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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

देश तरक्की कर रहा है -मोदी

महंगाई दूनी बढ़ गई और समाज में लोगों के बीच वैमनस्यता बढ़ गई। अदानी-अंबानी की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है और गरीब दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। आज यही हैं देश के विकास के मायने। 100 रुपये किलो की दाल 200 रुपये हो गई। गरीबों की थाली से प्याज तक गायब है। लेकिन प्रधानमंत्री कहते हैं कि देश तरक्की कर रहा है। मोदी जी भारत का सबसे बड़ा खतरा हैं। जिस तरह सीमांचल की शोक कोशी को कहा जाता है उसी तरह मोदी जी को भारत का शोक। उन्होंने सभा में मौजूद जनता से पूछा कि क्या आपको बदलता देश दिख रहा है। क्या युवाओं को रोजगार मिल रहा है, क्या 15-15 लाख उनके खाते में आ गए। मोदी जी की नीति से सिर्फ अंबानी और अदानी जैसों को लाभ मिल रहा है न कि गरीबों को। आज ग्रेजुएशन, एमबीए और उच्च शिक्षा ग्रहण कर युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और मोदी जी कहते हैं कि पकौड़े बेचने से रोजगार मिलेगा। हिन्दू-मुस्लिम के बीच द्वेष का बीज बोया जा रहा है। सीमांचल में दोनों समुदायों को जुदा करने का भरपूर प्रयास हो रहा है। भाजपा का विरोध करने पर मुस्लिम भाइयों को पाकिस्तान जाने की नसीहत दी जाती है। मोदी के युग में शिक्षा महँगी हो गई है। ऐसे में गरीब किसान के बच्चे कैसे अच्छी शिक्षा ग्रहण करेंगे यह चिंता आम लोगों को सता रही है। मोदी जी मन की बात करते जरूर हैं लेकिन उस बात को जनता के बीच कब लाएँगे पता नहीं। पंजाब नेशनल बैंक में हुए हजारों करोड़ रुपये से भी ज्यादा के घोटाले के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। अब वे लोग शांत बैठने वाले नहीं हैं अब सरकार को जबाब देना होगा।

-कन्हैया कुमार
लोकसंघर्ष पत्रिका मार्च 2018 में प्रकाशित  

सोमवार, 19 सितंबर 2016

किसान शहीद क्यों नहीं

देश की सीमा पर तैनात आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत को  महिमामंडित  किया जाता है और मैं सवाल करना चाहता हूं  कि आखिर लाशों पर राजनीति कौन कर रहा है । अगर सीमा पर लड़ने वाले सैनिक शहीद कहलाए जाते हैं तो देश का पेट भरने वाले किसान की मौत को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता ।
  यह विचार फैजाबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए  जवाहर  
लाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि देश का दलित साफ करता है जसमाज की गंदगी और स्वच्छ भारत के नाम पर अखबार में छपता है मोदी का थोबड़ा.
जनसभा को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि समाज की गंदगी और शहर की गंदगी को दलित समाज और पिछड़े समाज के लोग साफ कर रहे हैं और देश को स्वच्छ बनाने के नाम पर स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का थोबड़ा अखबार में छपता है इतना बड़ा पक्षपात हम नहीं सहेंगे और अपने हक की लड़ाई के लिए लड़ते रहेंगे चाहे हम पर कितने भी ज़ुल्म हों ।
मुझे देशद्रोही कहने वाले बताएं जेएनयू के अलावा हैदराबाद,इलाहाबाद और बंगाल की यूनिवर्सिटी में आखिर क्यों उठी विरोध की आवाज,साजिश के तहत मुझे फसाया गया
        जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा जेएनयू में जो कुछ हुआ अगर उसे छोड़ दिया जाए तो मैं सवाल करना चाहता हूं कि आखिरकार हैदराबाद में रोहित वेमुला ने फांसी क्यों लगाई, इलाहाबाद में महिला छात्र नेता के साथ भेदभाव क्यों हुआ इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में इस सिस्टम के खिलाफ छात्रों ने आवाज क्यों उठाई अगर अपने हक की लड़ाई लड़ना देशद्रोह है तो हां मैं देशद्रोही हूं ।
हमारी आजादी का मतलब सामंतवाद से,मनुवाद से जातिवाद से धर्मवाद से और गरीबी से आजादी है
कन्हैया कुमार ने कहा कि हम जब आजादी मांगने का नारा लगाते हैं तो हम पर देश विरोधी होने और देश की एकता अखंडता और तोड़ने का आरोप लगता है लेकिन हमारी आजादी का मतलब गरीबी भुखमरी जातिवाद धन और मनुवादी सभ्यता से आजादी है जब तक देश में रहने वाले हर नागरिक को समान अधिकार नहीं मिलेगा तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा भले इसके लिए हमें लाठी और गोली खानी पड़े हम खाएंगे । जनसभा के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता अतुल कुमार सिंह सूर्य कांत पांडे सहित बड़ी संख्या में वामपंथी विचारधारा से लोग जुटे रहे ।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

