शनिवार, 24 सितंबर 2016

गणवेश धारी राफेल उडा रहे हैं

उरी की घटना के बाद  गणवेश  धारी राफेल विमान
पाकिस्तान के आकाश  में उडा रहे हैं  उनको यह जानकारी  नहीं है  कि आठ हजार करोड़ रुपये  देने के बाद लगभग  तीन साल  बाद फांस  फाइटर  विमान की  सप्लाई  देगा  कतर  और मिश्र के बाद  भारत  का  नम्बर  आता है  भारत की वायुसेना  को 136 राफेल  विमानों की आवश्यकता थी  किन्तु  मोदी  सरकार ने 36 विमानों का सौदा प्रति विमान 1700करोड  में किया है जबकि  कांग्रेस  सरकार 715करोड में खरीद  रही थी तब  भाजपा इसका  विरोध कर रही थी 237 गुना अधिक की मत  दी जा रही है                                               
वैसे अब तक इस विमान के ग्राहक 80 से ज़्यादा देश रहे है और लगभग सभी देशों ने इसे खरीदना वर्षों पहले ही बंद कर दिया है । कई देशों ने इसे ब्लैकलिस्टेड किया हुआ है और कुछ देशों ने तो इसे "expensive garbage" यानि महँगा भंगार तक कह दिया है ।
राफेल विमान बनाने वाली कंपनी dassault aviation ने एशिया में अपने व्यापार के लिए जिस कंपनी को अपना पार्टनर बनाया है वो एक कंपनी भारतीय है । और ये वही कम्पनी है जिसे मोदी सरकार ने डिफेन्स में 100% तक FDI को मंज़ूरी देने के बाद भारत सरकार के लिए लाइज़निंग का ज़िम्मा सौंपा है । ये कंपनी है मुकेश अंबानी की "रिलायंस"                                               
मोदी की मेक इन  इंडिया  के नारे का भी कोई मतलब नहीं  रह गया है और  108विमानो का निर्माण  एच  ए एल  बंगलुरु में  होना था  वह इस  समझौते  में  नहीं है  59000 करोड़ रुपये खर्च कर राफेल  लेना  बुद्धि मानी  नहीं  है लेकिन  अंबानी के प्रधान  सेवक  को  लाभ  पहुंचाने का काम उन्हें करना है
उरी के बहाने  अंबानी को  लाभ देकर  देश को  नुकसान पहुंचाने  के  कार्य  को नई देश भक्ति  परिभाषा मानना होगा  प्राधोगिकी हस्तांतरण  न होना  भी घाटे का सौदा है   खुफिया एजेंसियों का फेल होना और सुरक्षा बलों की चूक को नजरअंदाज करना भी  उचित नहीं है इनकी जिम्मेदारी  को तय  करके  दंडित करना  भी  आवश्यक है   पाकिस्तान  पाकिस्तान  चिल्लाने  से  कोई  अर्थ नहीं  निकलता है    संघी  अफवाह  तो उडा  सकता है  दंगा  करा  सकता है किन्तु  देश  हित की बात  सोच  नहीं  सकता है        
 सुमन    

1 टिप्पणी:

अजय कुमार झा ने कहा…

"संघी अफवाह तो उडा सकता है दंगा करा सकता है किन्तु देश हित की बात सोच नहीं सकता है"......निहायत ही स्तरहीन टिप्पणी है ये रंधीर जी |

क्या आप संघ की विचारधारा से परिचित हैं , संघ को कभी नज़दीक से जाकर महसूस किया है ??
सर्वथा पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर आपने एक सामरिक विषयक लेख में जबरन संघ को घुसेड दिया |