मंगलवार, 19 जुलाई 2016

देश की जनता को मत मारो

जम्मू एंड कश्मीर में चार पांच दिन से अखबार, इन्टरनेट व अन्य सूचना माध्यमो पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है. सरकार कश्मीरी अवाम के साथ कैसा सुलूख कर रही है. वह अघोषित आपातकाल के पहले जो सूचनाएं आयीं थी उसके हिसाब से लगभग 40 लोग मारे जा चुके हैं, सौ से ज्यादा लोगों की आखें फूट चुकी हैं. संसद में चर्चा भी हो चुकी है. समाधान नदारद है. मोदी सरकार के पास समस्या के समाधान का कोई रास्ता नहीं है. असमंजस की स्तिथि है, भारतीय जनता मर रही है अलगवावादी ताकतों से भारतीय जनता पार्टी चुनाव में गठजोड़ कर चुकी है लेकिन समस्या का समाधान करने के लिए कोई भी पक्ष आगे नहीं आ रहा है. एक दुसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाये जा रहे हैं. नकली देशभक्त पाकिस्तान को गालियाँ बकना प्रारंभ कर दिए हैं. स्तिथि यह है कि पकिस्तान जब अपने वहां  कुछ कर नहीं पाता है तो वह कहता है की भारत की वजह से ऐसा हुआ है और यह नकली राष्ट्रवादी जब कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो शक की सुई पकिस्तान की तरफ कर देते हैं और पैर छूने भी पकिस्तान जाते हैं. 
अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जिन क्षेत्रों में अफस्पा लागू है वहां भी सेना या पुलिस द्वारा  ज्यादा हिंसक ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में अब तक के 1528 फर्जी मुठभेड़ों की जांच करने को भी कहा है. 
 आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स ऐक्ट देश के अशांत क्षेत्रों में सेना को विशेष अधिकार देता है. इसके तहत सेना लोगों को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है. किसी भी जगह छापे मार सकती है. और इस दौरान जवाबी कार्रवाई में हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकती है.
  वहीँ, महबूबा मुफ्ती की सरकार बनाते समय प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जम्मू कश्मीर से AFSPA नहीं हटाया जायेगा लेकिन वहीँ त्रिपुरा में  मई 2015 में  AFSPA  कानून हटाने  के बाद उग्रवादी घटनाएं , हत्या, घायल, सुरक्षाकर्मियों की हत्या, अपहरण, मुठभेड जीरो रहा है.  जून 2015 तक का ये आंकड़ा त्रिपुरा का है. इसे मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्रियों के एक सम्मेलन के दौरान पेश किया है. उनका कहना था कि राज्य से अफसपा वापस लेने के बाद आतंकवाद संबंधित घटनाओं में अप्रत्याशित कमी आई है. 
    इसलिए आवश्यक यह है कि भारतीय जनता के ऊपर, दुश्मन की सेनाओ के ऊपर बलप्रयोग करने वाली भारतीय सेना को अविलम्ब हटाकर सीमा पर पहुँचाया जाए और जनता से चुनी हुई सरकार संवाद कायम करे और त्रिपुरा की भांति अफस्पा कानून हटा कर जम्मू एंड कश्मीर की सिविल पुलिस को कानून व्यवस्था का कार्य सम्पादित करने दिया जाए. आपातकाल लगा कर अनावश्यक बल प्रयोग कर भारत की किसी भी क्षेत्र की जनता को दबाया नहीं जा सकता है. जनता लोकतान्त्रिक है, शांतिप्रिय है उसका नाजायज फायदा इन फ़ासिस्ट शक्तियों को नहीं उठाना चाहिए. 

सुमन 

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