरोधी मानसिकता को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि इसके पीछे संघ परिवार द्वारा फैलाए गई सांप्रदायिक मानसिकता हैं। न्यायपालिका में ऐसे जजों की भरमार काफी है जो अंबेडकर के संविधान के बजाय मनु के मानवता विरोधी संविधान के प्रति जवाबदेह हैं।

सूरत, गुजरात से आए अधिवक्ता और मानवाधिकार नेता बिलाल कागजी जिन्हें आतंकवाद के फर्जी आरोप में महीनों जेल में रखा गया ने कहा कि आतंकवाद के मामलों में अधिकतर देखा जाता है कि अभियोजन पक्ष के बजाय जज ही आरापियों से जिरह करने लगता है, यह अलोतांत्रिक प्रवृत्ति तो है ही न्याय के सिद्धान्तों की भी हत्या है।

सम्मेलन के पहले सत्र की अध्यक्षता इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो0 सुलेमान, दूसरे का पूर्व पुलिस महानिरिक्षक एसआर दारापुरी और तीसरे सत्र की अध्यक्षता रुपरेखा वर्मा और अधिवक्ता मुहम्मद शुएब ने की।

मैग्सेसे पुरस्कार से सम्नानित सामाजिक कार्यकता संदीप पांडे ने आतंकवाद के आरोप में फर्जी तरीके से फंसाए गए शाहबाज की पत्नी सदफ को लखनऊ लोकसभा सीट से प्रत्यासी बनाने का प्रस्ताव रखा।
सम्मेलन को असद हयात, सदफ, रणधीर सिंह सुमन, मसीहुदृदीन संजरी, आफाक, खालिद शाबिर, इलियास आजमी, प्रो अनिल सिंह, जैद फारुकी, केके वत्स ने संबोधित किया।

सम्मेलन में अनिल आजमी, आरिफ, अंकित चैधरी, अभिनव, सुब्रत, मो समी, सि़द्धार्थ कलहंस इत्यिादि उपस्थित थे।
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