गुरुवार, 14 जुलाई 2016

कैराना पलायन



उत्तरप्रदेष, जहां अगले वर्ष चुनाव होने वाले हैं, में भाजपा ने हाल में राज्य के षामली जिले के कैराना नामक कस्बे से बड़े पैमाने पर पलायन का मुद्दा उठाया। पार्टी के सांसद हुकुम सिंह के अनुसार, ‘‘कई हिंदू परिवारों को एक विषेष समुदाय की ‘धमकियों’ के चलते कैराना छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है’’। उन्होंने 346 ऐसे परिवारों की सूची भी जारी की जिन्हें मजबूर होकर कैराना से पलायन करना पड़ा। एक दिन बाद ही उन्होंने अपने वक्तव्य में आंषिक संषोधन करते हुए कहा कि जो 346 हिंदू परिवार कैराना से अपने घरों को छोड़कर पलायन कर गए हैं ‘‘वे एक विषेष समुदाय के आपराधिक तत्वों द्वारा दी जा रही धमकियों और जबरिया वसूली से परेषान थे’’। उन्होंने कहा, ‘‘मुद्दा सांप्रदायिक नहीं है...यह हिंदू और मुस्लिम की बात नहीं है। सूची पूरी तरह ठीक नहीं भी हो सकती है। यह कानून व्यवस्था का मुद्दा है।’’ सांसद ने कहा कि मुकीम काला और फुरहान जैसे ‘मुस्लिम आपराधिक गिरोह’ पष्चिमी उत्तरप्रदेष में एक बड़ी मुसीबत बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, ‘‘स्थानीय आपराधिक तत्वों ने एक पार्टी विषेष के संरक्षण में कैराना में अपनी जड़ें जमा ली हैं।’’ अपनी बात को बार-बार बदलते हुए अंत में सांसद ने कहा कि एक स्थानीय मुस्लिम गैंगस्टर, जिसे समाजवादी पार्टी सरकार का संरक्षण प्राप्त था, द्वारा दी जा रही धमकियों और ज़बरिया वसूली के कारण पलायन हुआ था।
इस सूची के जारी होने के बाद इलाहाबाद में एक विषाल आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित षाह ने कहा कि केवल उनकी पार्टी ही उत्तरप्रदेष में समाजवादी पार्टी को पराजित कर सकती है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे कैराना को ‘हल्के’ में न लें। भाजपा के कई राष्ट्रीय पदाधिकारियों और कंेद्रीय मंत्रियों ने मीडिया को वक्तव्य जारी कर यह कहा कि कानून और व्यवस्था के इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर पलायन की बात सही है तो राज्य सरकार को उपयुक्त कार्यवाही करनी चाहिए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उत्तरप्रदेष में कानून और व्यवस्था के बिगड़ते हालात की बात कही। मेनका गांधी ने कहा कि उत्तरप्रदेष में न तो विकास हो रहा है और ना ही लोग सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार को नित बढ़ते अपराधों के ग्राफ के बावजूद षर्म नहीं आ रही है।
इसके पहले, समाजवादी पार्टी सरकार की राज्य में बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि के लिए कटु आलोचना की गई थी। यहां यह महत्वपूर्ण है कि भाजपा उत्तरप्रदेष में लवजिहाद की बात करती रही है। पार्टी के अनुसार लवजिहाद का अर्थ है मुस्लिम पुरूषों द्वारा मासूम हिंदू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसा कर उनसे विवाह कर लेना। इन युवतियों को मुसलमान बना लिया जाता है व इस तरह देष में मुसलमानों की आबादी को बढ़ाने और हिंदुओं की आबादी को घटाने का षड़यंत्र चल रहा है। ‘हिंदुओं के पलायन’ और लवजिहाद, दोनों अभियानों का उद्देष्य मुसलमानों का दानवीकरण करना है। भाजपा समाज को यह संदेष देना चाहती है कि मुसलमान, आतंकवादी और असामाजिक तत्व हैं जिनसे हिंदुओं की रक्षा की जानी आवष्यक है और केवल भाजपा ही हिंदुओं की रक्षा करने में सक्षम है।
उदाहरण के लिए, 23 अगस्त, 2014 को आयोजित पार्टी की एक बैठक को संबोधित करते हुए उत्तरप्रदेष भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि यह आष्चर्यजनक परंतु सत्य है कि उत्तरप्रदेष में होने वाले हर 100
