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बुधवार, 2 नवंबर 2016

राजीव यादव की सरकारी हत्या का प्रयास


आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में ले जाकर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी उस मुठभेड़ को सही साबित करने के लिए आश्चर्यजनक परिस्थितियों में जेल वार्डन रमाशंकर यादव की हत्या कर दी जाती हैं यह सभी कार्य राजनीतिक नेतृत्व के सम्भव नहीं है ♉ दिल्ली में सीबीआई वरिष्ठ अधिकारी बंसल को गिरफ्तार करती है और उस घटना में पहले बंसल की बेटी और पत्नी आत्महत्या कर लेती है और बाद में बंसल और उनका पुत्र भी आत्महत्या कर लेता है सीबीआई केन्द्र सरकार की इच्छा शक्ति को प्रदर्शित करती है और अधिकारियों को यह संदेश देती है कि अगर हमारे राजनीतिक इशारों के अनुसार कार्य नहीं करोगे तो यातना गृह में पूरे परिवार को तडपा तडपा कर मार डाला जायेगा। यह सब मामले नाजी जर्मनी की याद दिलाते हैं और हिटलर का गेस्टापो   जर्मनी में कवि लेखक पत्रकार न्यायविद व यहूदी लोगों को उठा ले जाते थे यातनागृहो में मार डालने का कार्य करते थे और अगर कोई व्यक्ति किसी जेल में होता था तो उसको कैदियों द्वारा पीटने के नाम पर उसकी हत्या कर दी जाती थी। कतील नाम के मुस्लिम नौजवान की हत्या जेल में कर दी जाती जब उसके केस का फैसला आने वाला होता है। उसी तर्ज पर जब इन सिमी कार्यकर्ताओं का फैसला आने वाला था तो जाकिर हुसैन सादिक, मोहम्मद सलीक, महबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अकील अमजद, शेख मुजीब और मजीद की हत्या कारागार से निकाल कर कर दी जाती है।
                                                             वही   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उक्त हत्या कांड  के विरोध प्रदर्शन  में पुलिस ने नागरिक संगठन रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव की बुरी तरह पिटाई की है. पुलिस राजीव को पीटते हुए जीपीओ पुलिस चौकी ले गई, जहां तबीयत बिगड़ने पर ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया.
                                  राजीव के अलावा मंच के शकील कुरैशी भी ज़ख़्मी हैं. मंच ने सोमवार को भोपाल में हुए सिमी एनकाउंटर और उसमें पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए लखनऊ, जीपीओ पर विरोध प्रदर्शन बुलाया था जहां पुलिस ने उनपर कार्रवाई की.   रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब अधिवक्ता ने कहा है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार से कोई अंदरुनी गठजोड़ कर रखा है?जिसका परिणाम   लाठी चार्ज है यह भी सरकारी हत्या का प्रयास है जो भी विरोध करेगा  उसका भी यही अंजाम होगा

                          देश बदल रहा है देश को यातना गृह और हत्या घर में बदला जा रहा है न्यायपालिका चिल्ला रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति न कर न्यायालयों में ताला लगाने की साजिश है राजनीतिक नेतृत्व हिटलर के फासीवाद से प्रतीत है उससे कोई उम्मीद करना बेइमानी होगी जरूरत इस बात की है कि धर्मनिरपेक्ष, जनवादी कार्पोरेट विरोधी शक्तियों को अपनी ताकत से विरोध करने की है भोपाल फर्जी मुठभेड़ प्रकरण की अविलंब जाच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश इस बिंदु पर कराने की आवश्यकता है कि क्या राजनीतिक नेतृत्व की इस फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में कहा तक शामिल था 
----रण धीर सिंह सुमन 
                          एडवोकेट
 लो क सं घ र्ष !

