बुधवार, 7 जनवरी 2026
विदेश सेवा में रहकर घास छीलते हुए पूरा करियर निकालने वाले संघी एस जयशंकर ने कभी दावा किया था कि नरेंद्र मोदी से पूछे बिना दुनिया में पत्ता तक नहीं हिलता।
सौमित्र राय
विदेश सेवा में रहकर घास छीलते हुए पूरा करियर निकालने वाले संघी एस जयशंकर ने कभी दावा किया था कि नरेंद्र मोदी से पूछे बिना दुनिया में पत्ता तक नहीं हिलता।
किसे मालूम था कि एक दिन चार वाक्यों की बेइज्जती से जयशंकर और मोदी दोनों के शरीर से इस झूठी शान के सारे पत्ते उड़ जाएंगे।
सिर्फ़ जयशंकर ही नहीं, अजित डोवाल के डिप्टी की भी इज़्ज़त चली गई।
मैं कल चुपचाप देख रहा था कि कैसे पूरे दिन मोदी का पीएमओ सन्नाटे में रहा।
सबसे पहले तो ट्रंप से लॉबिंग के लिए 18 लाख डॉलर सालाना पर किराए पर ली गई फर्म ने FRR के तहत पीएमओ और अमेरिका में भारतीय दूतावास के हर फोन कॉल और ईमेल का ब्यौरा जारी कर दिया।
इन्हीं में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हमले और सीजफायर का भी ब्यौरा शामिल था, जिसमें मोदी सत्ता ट्रंप से मीटिंग के लिए गिड़गिड़ा रही थी।
बदन से पत्ते उतरते देखकर हमारे विदेश मंत्रालय ने बेशर्मी से कहा कि लॉबिंग कोई नई बात नहीं है।
फिर देर रात ट्रंप ने विश्वगुरु को नंगा कर दिया और तू–तड़ाक का सारा रिश्ता एक झटके में धुल गया।
ट्रंप ने कहा–मोदी मुझसे मिलने आए थे। पूछा–सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं? मैंने कहा–हां।
उन्होंने हमसे अपाचे हेलीकॉप्टर मांगे। हमने 5 साल तक नहीं दिए। फिर मोदी मुझसे मिलने आए थे। पूछा–सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं? मैंने कहा–हां।
मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, लेकिन मुझे खुश नहीं कर पा रहे हैं।
मैंने आपको बीते मई में ही बता दिया था कि आज का दिन आयेगा और आया भी।
गोदी चैनल चुप हैं। बीजेपी आईटी सेल चुप है। समूची हिंदू सत्ता की बकलोली बंद है।
अमेरिका में भारत के राजदूत तक वहां के सांसदों से गिड़गिड़ा रहे हैं कि कुछ टैरिफ कम करवा दो।
लेकिन, ट्रंप खुद मोदी को बाहर इंतज़ार करवाते हैं। मुलाकात का समय लॉबिंग फर्म तय करती है।
व्हाइट हाउस के लिए जयशंकर की अहमियत किसी चपरासी से कम नहीं। फिर पीयूष गोयल की क्या बात करें।
70 साल में भारत की ऐसी बेइज्जती कभी नहीं हुई। इतनी बेइज्जती तो गोधरा दंगों के बाद भी नहीं हुई, जब अमेरिका ने मोदी का वीज़ा रोक था।
नरेंद्र मोदी अब जीवन के सबसे बुरे दिनों से गुज़र रहे हैं।
उनकी बात खुद उनकी पार्टी के भीतर कोई नहीं सुनता।
मैंने यह भी चेताया था कि 14 जनवरी तक यह दिन भी देखने पड़ेंगे।
बेहतर होगा कि बदन पर इज़्ज़त के बचे–खुचे पत्तों को लपेटे मोदी इस्तीफ़ा देकर निकल लें।
वरना जल्द ही वे पत्ते भी नहीं रहेंगे।
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1 टिप्पणी:
ये सभी बड़े बेशर्म और थेथर हैं
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