अपराधों मंे से 71 महिलाओं के विरूद्ध होते हैं और इस तरह के अपराधों में 99.99 प्रतिषत आरोपी मुसलमान होते हैं। उत्तरप्रदेष सरकार पर मुस्लिम अपराधियों और असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए वाजपेयी ने कहा कि जहां उत्तरप्रदेष सरकार लवजिहादियों का बचाव कर रही है वहीं लवजिहाद के पीड़ितों को पुलिस द्वारा परेषान किया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं।
अपने चुनाव अभियानों के दौरान भाजपा नेता बार-बार ‘एक विषेष समुदाय’ (मुसलमान) को सांप्रदायिक दंगों, आतंकवाद और गुंडागर्दी के लिए ज़िम्मेदार बताती आई है। उत्तरप्रदेष में एक उपचुनाव के ठीक पहले, अगस्त 2014 में भाजपा विधायक संगीत सोम ने कहा, ‘‘एक विषेष समुदाय के युवक हिंदू लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हिंदू लड़कियां स्वतंत्रतापूर्वक कहीं आ जा भी नहीं सकतीं।’’ योगी आदित्यनाथ ने भी इसी तरह के वक्तव्य जारी कर मुसलमानों का दानवीकरण किया और उन्हें सांप्रदायिक दंगों के लिए दोषी ठहराया। सन 2016 में उपचुनावों के प्रचार के दौरान मुसलमानों को गुंडा और आतंकवादी बताया गया और ज़ोर देकर यह कहा गया कि हिंदुओं का पलायन रोका जाना आवष्यक है और उन्हें सम्मान से जीने का अवसर मिलना चाहिए। कैराना के भाजपा सांसद ने इसी क्रम में कहा कि मुस्लिम अपराधी, षांतिप्रिय हिंदू नागरिकों को चैन से नहीं रहने देंगे। ऊपरलिखित वक्तव्यों में से प्रत्येक भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत अपराध है। यह धारा विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच षत्रुता या नफरत फैलाने को अपराध घोषित करती है। परंतु इनमें से अधिकांष मामलों में न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और ना ही संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई। ज़ाहिर है कि इससे भाजपा नेताओं का मनोबल बढ़ता है और वे और ज़ोरषोर से अपने राजनैतिक लाभ के लिए मुसलमानों का दानवीकरण करने और उन्हें हिंदुओं की घृणा का पात्र बनाने के अभियान में जुट जाते हैं।
अपराध और उसके संरक्षक
भाजपा और उसका नेतृत्व, असत्यों, अर्धसत्यों और तोड़े-मरोड़े गए तथ्यों के आधार पर मुस्लिम समुदाय का प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से दानवीकरण करता आ रहा है।
कुछ पत्रकारों ने उन 346 हिंदू परिवारों की सूची की पड़ताल की जो सांसद हुकुम सिंह के अनुसार कैराना छोड़कर चले गए थे। ‘मिली गजेट’ द्वारा भेजे गए पत्रकारों के एक दल ने पाया कि सूची में चार मृत व्यक्तियों के नाम षामिल हैं और 68 ऐसे व्यक्तियों के भी, जो बहुत पहले कैराना छोड़कर चले गए थे। इसमें 20 ऐसे परिवारों के नाम षामिल थे जो अब भी कैराना में रह रहे थे। इससे स्पष्ट है कि ये आरोप एक योजनाबद्ध तरीके से लगाए गए थे ताकि अगले साल उत्तरप्रदेष में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के पहले समाज को धार्मिक आधार पर धु्रवीकृत किया जा सके। इंडियन एक्सप्रेस और टाईम्स आॅफ इंडिया ने भी इस सूची की जांच की और पाया कि सूची में षामिल कुछ लोग मर चुके हैं और कुछ बेहतर अवसरों की तलाष में कैराना छोड़कर चले गए हैं। जो लोग षहर छोड़कर चले गए थे उनमंे से कुछ ने कहा कि उन्होंने मुज़फ्फरनगर दंगों के दौरान इलाके मंे फैले तनाव के कारण कैराना छोड़ा। उन्हें डर था कि इस तरह के वातावरण में वे अपनी रोज़ी-रोटी नहीं कमा पायेंगे। षामली के जिला प्रषासन ने भाजपा सांसद द्वारा जारी