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

आइपीएस अफसर ने सरकारी गवाह--------------------------

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कर्णाटक मुहकमत के आला अफसर आइपीएस  अलोक कुमार का नाम सुर्ख़ियों में है.करोड़ों रुपये गबन के मामले में तो अफसरों के नाम बारहा आते रहते है और इसी के चलते अफसरान माजुल भी किये जाते है.लेकिन फिर से दुबारा रुजू भी किये जाते है.ऐसे कई अफसर है जिन्होंने बेशर्मी की हद्द पार की हुयी है. अलोक कुमार अब लॉट्री कुमार बन चूका है.करोड़ों के लॉट्री घोटाले का सरदार अलोक कुमार  के खिलाफ  सबूत हासिल हो चुके है खैर  अब तो अलोक कुमार ने नौकरी से हाथ धो लिया है.लेकिन आइपीएस जब आयजीपी बन कर अपने फराईज़ को अंजाम देता रहता है किस तरह का ज़ुल्म भी करता है इस तरफ ना तो मीडिया देखती है ना कोई इंसानी हुकूक की तंज़ीम इस पर बात करना पसंद करती है.आजीपी के ऊँचे ओहदे पर फ़ाइज़ होकर किस तरह की जेहनियत भी ये अफसर रखता है इसका पर्दा फाश तब हुआ जब हुबली सिमी मामले में गिरफ्तार सतरा और अदालत से बाइज्जत रिहाशुदा  नौजवानों में से एक सादिक समीर ने हाल ही में मुनक्कद प्रेस कोन्फेरेंस के दौरान इस बात का खुलासा किया के कैसे आजीपी अलोक कुमार ने झूट मुठ का मुकद्दमा बना कर फंसाया और धमकी भी दी के अगर तू सरकारी गवाह बन कर दीगर अफरादों के खिलाफ गवाही नहीं देगा तो तुझे भी इस केस में मुलव्विस किया जाएगा.लेकिन सादिक समीर ने ये कहा के मै किसी को भी नहीं जानता तो कैसे झूटी गवाही दूँ.....
मामला एहि नहीं रुका समीर सादिक ने इंकार किया तो पहले छोड़ दिया गया.फिर अचानक एक दिन रात साढ़े बारा  बजे न्यू गुरुपणपाल्ल्या जहा पर सादिक समीर रिहाइश पजीर है उस इलाके को सीज़ किया गया सौ डेढ़ सौ पोलिस तैनात कर पुरे मोहोल्ले की नाका-बंदी की गयी.बिजली को भी निकाला गया और समीर के घर पर सर्च लाइट मारे गए.और एक बड़ी जीप में आयजीपी  आइपीएस अलोक कुमार पूरी मीडिया को लेकर तशरीफ़ लाये और घर पर रेड किये उस वक़्त बीवी और छोटी बच्ची के साथ समीर सादिक मौजूद थे.घर में एक तरह का खौफ का माहोल था पुरे मोहोल्ले में भी एक खौफ का माहोल बनाया गया.देखिये कैसे माहोल बनाकर गिरफ्तारी अमल में लायी जाती है.ताके अवाम भी सोचने पर मजबूर हो जाती है के जो शख्स हमारे दरमियान था वो आतंकवादी ही था....!!
गिरफ्तारी अमल में आई.फिर तहकीकात भी शुरू हुयी.जब के पहले से अलोक कुमार को ये मालुम था के समीर सादिक का इस केस से कोई ताल्लुक नहीं.फिर पूछताछ के दौरान अलोक कुमार ने दबाव और धमकी शुरू की के छोड़ देता हूँ अगर तू इनके खिलाफ गवाही देगा तो...फिर वही समीर सादिक ने दौराया ''मै किसी को भी नहीं पहचानता तो कैसे इनके खिलाफ गवाही दू....समीर सादिक के घर से मज़हबी किताबों को बतौर सबूत बरामद किया गया था और इसी को मुल्क के खिलाफ पढ़ाई जानेवाली किताब ऐसा  दस्तावेज होने की बात को दर्ज किया गया.इन किताबों में खास कर दुआओं की किताबे हदीस,कुरानी आयात,तारीखे इस्लाम बुजुर्गों के वाक़ियात ,सीरत उन नबी की किताबे मौजूद थी.लेकिन यहां पर पूछनेवाला कौन था.'' आगे समीर सादिक ने ये भी बात कही के मै किस बात पर उनसे ऐतजाज करता मै खुद इतना डर गया था की मुझे क्या करना या किया जा रहा समझ में नहीं आ रहा था.