शैक्षणिक संस्थानों का गला घोंटने का प्रयास

देश अभी हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थी रोहित वेमूला की आत्महत्या के सदमे से उबरा भी नहीं था कि मोदी सरकार ने देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) पर हल्ला बोल दिया। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में जो डरावना घटनाक्रम हुआ वह विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमले की शुरूआत थी। यह हमला प्रजातंत्र और स्वतंत्र चिंतन पर भी था। रोहित को अपनी जान लेने के लिए एबीवीपी ने मजबूर किया। संघ की इस विद्यार्थी शाखा ने भाजपा सांसद के जरिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर दबाव बनाकर, रोहित को होस्टल ने निकलवाया और उसकी छात्र वृत्ति को रोक दिया। जेएनयू के मामले में भी एबीवीपी की स्थानीय इकाई ने दबाव बनाकर प्रजातांत्रिक ढंग से चुने गए छात्रसंघ को आतंकित करने की कोशिश की।
ऐसा आरोप है कि जेएनयू में भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक नारे लगाए गए। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि ये नारे किसने लगाए। जेएनयू और प्रजातांत्रिक स्वतंत्रताओं पर हमला करने का बहाना ढूंढने के लिए छात्रों की संबंधित सभा के वीडियो फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई। इस छेड़छाड़ किए हुए वीडियो के आधार पर जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम कर दिया गया। कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की विद्यार्थी शाखा एआईएसएफ के सदस्य हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, हमेशा से पाकिस्तान द्वारा समर्थित विघटनकारियों का विरोध करती आई है और इस बात की तनिक भी संभावना नहीं है कि कन्हैया कुमार ने उस तरह के नारे लगाए होंगे, जैसा कि आरोपित है। मूल वीडियो सब चीजों को साफ कर देता है। न केवल कुमार ने कोई नारा नहीं लगाया वरन किसी को भी केवल नारे लगाने के आधार पर राष्ट्रद्रोह का आरोपी नहीं बनाया जा सकता। जानेमाने विधिवेत्ता सोली सोराबजी ने यह स्पष्ट किया है कि केवल जनता को राज्य के विरूद्ध हिंसा करने के लिए उकसाना या चुनी हुई सरकार को पलटने के लिए भड़काना राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है।
दिल्ली पुलिस क्यों और कैसे विश्वविद्यालय कैंपस में घुसी? विश्वविद्यालय के कुलपति, जिन्हें भाजपा सरकार ने नियुक्त किया है, इस मामले में दो तरह की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कई टीवी चैनलों पर कहा कि वे कैंपस में पुलिस बुलाने वाले आखिरी व्यक्ति होंगे परंतु जांच से यह जाहिर हुआ है कि उन्होंने पुलिस को पत्र लिखकर उचित कार्यवाही करने की मांग की थी। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस ने बिना किसी आधार के कुमार पर देश द्रोह का प्रकरण कायम कर दिया। अदालत में वकीलों ने जेएनयू के विद्यार्थियों और उन सब को जो ‘‘जेएनयू के विद्यार्थियों जैसे दिख रहे थे’’ के साथ मारपीट की। एक भाजपा विधायक ने सीपीआई के एक कार्यकर्ता को बुरी तरह मारा। इस विधायक ने यह भी कहा कि अगर उसके पास बंदूक होती तो वह भारत-विरोधी नारे लगाने वालों को गोली मार देता। भाजपा समर्थकों द्वारा एक पत्रकार पर भी हमला किया गया। वकीलों ने अगले दिन भी उसी तरह की हिंसा की और जब कन्हैया को अदालत लाया जा रहा था, तब उस पर भी हमला किया गया।
