शनिवार, 27 अगस्त 2016

मोदी ने भी की ---नर्क यात्रा

हमारे रक्षा मंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान जाना नर्क के समान है। पहली बात तो यह कि क्या जनाब रक्षा मंत्री को नर्क की हकीकत मालूम है? क्या वे किसी नर्क की यात्रा पर गए हैं? क्योंकि स्वर्ग.नर्क की हकीकत तो कल्पनीय है। प्रसिद्ध शायर गालिब के अनुसार 'हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, दिल को बहलाने को 'गालिब' ये ख्याल अच्छा है।'
सच पूछा जाए तो कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिनके चलते हम महसूस करते हैं कि हम स्वर्ग में हैं या नर्क में। इस तरह की परिस्थितियां अकेले पाकिस्तान में ही नहीं हमारे देश समेत दुनिया के सभी देशों में पाई जा सकती हैं।
वर्ष 2013 में मुझे पाकिस्तान जाने का अवसर मिला। अमरीका की एक संस्था है जो एशिया में सद्भाव और धर्मनिरपेक्ष के मूल्यों के लिए काम करती है। इस संस्था की ओर से मुझे एक सम्मान मिला था। सम्मान प्रदान करने के लिए पाकिस्तान के कराची शहर को चुना गया था। मेरे अलावा पाकिस्तान की एक महिला शीमा किरमानी को भी सम्मान मिलना था। शीमा पाकिस्तान की बच्चियों को शास्त्रीय नृत्यों का प्रशिक्षण देती हैं। पाकिस्तान के तानाशाह ज़िया.उल.हक ने उन्हें आदेश दिया था कि वे पाकिस्तान की बच्चियों को भारतीय नृत्य न सिखाएं। पर उन्होंने ज़िया.उल.हक के आदेश को नहीं माना। उन्होंने ज़िया.उल.हक से कहा कि आप मुजरा सुनना बंद कर दें तो वे नृत्य का प्रशिक्षण देना बंद कर देंगी। क्या इस तरह का दृढ़ निश्चय नर्क में रहते हुए संभव है ?
हमें दिए गए सम्मान समारोह के कार्यक्रम में बहुत लोग आए थे। इनमें साहित्यकार,शायर,वकील, शिक्षक और पत्रकार शामिल हुए थे। इस समारोह के चलते तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि पाकिस्तान नर्क है। मैं 15 दिनों तक पाकिस्तान में रहा। परंतु इस बीच किसने हमें होटलों में ठहराया, किसने हमें टैक्सी उपलब्ध कराई,किसने हमारी मेहमान नवाजी की, पता नहीं लगा। लाहौर के अनारकली बाज़ार में हमने अपनी बहू,पोतियों के लिए कुछ खरीददारी की। दुकानदार को जब यह पता लगा कि हम हिन्दुस्तानी हैं तो उसने खरीदे गए कपड़ों की आधी कीमतें लीं। क्या इस तरह की मेहमान नवाजी नर्क में प्राप्त हो सकती है ? पाकिस्तान के प्रवास के दौरान हमें लाहौर में आयोजित एक लिटरेरी फेस्टीवल में शामिल होने का मौका मिला। फेस्टीवल के दौरान भारतीय शास्त्रीय नृत्यों का प्रदर्शन होता था। वहां हमने सादत हसन मन्टो पर एक नाटक देखा। जिस पर्चे में नाटक परिचय दिया गया था उसमें पाकिस्तान की सरकार के सांस्कृतिक रवैये पर व्यंगात्मक टिप्पणी की गई। प्रतिदिन कार्यक्रम के अंत में एक बैंडबाजे का कार्यक्रम होता था। बैंड के कार्यक्रम के समाप्त होने पर नारा लगाया जाता था 'दहशतगर्दी मुर्दाबाद'। नारे लगाने वाले युवक श्रोताओं से अपील करते थे कि वे इतने ज़ोर से नारे लगाएं जिससे उनकी आवाज़ सारे देश में सुनाई पड़े। क्या ऐसी बात नर्क में कही जा सकती है ?
पाकिस्तान के युवकों से हमारी लंबी बातें हुईं। सबका कहना था कि हमने हिन्दुओं को भगाकर गलती की। यदि हिन्दू यहां रहते और हमारा देश धर्मनिरपेक्ष होता तो हम भी उतनी प्रगति करते जितनी भारत ने की है। क्या इस तरह की बात नर्क में रहने वाले करते ?
पाकिस्तान में एक कानून है जिसके अनुसार जो खुदा की आलोचना करे, ईश निंदा करे उसे फांसी की सज़ा दी जा सकती है। यह आरोप है कि इस कानून का उपयोग व्यक्तिगत दुश्मनी भंजाने के लिए किया जाता है। इस कानून के आधार पर एक ईसाई महिला को जेल में डाल दिया गया था। इस महिला के पक्ष में पाकिस्तान के पंजाब सूबे के गर्वनर सलमान तासीर खड़े हुए। वे उस ईसाई महिला से मिलने जेल भी गए। तासीर साहब की यह 'हरकत' वहां के कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आई। कुछ दिनों बाद उन्हीं के एक सुरक्षाकर्मी ने उनकी हत्या कर दी। सलमान तासीर ने जो हिम्मत दिखाई, अपने उसूलों के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई,शायद उन्हें इस महान कार्य के लिए उन्हें स्वर्ग में स्थान मिला होगा। जिस मुल्क में तासीर जैसे साहसी व्यक्ति रहते हों उस मुल्क को नर्क कहना बेईमानी है।
