शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

गुलाम भारत मे मिले अधिवक्ताओ के अधिकारो को आजाद भारत मे छीना जा रहा हैं

वाई0एस0लोहित सम्बोधित हुए
बाराबंकी। गुलाम भारत में जो अधिकार अधिवक्ताओ और जनता को प्राप्त थे। उन अधिकारो को आज आजाद भारत में छीना जा रहा है। आज अधिवक्ता को अपने अधिकारो के प्रति जागना होगा। अधिवक्ता ही बड़ी आसानी से बड़ी से बड़ी संसद में अपनी बात रखने में समक्ष होता है। कानून मे संशोधन करने के समय हकूमरानों को यह याद रखना चाहिए कि कानून बदलने में नेता नही होने चाहिए। जिस प्रकार 403 विधायक विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है। और 542 संसद सदस्य लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते है। उसी प्रकार जनता के प्रतिनिधि के रुप में अधिवक्ता होता है। 
                                                     यह बात जिला बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित 'अधिवक्ता स्वतन्त्रता एंव प्रतिबन्ध' संगोष्ठी में इण्यिन एसोसिएशन आफ लायर्स के राष्ट्रीय महासचिव वाई0एस0 लोहित ने कही। उन्होने आगे कहा आज अधिवक्ताओ के अधिकारो पर प्रतिबन्ध लगाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन कोई भी फैसला बिना अधिवक्ता के नही लिया जाना चाहिए। अधिवक्ता न्यायालय मे प्रेक्टिस करता है। लेकिन मजबूरन आज उसको आन्दोलन की प्रेक्टिस शुरु करनी पड़ेगी। 
                                       वही जनपद गोण्ड़ा के पूर्व बार अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी ने कहा कि अगर विरोध करना पड़ा तो अधिवक्ता पीछे नही हटेगें। पूर्व विधायक व अधिवक्ता दीप नारायण पाण्डे ने कहा कि आज नये अधिनियमो में अधिवक्ताओ को वचिंत किया जा रहा है। 
                                एसोसिएशन के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य  रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि आज 16 लाख अधिवक्ताओ को टारगेट बनाया जा रहा है। अधिवक्ताओ की शक्ति पर आज प्रतिबन्ध लगाने की कोशिश की जा रही है। 
                                                       संगोष्ठी में जिला बार महामंत्री नरेन्द्र कुमार वर्मा, पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, पूर्व महामंत्री हिसाल बारी किदवई, अनूप कल्याणी, रामशंकर गौतम, हूमायू नईम खां, बृजमोहन वर्मा ने अपने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन सीनियर अधिवक्ता उपेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। संगोष्ठी में मुख्य रुप से विजय प्रताप सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह राणा, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह, रईस कादरी, अशोक द्विवेदी, आनन्द सिंह, रमन द्विवेदी, गौरी रस्तोगी, प्रतूष शुक्ला, निर्मल वर्मा, योगेन्द्र प्रताप वर्मा, मो0 जमीर, सजंय सिंह, मलखान सिंह, ज्ञान सिंह, मो0 तालिब खां आदि मौजूद रहे।

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (09-04-2017) को
"लोगों का आहार" (चर्चा अंक-2616)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक