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रविवार, 15 सितंबर 2013

एक औपनिवेशिक कानून

बाराबंकी।भूमि अधिग्रहण कानून एक औपनिवेशिक कानून है जिसमें अंग्रेजो ने अपनी औधोगिक ढाचा रेल,परिवहन की आधारभूत संरचना को खड़ा करने के लिए किसानो से जबरन भूमि लिया और मुआवजा से भी वंचित रखा।
    अखिल भारतीय किसान सभा व
हयूमन राइट ला नेटवर्क द्वारा लखनऊ मेट्रो  सिटी तथा बाराबंकी विकास प्राधिकरण के नाम 63 गावों के किसानों की उपजाऊ जमीन छीनने के कुचक्र के खिलाफ आयोजित गोष्ठी का उदघाटन करते हुए सुप्रसिद्व अधिवक्ता के0के0राय ने कहा कि आज के दौर में भूमि अधिग्रहण कानून के जरिये कारपोरेट घरानों को किसानो की जमीन जबरन छीन कर सौंपी जा रही है। आदिवासी इलाको में विदेशी कंपनियों को लाइसेस देकर आदिवासी समाज को उनके अधिकार जल,जंगल, जमीन से वंचित किया जा रहा है।
    उन्होने आगे बताया कि बाराबंकी जनपद में उपजाऊ जमीनो को छीनकर मेट्रो सिटी जैसी योजनाओं का निर्माण न सिर्फ किसान विरोधी है,वरन यह विकास विरोधी भी है।
    गोष्ठी में आए हुये मुख्य अतिथि  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय परिषद सदस्य अशोक मिश्रा ने कहा कि किसान संघर्ष का एक लम्बा इतिहास है। तेलंगाना व त्रिभागा से लेकर उत्तर प्रदेश में कमलापति त्रिपाठी के मिर्जापुर सिथत फार्म हाउस से लेकर बिरला के लखीमपुर के फार्म हाउस तक किसानों ने बटवाया है। उसी तरह से लखनऊ और बाराबंकी में सिथत सफेद पोश भूमाफिया व अधिकारियों के फार्म हाउसेज को किसान संघर्ष के माध्यम से बटवाया जाएगा।
    सरकार में अगर समाजवादी पार्टी को रहना है तो लखनऊ मेट्रो सिटी व विकास प्राधिकरण के नाम पर किसानो की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण की बात स्वप्न में भी न सेाचे अन्यथा इस पार्टी का वजूद समाप्त हो जाएगा। पार्टी के सह सचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि मेट्रो सिटी व विकास प्राधिकरण के विरोध में लखनऊ विधान सभा पर आगामी 30 सितम्बर को किसान सभा व हयूमन राइट ला नेटवर्क के द्वारा  जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।
    पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि किसान की जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ गांव-गांव में प्रदर्शन किया जाएगा और जिले में तैनात अधिकारियों के काले कारनामो को बताया जाएगा। डा0उमेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि जिन अधिकारियों ने अपने भार्इ व भतीजो के नाम पर प्लाट व जमीनें खरीदी है उनकी एक सूची प्रकार्शित किया जाएगी।
    गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए डा0कौसर हुसैन ने कहा कि अधिकारियों को अपनी प्राथमिकताए समझ लेनी चाहिए। किसानो की जमीन छीनने से पहले उनको कमीशन व घूसखोरी बन्द कर देनी चाहिए ।
    गोष्ठी में निर्मल वर्मा, राम नरेश वर्मा, पुष्पेन्द्र कुमार,दलसिंगार,नीरज कुमार एडवोकेट,गिरीश चन्द्र,रामशंकर शर्मा, रामविलास वर्मा,अमरसिंह, शिवम शुक्ला, संजय सिंह सहित विभिन्न गावों के सैकड़ो प्रतिनिधि मौजूद थे। गोष्ठी का संचालन किसान सभा के जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया।
नीरजवर्मा मंत्री
अखिल भारतीय किसान सभा,
बाराबंकी,।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