पूरा मोहल्ला खौफ  के साये में था...पुलिस की चहल पहल कई दिनों तक चलती रही...तक़रीबन आठ साल बाद रिहाई नसीब हुयी....तब तक पूरा खत्म हो चूका था....आज भी लोग सलाम का जवाब भी देना मुनासिब नहीं समझते......रिश्तदारों ने तो कब के ताल्लुक काट दिए है...रोजी रोटी का मसला  इम्तेहान बन कर आन पढ़ा है.बच्चों के साथ कैसे ज़िन्दगी गुज़ार दूँ......बताईये कहते कहते सादिक समीर सय्यद रो पड़े...उनके आंसुओं ने इस मिल्लत की बेहिसी को एक बार फिर उजागर कर दिया.लेकिन कोई फायदा नहीं.इसलिए यंहा आंसुओं और जज़्बातों की कोई कदर नहीं.....सिर्फ पैसा बोलता है...
रियासत में दहशत गर्द सरगर्मियों के इलज़ाम में गिरफ्तारी के बाद अदालत से बाइज्जत बरी किये गए  सय्यद सादिक समीर ने यहा अपनी प्रेस कोन्फेरेंस  के दौरान रियासत के आइपीएस अफसर अलोक कुमार का भण्डा फोड़ करते हुए कहा के इन्हे २००८ में  जब रियासत में सिमी तंज़ीम के ज़रिये   दहशतगर्दाना सरगर्मियों के इलज़ाम में गिरफ्तार किया गया तो इसके बाद आइपीएस अलोक कुमार ने  इन पर दबाव डाला था के गिरफ्तार शुदा दीगर मुल्ज़िमींन  के खिलाफ वो गवाही दे के ये लोग भी सिमी तंज़ीम के ज़रिये रियासत में दहशतगर्दाना सरगर्मियां चला रहे है इन्होने बताया के सीआइडी महकमा के डीआइजी के हैसियत से इनकी कयादत में ही इस मामले की जांच शुरू हुयी थी,इन्हे भी इस केस में गिरफ्तार किया गया और फिर दबाव डाला जाने लगा के वो गिरफ्तार शुदा दीगर मुल्ज़िमींन  के खिलाफ अदालत में गवाही दे.लेकिन जिन लोगों के बारे में कुछ नहीं जानता था इनके खिलाफ गवाही देने से इन्होने साफ़ इंकार कर दिया.सादिक समीर ने कहा के गैर कानूनी तरीके से इक्कीस  फ़रवरी२००८ से २५ फ़रवरी तक इन्हे कस्टडी में रखा गया इनकी रिहाइश गाह पर जो इस्लामी अदब पर मबनी किताबे ज़ब्त की गयी इन किताबों को दुश्मन मवाद   किताबे करार देकर मीडिया में उछाला गया जब के  ये सारी किताबे खुले   बाज़ार   में दस्तयाब  किताबे  थी इनमे  ऐसा  कोई  मवाद नहीं था जिसे  मुल्क  ए  दुशमन  करार  दिया जाता  ना  ही इसमें  कोई  जिहादी  मवाद था अदालत ने भी   बाद में वाज़ेह  कर  दिया के  इस  मामले में गिरफ्तार ज़्यादा  तर अफ़राद डॉक्टर्स इंजीनियर्स और छोटे मोटे ताजिर थे अदालत ने तमाम गिरफ्तार शुदा  सतरा अफ़राद को बेगुनाह करार दिया गया इसके बावजूद अबतक सिर्फ चार अफरादों को रिहा किया गया.बकिया अफ़राद के खिलाफ दीगर रियासतों में मुकद्दमे दर्ज है.बगैर किसी नाकर्दा गुनाह इन अफरादों को अपनी ज़िन्दगी के आठ साल जेल में गुज़ारने पड़े.और अब इनकी ज़िन्दगी बर्बाद हो चुकी है.समाज में जो इज्जत थी इसे बिलावजह नीलाम कर दिया गया.अब लोग हमसे राबिता रखने या मामिलात करने से घबरा रहे है इस मौके पर इन्होने कहा के हम तमाम सतरा  अफ़राद को इल्ज़ामात से बरी करार दिए जाने के धारवाड़ फर्स्ट अडिशनल सेशन कोर्ट  के फैसले के खिलाफ रियासती हुकूमत अब दुबारा अपील दाखिल ना करे अब हममे कानूनी जंग लड़ने की मजीद ताकत नहीं है
- इक़बाल अहमद जकाती
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