फिर यदि रक्षा मंत्री पाकिस्तान को नर्क मानते हैं तो उन्हें अपने सहयोगी राम माधव को अखंड भारत की कल्पना करने से रोकना था। राम माधव नर्क ;पाकिस्तान को अखंड भारत का अंग बनाना चाहते हैं। फिर उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की इस बात के लिए निंदा करनी थी कि उनने नर्क के प्रधानमंत्री को उनके शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए क्यों बुलाया, उन्हें मोदी को रोकना था कि वे बिना पूर्व कार्यक्रम के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने गए और उनकी मां से मिले।
पार्रीकर जी दुनिया का कोई देश पूरी तरह से न तो नर्क होता है और ना ही स्वर्ग। पाकिस्तान में भी अनेक ऐसी घटनाएं हुई हैं जो शायद नर्क में भी नहीं होतीं, जैसे पेशावर के एक स्कूल में सैंकड़ों बच्चों को मारा जाना, जैसे लाल मस्जिद में घुसकर नमाज़ अदा करने वालों की हत्या करनाए जैसे बेनज़ीर भुट्टो की हत्या करना आदि। शायद पार्रीकर की मान्यता होगी कि भारत स्वर्ग है। परंतु पार्रीकर को स्वीकार करना होगा कि जब गुजरात के दलितों को सिर्फ इसलिए पीटा गया था क्योंकि वे एक मरी गाय की खाल निकाल रहे थे। न सिर्फ उन्हें पीटा गया वरन उन्हें एक कार से बांधकर घसीटा भी गया। जब उनके साथ ऐसा क्रूर व्यवहार हो रहा था उस समय उन्हें यह महसूस हो रहा होगा कि वे नर्क में हैं।
जब 1984 में सिक्खों का कत्लेआम किया गया था तब उन्हें भी यह लगा होगा कि क्या भारत नर्क हो गया है। इसी तरह जब गुजरात में 2002 में मुसलमानों का कत्लेआम किया गया था तब क्या उन्हें यह नहीं लगा होगा कि वे दोज़ख में रह रहे हैं ? उन बच्चियों,महिलाओं को उस समय कैसा लगता होगा जब उनके साथ बलात्कार किया जाता है, उन बच्चों और बच्चियों को कैसा लगता होगा जब उनका अपहरण कर उन्हें वैश्यावृत्ति के गर्त में फेंक दिया जाता है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि किसी भी देश के बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि वह नर्क है। प्रत्येक देश में नर्क व स्वर्ग दोनों ही होते हैं। अंतर इतना होता है कि नर्क जैसी परिस्थितियों के विरूद्ध कितनी आवाजें उठती हैं, उन परिस्थितियों को समाप्त करने के लिए कितने प्रयास होते हैं।
पूरे पाकिस्तान को नर्क कहकर पार्रीकर ने वहां के उन लोगों को अपमानित किया है जो पाकिस्तान में नरक जैसी परिस्थितियों को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे ही लोगों में महान सूफी गायक अमजद साबरी थे जिनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। साबरी पाकिस्तान में सूफी संतों का संदेश अपने अद्भुत गायन कला के द्वारा फैलाते थे। ऐसे व्यक्ति की हत्या करना एक नारकीय कृत्य ही है।
आखिर हम कब तक एक दूसरे से लड़ते रहेंगे ? शासकों का रवैया और मजबूरी कुछ भी होए दोनों देशों के आम लोगों को शांति और सद्भाव के प्रयास मिलजुल कर करना होगा। इस संदर्भ में कर्नाटक की अभिनेत्री एवं कांग्रेस नेत्री राम्या का मैं अभिनंदन करता हूंए जिन्होंने हिम्मत करके यह कहा कि 'पाकिस्तान नर्क नहीं है। वहां के लोग भी हमारे जैसे हैं। अभी हाल में मैं पाकिस्तान गई थी। मुझे कहीं ऐसा महसूस नहीं हुआ कि पाकिस्तान नर्क है'। उनके इस कथन को लेकर उनके विरूद्ध देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। मैं उनकी निंदा करता हूं जिन्होंने उनके विरूद्ध इस तरह का आरोप लगाया है। हमारे संविधान के अनुसार हमें दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण रवैया रखना चाहिए। जब तक किसी राष्ट्र से हमारे कूटनीतिक संबंध रहते हैं हम उस राष्ट्र को अपना दुश्मन राष्ट्र नहीं कह सकते। इस तरह जिन लोगों ने भी राम्या पर आरोप लगाया है दरअसल वे ही संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं और संविधान का उल्लंघन एक गंभीर   अपराध है
------एल.एस. हरदेनिया

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-08-2016) को "माता का आराधन" (चर्चा अंक-2448) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Babita Singh ने कहा…

पाकिस्तान का तो मालूम नहीं लेकिन जब तक जाति , धर्म के नाम पर लोगो को आपस में लड़ाने वाले leaders इस देश में है तब तक हमारा देश भी किसी नरक से कम नहीं है |

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