सूची में षामिल 346 परिवारों में से 119 के बारे में पता लगाया। इस जांच से पता चला कि 68 परिवार, 10 से 15 वर्ष पहले रोजगार, व्यवसाय या बच्चों की षिक्षा की खातिर कैराना छोड़कर चले गए थे। प्रषासन की जांच में यह भी सामने आया कि उनमें से कई लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं और कुछ अब भी कैराना में ही रह रहे हैं। यह भी बताया गया कि भाजपा के कार्यकर्ता भी सूची में षामिल नामों के बारे में भ्रम की स्थिति में हैं। हिंदू संतों के एक समूह ने मुख्यमंत्री को उनके द्वारा की गई जांच की रपट सौंपी, जिसमें यह कहा गया था कि कैराना से बड़े पैमाने पर पलायन होने के कोई सबूत नहीं हैं।
भाजपा का यह दावा आधारहीन है कि सत्ताधारी समाजवादी पार्टी, मुकीम काला गैंग को संरक्षण दे रही है।  काला को अक्टूबर 2015 में एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। अपराधियों का कोई धर्म नहीं होता और ना ही वे किसी धर्म व धार्मिक समुदाय से प्रेरित होते हैं। सच यह है कि मुकीम काला के षिकार व्यक्तियों में मुसलमान भी बड़ी संख्या में हैं। अपराधी केवल धन की तलाष में रहते हैं, उन्हें इस बात से कोई लेनादेना नहीं होता कि उनका षिकार किस धर्म का है।
यह दिलचस्प है कि लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान, भाजपा का नारा था ‘सब का साथ, सब का विकास’। परंतु भाजपा ने कभी अल्पसंख्यक समुदाय के उन लोगों की चर्चा नहीं की जिन्हें विभिन्न कारणों से अपने रहवास का स्थान छोड़कर अन्य स्थानों में बसना पड़ा। पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व और केंद्रीय कैबीनेट मंत्री, 346 हिंदू परिवारों के कथित पलायन से इतने उद्वेलित हो गए कि अपनी जुबान पर नियंत्रण ही खो बैठे। परंतु षायद उन्हें यह ध्यान नहीं था कि ओडिसा के कंधमाल में 2007 व 2008 में हुए दंगों के बाद 50,000 ईसाईयों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा था। सन 2013 में उत्तरप्रदेष में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद, 50,000 मुसलमानों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा था और वे मुज़फ्फरनगर और षामली जिलों में जानवरों जैसा जीवन बिताने पर मजबूर हैं। आज भी षामली और मुज़फ्फरनगर में 63 राहत षिविरों में 5,200 मुसलमान परिवार रह रहे हैं। इनमें से कई कैराना में स्थापित षिविरों में भी हैं। ये परिवार अपने घर-गांव वापस जाना इसलिए नहीं चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि वहां उनके जानोमाल को खतरा होगा। सन 2002 में गुजरात मंे हुए दंगों के बाद, उनके घरों से खदेड़े गए या भागे मुसलमानों में से डेढ़ लाख आज भी अपने घर नहीं लौट सके हैं। असम में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाओं के बाद सैंकड़ों मुसलमान कठिन परिस्थितियों में जी रहे हैं।
विभिन्न राज्यों में अपराधियों के गिरोह और धर्म के स्वनियुक्त रक्षकांे के समूह खुलेआम कानून का उल्लंघन करते रहते हैं परंतु अगर वे हिंदू समुदाय के हैं तो भाजपा या तो चुप रहती है या  हिंदू राष्ट्रवादी उनकी हरकतों को औचित्यपूर्ण ठहराने का कोई न कोई बहाना ढूंढकर उन्हें राजनैतिक संरक्षण प्रदान करते हैं। उदाहरणार्थ, दादरी में मोहम्मद अखलाक को घर में गौमांस रखने के बेजा आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया। भीड़ को स्थानीय गौसंरक्षकों ने हिंसा के लिए उकसाया था। इस तरह के समूह पूरे देष में हैं और गौरक्षा के नाम पर वे खुलेआम कानून का मखौल उड़ाते हुए ज़बरिया वसूली, हिंसा और हत्याएं