हम लूटने आये हैं लूट कर जायेंगे

उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण 
धान की जगह आवास बनायेंगे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मिला हुआ बाराबंकी जनपद है. लखनऊ-बाराबंकी की सीमा  प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारीयों ने सड़क के दोनों तरफ के ज़मीने फैजाबाद तक खरीद डाली हैं. कुछ ज़मीने या फार्म हाउस उनके नाम हैं और बाकी सब बेनामी संपत्ति है. अब इन अधिकारीयों की निगाहें दूर दराज के गाँवों में किसानो की ज़मीनों पर लगी हुई है इसके लिए वह चाहते यह हैं कि  मेट्रो सिटी की योजना बना कर या विकास प्राधिकरण की योजना बनाकर सरकारी पैसे से आधारभूत ढांचा खड़ा कर अपनी घूसखोरी की रकम से किसानो की बेशकीमती जमीन रोजगार को छीन लिया जाए. जनपद में धान, गेंहू, पिपरमिंट, सब्जियों की रिकॉर्ड पैदावार होती है. केला उत्पादन में भी जनपद प्रगति की ओर अग्रसर है, आम की बागों के लिए भी मशहूर है, सबका महाविनाश करना चाहते हैं विकास के नाम पर
 
 किसी भी तरह से किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण और उनके रोजगार छीन लेना प्रशासन की मुख्य मंशा है चाहे बाराबंकी विकास प्राधिकरण बनाकर  या लखनऊ बाराबंकी मेट्रो सिटी बनाकर 163 गांवों के किसानो की जमीन को छीन लेना मुख्य उद्देश्य है।
अधिकारियों का तर्क यह है कि प्रति वर्ष 500 करोड़ रूपये का राजस्व किसानों की जमीन छीन लेने से ब़च  जायेगा, किन्तु उन्हें यह बात रखनी चाहिए कि कमीशन खोरी व घूसखोरी बंद कर दें तो
प्रतिवर्ष लगभग 1500 करोड़ रूपये की सीधी बचत राज्य सरकार को होगी और किसी किसान के खेत भी नहीं छीनने पड़ेंगे। इन अधिकारीयों का पेट उपरी कमाई से अब नहीं भर रहा है तो जनपद के कई अधिकारी अपने भाई-भतीजों के आड़ में प्रॉपर्टी डीलिंग, बिल्डर्स का काम शुरू कर दिए हैं और स्तिथि यह हो गयी है कि हम लूटने आये हैं लूट कर जायेंगे
बागों को काट डालेंगे ज़मीन की लूट के लिए
     बिजली नहीं, पानी नहीं, नालियों की सफाई नहीं, स्कूलों में अध्यापक नहीं, अस्पताल में डाक्टर नहीं, जनपद में कानून व्यवस्था नहीं आदि इन्हीं कामों को देखने के लिए प्रशासन होता है। लेकिन इनकी प्राथमिकता बदल गयी है कि किसानों की उपजाऊ जमीन कैसे छीनी जाये, खनिज सम्पदा की लूट कैसे की जाये ? जनपद में गोमती घाघरा सहित कई नदियाँ जिनकी बालू अवैध रूप से बेचवाने का काम शासन व प्रशासन करता है जिससे करोडो रुपये की अवैध कमाई होती है. कानून सिर्फ उनके लिए है जो इस अवैध कार्य में अधिकारीयों के मेली मददगार नहीं होते हैं
भूमि अधिग्रहण के कारण देश में खेती के लायक जमीन कम हो रही है। सरकार कृषि भूमि का अधिग्रहण करने की जगह आधारभूत परियोजनाओं के लिए बंजर भूमि की पहचान करे या बंजर जमीन का उपचार कर उसे कृषि योग्य बनाए।

  उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के बारे में फैसला लेने का अधिकार राज्यों पर छोड़ा गया है। 

सुमन
लो क सं घ र्ष !
 
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