दरअसल, यह घटनाक्रम, आरएसएस द्वारा नियंत्रित  एबीवीपी-भाजपा द्वारा देश  के प्रजातांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष तबके को कुचलने का प्रयास है। रोहित वेमूला के मामले की तरह, एबीवीपी  की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वह अपने सभी विरोधियों को राष्ट्रद्रोही बताने लगी है और राज्य की सहायता व समर्थन से प्रगतिशील और सामाजिक न्याय के स्वरों को दबाना चाहती है। भाजपा से जुड़े संगठन, ‘‘राष्ट्रद्रोह’’ के नाम पर देश  में उन्माद पैदा करने की कोशिश  कर रहे हैं। जो लोग आरएसएस के हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद का समर्थन नहीं करते, उन सभी को राष्ट्रद्रोही बताया जा रहा है। प्रषांत भूषण ने इसे फासिस्ट हमला बताया है।
जेएनयू में और उसके बाद जो कुछ हुआ, वह उन सभी मूल्यों और परंपराओं के विरूद्ध है जो भारत के लिए महत्वपूर्ण और मूल्यवान हैं। संघ परिवार इस घटना को एक ऐसे मौके के रूप में देख रहा है जिसका इस्तेमाल वह प्रजातांत्रिक संस्कृति को समाप्त करने और असहमति के स्वरों का गला घोंटने के लिए कर सकता है। यह शर्मनाक है कि पुलिस अधिकारी अपने राजनैतिक आकाओं के इस हद तक गुलाम हैं कि वे उनके इशारे पर कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं।
राहुल गांधी जेएनयू पहुंचे और उन्होंने विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ हैं। इसके बाद लखनऊ में उन्हें काले झंडे दिखाए गए और उन पर पत्थर फेंके गए। जिन लोगों ने ऐसा किया, उनका कहना था कि राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रद्रोहियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने के कारण वे उनका विरोध कर रहे हैं। जिस विधायक ने सीपीआई कार्यकर्ता की पिटाई की, उसने भी यह कहा कि जेएनयू मंे राष्ट्रविरोधी गतिविधियां हो रही हैं और वह उन लोगों के प्रति अपने रोष को अभिव्यक्त कर रहा है, जिन्होंने पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए। टीवी चैनलों पर भाजपा प्रवक्ता बार-बार वही नारे दोहरा रहे हैं और वही बातें कर रहे हैं। सोषल मीडिया पर भी इसी तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल हो रहा है।
मंत्रियों से लेकर शीर्ष  भाजपा नेताओं और वकीलों से लेकर सड़कों पर पत्थरबाजी करने वालों तक-सभी का एक ही तर्क है कि वे राष्ट्रद्रोहियों को बर्दाष्त नहीं करेंगे। निरंतर दुष्प्रचार के ज़रिए, जेएनयू के विद्यार्थियों का दानवीकरण किया जा रहा है, उन्हें राष्ट्रद्रोही बताया जा रहा है और विश्वविद्यालय को भारत-विरोधी गतिविधियों का अड्डा कहा जा रहा है। जेएनयू के दानवीकरण की प्रक्रिया, इस सरकार के सत्ता में आने के साथ ही शुरू हो गई थी। आरएसएस से जुड़े विहिप आदि संगठनों ने जेएनयू के मुख्यद्वार पर ‘‘राष्ट्रविरोधी जेएनयू विद्यार्थियों और अध्यापकों’’ के खिलाफ प्रदर्षन किए थे।