कर रहे हैं। भाजपा षासित हरियाणा में अवैध वसूली करने वालों ने पांच लोगों की जान ले ली। इसी तरह की घटना 19 मार्च, 2016 को झारखंड के लातेहार जिले में हुई, जहां दो मुस्लिम पषुपालकों को, जो आठ भैंसो को बाज़ार में बेचने ले जा रहे थे, एक पेड़ पर फांसी दे दी गई। मध्यप्रदेष में 15 जनवरी, 2016 को हरदा जिले के खिड़किया रेलवे स्टेषन पर कुषीनगर एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे में सवार एक मुस्लिम दंपत्ति पर गौरक्षा समिति के सदस्यों  ने तब हमला कर दिया जब उन्होंने उनके सामान की तलाषी पर आपत्ति उठाई। गौरक्षा समिति के सदस्यों का कहना था कि वे गौमांस ले जा रहे थे। इस तरह के अपराधों से देष के विभिन्न हिस्सों में भय का वातावरण पैदा हो रहा है और इससे जनित असुरक्षा के चलते अल्पसंख्यक वर्ग के सदस्य सुरक्षित स्थानों में पलायन कर रहे हैं।
एक अन्य भाजपा षासित राज्य छत्तीसगढ़ मंे असामाजिक तत्व, आदिवासियों के बीच काम कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं। ऐसी ही एक कार्यकर्ता सोनी सोरी पर एसिड फेंका गया था। हरियाणा के एक गांव में देर रात एक दलित परिवार के घर में आग लगा दी गई जिसमंे दो छोटे बच्चे जलकर मर गए और उनके माता-पिता को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भाजपा षासित राज्यों में हो रही इस तरह की घटनाओं का केंद्र सरकार की छवि पर असर न पड़े, इस प्रयास में विदेष राज्यमंत्री जनरल व्ही.के. सिंह ने कहा कि ‘‘अगर कोई एक कुत्ते को पत्थर मार दे तो उसके लिए सरकार ज़िम्मेदार नहीं है’’। हिंसक भीड़ द्वारा की गई हत्याओं के लिए संबंधित राज्य सरकार को नहीं तो और किसे दोषी ठहराया जाएगा? विषेषकर तब, जब ऐसे तत्वों को सरकार का संरक्षण प्राप्त हो।
जहां सांसद हुकुम सिंह कथित पलायन के लिए सांप्रदायिक घृणा को ज़िम्मेदार बताने के अपने आरोप से पीछे हट गए, वहीं उनकी पार्टी के सदस्य समाजवादी पार्टी सरकार पर हमले करने के दौरान ‘‘एक विषेष प्रकार के अपराधियों’’ का हवाला देने से नहीं चूकते। भाजपा विधायक संगीत सोम ने हिंदुओं के पलायन के विरोध में कैराना से कंधला तक पदयात्रा निकालने की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम को उन्होंने सांसद हुकुम सिंह के हस्तक्षेप के बाद रद्द कर दिया। पार्टी के एक नेता ने दावा किया कि भाजपा, प्रदेष में और ‘कैरानाओं’ की तलाष कर रही है। पार्टी के एक नेता ने 14 जून को 63 परिवारों की सूची जारी की, जो, उनके अनुसार कंधला छोड़ कर चले गए थे।
कुल मिलाकर पार्टी किसी भी तरह षामली में सांप्रदायिक धु्रवीकरण करना चाहती है। पार्टी के नेता मुज़फ्फरनगर जिले के विभिन्न गांवों में नफरत फैलाने वाले भाषण देते रहे हैं। लोकसभा के 2013 के चुनाव के दौरान, षामली जिले के राजहर गांव में भाषण देते हुए भाजपा के प्रदेषाध्यक्ष ने मुज़फ्फरनगर हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि ‘‘हमें अपने अपमान का बदला लेना ही होगा’’।
निष्कर्ष
अगर भाजपा चुनाव में लाभ पाने के लिए समाज का धार्मिक आधार पर धु्रवीकरण करना जारी रखेगी तो भारत उस ओर ही बढे़गा, जिसकी कामना जेएनयू में कथित रूप से लगाए गए नारे में की गई थीः ‘‘भारत के टुकड़े-टुकड़े होंगे इंशाल्लाह’’। जो लोग प्रजातंत्र से प्रेम करते हैं उन्हें दृढ़ता से इन तत्वों से मुकाबला करना चाहिए।

  -रेशल डिसिल्वा       

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-07-2016) को "धरती पर हरियाली छाई" (चर्चा अंक-2405) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'