शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

मीडिया की प्रमाणिकता

       आप न्यूज मीडिया चैनलों को देखें वे कितने घटिया तरीके से आपके सामने तथ्यों को रख रहे हैं, लगभग सभी मीडिया चैनल की हेडलाइन है ‘पीएनबी स्कैम में चंदा कोचर और शिखा शर्मा को समन’अंदर बताया जा रहा है कि serious Fraud Investigation Office (SFIO)  की तरफ से ICICI बैंक की सीईओ चंदा कोचर और एक्सिस बैंक की सीईओ शिखा शर्मा को समन भेजा गया है। एक तरह से इसे एक सामान्य प्रक्रिया की तरह ही प्रस्तुत किया जा रहा है लेकिन जो बात छिपाई जा रही है वह यह हैं कि ये समन पीएनबी घोटाले की राशि 12672 करोड़ रुपए से बिल्कुल अलग मामले में भेजा गया है।
    याद कीजिएगा कि जब पहली बार यह घोटाला सामने आया था तो पीएनबी के टॉप ऑफिशियल का कहना था कि यह सिर्फ हमारा ही मामला नहीं है इसमें लोन देने में 30 और बैंक भी शामिल हैं, जो आज सामने आ गए हैं।
5280 करोड़ का एक अलग फ्रॉड है
    बताया जा रहा है कि करीब 31 बैंकों ने मेहुल चौकसी के गीतांजलि ग्रुप को करीब 5280 करोड़ रुपए का लोन दिया था। इनमें ICICI  बैंक के करीब 405 करोड़ रुपए और एक्सिस बैंक की भी एक बड़ी राशि शामिल है। खास बात यह है कि इस नए घोटाले में कोई LOU जैसी बात नहीं है जो पीएनबी वाले केस का आधार थी, इस कंसोर्टियम ने यह 5280 करोड़ की रकम कब दी इस बारे में भी सब छुपाया जा रहा है। जो लोग बैंकों के निजीकरण की बात कर रहे थे वे इस मामले को जरूर देखें। देश के दो शीर्षस्थ प्राइवेट बैंक AXIS और ICICI बैंक इन 31 बैंको के कंसोर्टियम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, icici इसमें लीड बैंक था। SFIO  को शक है कि नीरव मोदी और ‘हमारे मेहुल भाई’ उर्फ मेहुल चौकसी ने करीब 400 शैल कंपनियाँ तैयार कीं, जिनके डायरेक्टर भी फर्जी थे। इन सभी कंपनियों का इस्तेमाल सारे पैसों को भारत से बाहर पहुँचाने के लिए किया गया। शायद हमारे चौकीदार ने जब तीन लाख शैल कम्पनियां पर ताला लगा दिया था तब यह 400 कम्पनियाँ छूट गयी होगी? इसलिए इन एजेंसियों को आज मालूम पड़ रहा है! लेकिन यह तो शुरू से ही मालूम था कि मेहुल चौकसी शैल कम्पनियाँ बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग करता है। 2013 अक्टूबर में यह खबर आ गयी थी कि देश मे गीतांजलि जेम्स शैल कम्पनियों द्वारा शेयर प्राइस में सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए हेरफेर करने की कोशिश किया जा रहा है, उस वक्त नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने जाँच भी की थी।
  इन सबके बावजूद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी उन्हें आदरपूर्वक हमारे मेहुल भाई कहकर संबोधित कर रहे थे तो इस बात से चंदा कोचर और शिखा शर्मा क्यो प्रभावित नहीं होती, उन्होंने भी तुंरन्त 30 बैंकों का कंसोर्टियम बना कर नीरव चौकसी को वर्किंग केपिटल उपलब्ध करा दी। यह घोटाला भारतीय बैंकिंग का दीवाला निकाल कर ही दम लेगा।  अब यह साबित होने जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है।
डूब सकता है आस्ट्रेलिया निवेश!
 
    दरअसल अडानी की रेल लाइन परियोजना के तहत ऑस्ट्रेलिया में उसकी कारमाइकल खदान से लेकर ऐबट प्वाइंट स्थित अडानी के स्वामित्व एवं उसके द्वारा परिचालित थोक कोयला लदान प्रतिष्ठान तक करीब 400 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना थी, जिसके वित्त पोषण के लिए चीन के 2 सबसे बड़े सरकारी बैंकों ने लोन देने से मना कर दिया था। बैंक का दावा है कि वह ग्रीन फाइनेंसिंग के लिए प्रतिबद्ध है और इसे अहमियत देता है। अन्य अंतर्राष्ट्रीय बैंक और वित्तीय संस्थान पहले ही लोन देने से मना कर चुके हैं। अडानी को आखिरी उम्मीद आस्ट्रेलिया की सरकार से थी। 4 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी 400 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने से साफ इंकार कर दिया है। इस निर्णय को ऑस्ट्रेलिया में अडानी के प्रोजेक्ट के लिए ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है। भारत में अडानी पर विभिन्न बैंकों का करीब 96,031 करोड़ का लोन बाकी है।
    यह प्रोजेक्ट यदि डूबता है तो इस पूरे देश की अर्थव्यवस्था ही खतरे में आ जाएगी, क्योंकि अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर भी लगभग 1, 21, 000 करोड़ का बैंक लोन हैं और चाइना डेवेलपमेंट बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनी आर-कॉम के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी का केस दर्ज करा दिया हैं। रूइया के एस्सार ग्रुप की कंपनियों पर 1,01,461 करोड़ का लोन बकाया है, जिसे वसूलने के असफल प्रयास किये जा रहे हैं। इन तथ्यों के आलोक में आप नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले को रखकर देखिए तो आप समझ जाएँगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक हालत क्या है।
           मोदी ने एस.बी.आई. से कराया था 62 सौ करोड़ लोन का करार। ऑस्ट्रेलिया में अडानी को कारमाइकल खदान के प्रोजेक्ट में बहुत बड़ा नुकसान होने जा रहा है। अडानी समूह ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान, रेलवे और बंदरगाह परियोजना पर 3.3 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है। उसे इस प्रोजेक्ट के लिए मोदी जी ने भारतीय स्टेट बैंक से 6200 करोड़ के लोन का करार कराया था और वह भी तब जब 6 अंतर्राष्ट्रीय बैंकों ने इस प्रोजेक्ट को पर्यावरण के लिए खतरा बताते हुए फाइनेंस करने से मना कर दिया था। विदेशी धरती पर किए जाने वाले प्रोजेक्ट के लिए आज तक का यह सबसे बड़ा लोन करार था। जिस वक्त यह लोन दिलवाया गया था उसी वक्त जन धन योजना भी शुरू की गई थी और उसी में जमा पैसों से स्टेट बैंक से यह लोन दिलाने का इरादा था।

-गिरीश मालवीय
मीडिया विजिल से साभार
लोकसंघर्ष पत्रिका मार्च 2018 में प्रकाशित

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