ये सारी बातें, दरअसल, बहुत गहरे और छुपे हुए एजेंडे का भाग हैं। राष्ट्रद्रोह की माला इसलिए जपी जा रही है ताकि भाजपा की राजनीति से असहमत सभी लोगों के खिलाफ जनोन्माद भड़काया जा सके। इस बहाने से हिंसा इसलिए की जा रही है ताकि जो लोग संघ-भाजपा से सहमत नहीं हैं उन्हें आतंकित किया जा सके। इस उन्माद को इसलिए भड़काया जा रहा है ताकि रोहित वेमूला के मुद्दे पर जो सामाजिक आंदोलन खड़ा हो रहा था, उससे देष का ध्यान हटाया जा सके। रोहित के मुद्दे पर देषभर में हुई तीखी प्रतिक्रिया से भाजपा सकते में आ गई थी। भारत-विरोधी नारों के मुद्दे पर जनोन्माद भड़का कर और अपने विरोधियों के विरूद्ध हिंसा कर, भाजपा और उसके सहयोगी, रोहित वेमूला की मृत्यु से उपजे सवालों पर पर्दा डालना चाहते हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त करने का प्रयास भी, दलितों के मुद्दे को हाशिए पर डालने के षड़यंत्र का हिस्सा है। जेएनयू छात्रसंघ के एबीव्हीपी से जुड़े तीन पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने एक पत्र में सरकार-भाजपा-एबीवीपी  द्वारा जेएनयू में बेजा हस्तक्षेप पर असंतोष व्यक्त किया है और रोहित की मृत्यु और दलितों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा के रूख पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए हैं।
जेएनयू के दानवीकरण का उद्देश्य स्पष्ट है। यह विश्वविद्यालय प्रजातांत्रिक मूल्यों, वैचारिक स्वतंत्रता और प्रगतिशील विचारों का केंद्र है। ये सब एबीवीपी-भाजपा के एजेंडे के अनुरूप नहीं हैं। भारतीय फिल्म व टेलीविजन संस्थान, आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली और हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में जो कुछ हुआ, वह उच्च शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त करने के अभियान का हिस्सा है। जेएनयू को विशेष  तौर पर निशाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि वह प्रगतिशील-धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और उच्चतम स्तर की अकादमिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। सरकार और उसके पिछलग्गुओं द्वारा राष्ट्रद्रोह के नाम पर उन्माद खड़ा करना, जेएनयू जैसे प्रगतिशील संस्थान की छवि धूमिल करने के उददेश्य से तो प्रेरित है ही, यह प्रजातांत्रिक सिद्धांतों पर भी हमला है।
हमें उम्मीद है कि अदालतें कन्हैया कुमार को राहत देंगी। परंतु प्रश्न  केवल कन्हैया कुमार का नहीं है। प्रश्न यह है कि भारत-विरोधी नारों के बहाने देश में उन्माद और हिंसा का जो ज्वार पैदा कर दिया गया है उसे कैसे नियंत्रित किया जाए। कुमार की गिरफ्तारी, जेएनयू के दानवीकरण व सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का हनन करने के विरोध में विद्यार्थियों द्वारा देश भर में विशाल रैलियां निकाली गईं। दूसरी ओर, एबीव्हीपी और उससे जुड़े संगठन, ‘‘राष्ट्रद्रोहियों’’ के विरूद्ध देश भर में लोगों को लामबंद करने का प्रयास कर रहे हैं। जेएनयू की विवादित सभा में शामिल विद्यार्थियों और जेएनयू के अन्य विद्यार्थियों ने भारत-विरोधी व पाकिस्तान-समर्थक नारे लगाए जाने की कड़ी निंदा की है। आवष्यकता इस बात की है कि प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संघर्ष को आगे ले जाया जाए। आमजनों को यह समझाने की ज़रूरत है कि राष्ट्रद्रोह के नाम पर जो बवाल खड़ा किया जा रहा है, उसका असली उद्देश्य देश  में अभिव्यक्ति की आज़ादी को समाप्त करना है।
         
-राम पुनियानी

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

मोदी का मुखौटा उखड रहा है

यः स्वभावो हि यस्यास्ति स नित्यं दुरतिक्रमः।
श्वा यदि क्रियते राजा स किं नाश्रातयुपानहम् ?

बनारस व लखनऊ में नरेन्द्र मोदी का जनता के विभिन्न तबकों में काले झंडों व मोदी गो बेक के नारों से स्वागत किया. बनारस में कई बार लाठी चार्ज भी करना पड़ा. वाराणसी में एक ओर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के 100वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत कर रहे थें तो वहीं दुसरी ओर बीएचयू गेट के बाहर पुलिस ने बल प्रयोगकर और लाठीचार्ज कर विरोध कर रहे दलित संगठनों और छात्रों पर काबू पाने की कोशिश में जुटी थी. हजरतगंज लखनऊ में छात्रों ने काले झंडे दिखाए. नरेन्द्र मोदी की सरकार बने हुए अभी दो वर्ष भी नहीं पूरे हुए हैं कि जनता के विभिन्न तबकों द्वारा जगह-जगह पर उनके खिलाफ आक्रोश प्रदर्शन तेजी से हो रहा है. अच्छे दिन लाने का वादा करने वाले मोदी की एक मात्र उपलब्धि यह है कि सब्सिडी कटौती और कॉर्पोरेट  सेक्टर को लाखों-लाख करोड़ रुपये का फायदा पहुँचाना. ऊपर लिखा गया श्लोक अब उनके ऊपर ठीक तरह से लागू हो रहा है. हैदराबाद विश्वविद्यालय से लेकर जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय तक छात्रों का आन्दोलन चल रहा है. इन आन्दोलनों को पैदा करने का काम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का है. शासन में आने के बाद विभिन्न विचारों के मानने वाले लोगों को देशद्रोही साबित करके अपमानित करने का जो तरीका इस सरकार ने अपनाया है वही उसके संकट का कारण है. 
जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में उद्गम संकट को पैदा करने में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी तथा अखिल विद्यार्थी परिषद् का मुख्य हाथ है. इतनी दुर्दशा होने के बाद भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी कहते हैं कि देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू छात्रों को अगर लगता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया तो उन्हें सबूत देने होंगे। जबकि अगर उन्होंने देशद्रोह किया है तो उसको साबित करने का काम पुलिस को करना है. पुलिस के पास सबूत न होने के बावजूद कन्हैया कुमार को कारागार में निरुद्ध कराये हुए हैं.
इसी सन्दर्भ में हितोपदेश के ऊपर लिखे श्लोक का अर्थ यह है कि जिसका जैसा स्वभाव है, वह सर्वदा छूटना कठिन है, जैसे यदि कुत्ते को राजा कर दिया जाए, तो क्या वह जूते को नहीं चबाएगा ?
शासक दल एक गणवेश, एक विचार को लाठी से डरा धमका कर मनवाने के लिए प्रयत्नशील है जिसके विरोध में समाज के विभिन्न तबके विरोध कर रहे हैं.  

सुमन 
लो क सं घ र्ष !  

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माहौल बहाल करें

जिला अधिकारी बाराबंकी को ज्ञापन देते हुए
बाराबंकी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली छात्र संघ के अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी घोर निन्दनीय है क्योंकि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार ने कोई अपराध ही नहीं किया था अपितु नागपुरी मुख्यालय की विषाक्त विचारधारा से ग्रसित गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने षड्यंत्र कर दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी की मदद से फर्जी देश द्रोह का मुकदमा कायम कर गिरफ्तार कराया है जैसा कि आपको ज्ञात है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अद्भुत व महान नेता मोहनदास करमचन्द गांधी की हत्या नागपुरी विचारधारा से पोषित नाथुराम गोडसे ने कर दी थी यह वही लोग है कि गांधी की हत्या को सही साबित करते हुए गोडसे को महिमामंडित करते है इस देश के महान स्वतंत्रता संग्राम में नागपुरी मुख्यालय का कोई योगदान नहीं था अपितु अंग्रेजों की मुखबिरी का कार्य करने वाले यह लोग देश भक्ति-राष्ट्र भक्ति की नकली नकाब लगाकर अब देश भक्ति का प्रमाण पत्र जारी करने की कोशिश कर रहे हैं।
                                                  यह बाते भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व अखिल भारतीय किसान सभा ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन लिखते हुए आगे लिखा कि दिल्ली के अन्दर पटियाला कोर्ट के अन्दर व बाहर कन्हैया कुमार के समर्थकों की पिटाई इसी विषाक्त विचारधारा के लोगों ने की जिसका भी कोई संज्ञान गृहमंत्री ने नहीं लिया और न ही दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की गृहमंत्री कहता है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाफिज सईद प्रदर्शन करवा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि वेद प्रकाश वैदिक के माध्यम से गृहमंत्री हाफिज सईद से रिश्तेदारी जोड़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि हाफिज सईद की बात खूफिया एजेन्सी ने मनगढ़ंत पायी है।
                                        ज्ञापन में यह मांग की गई कि गृहमंत्री व दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी ने जो षड्यंत्र पूर्ण तरीके से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष श्री कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कराया है उन्हें अविलम्ब बर्खास्त करें तथा विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का माहौल बहाल करें।
                                  ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में बृजमोहन वर्मा सचिव, कम्युनिस्ट पार्टी,  सह सचिव-रणधीर सिंह सुमन,  डा0 कौसर, डा0 उमेश चन्द्र वर्मा    अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह तथा महामंत्री सत्येन्द्र कुमार, अधिवक्ता निर्मल वर्मा, विजय प्रताप सिंह, आनन्द सिंह, नीरज वर्मा, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, कर्मवीर सिंह चैहान, प्रदीप सिंह, मु0 रईस कादरी, गनेश सिंह अनूप व संदीप वर्मा आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे। ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है।
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