गुरुवार, 18 जून 2026
लोगों को Apophenia और Pareidolia जैसी बीमारी से बचायें-डाँ महफूज अली .
अभी कुछ दिन पहले एक अजीब इंसिडेंट हुआ मेरे साथ... हुआ क्या कि मैं एक आदमी से मिलने उसके फैक्ट्री में गया था... उसका पीए मुझे पार्किंग में रिसीव करने आया था. मैं पीए के साथ उसके ऑफिस में पहुंचा तो देखा बाहर जूते चप्पल उतरे हुए थे... तो मैंने भी उतार दिए पीए के कहने से पहले ही... ऑफिस में जैसे ही घुसा तो देखा कि जिससे मैं मिलने गया था उसके ऑफिस में कोई टेबल चेयर नहीं थी.. और जो भी आता वहीँ ज़मीन पर लगे गद्दों में मसनद के सहारे बैठता... मैंने देखा कि जिससे मिलने गया था वो भी सामने ज़मीन पर बैठा था और वहीँ ज़मीन में लगी एक टाइल को कुछ कपड़ों और खूबसूरत नक्काशीदार लकड़ी से घेर कर रखा हुआ था... अगरबत्तियां जल रहीं थीं.. और मैं यह सब देख कर परेशान हुआ... कि यह सब क्या "चोंचले" है?
मैं जो इम्प्रैशन ले कर गया था वो सब धूमिल हो रहा था. उम्र में वो काफी बड़ा था तकरीबन पचहत्तर साल का मगर यह सब देख कर नमस्ते सलाम करने का मन नहीं हुआ. मैंने उससे पूछा कि यह सब क्या है? उसने बताया कि उसका कोई गुरु था, वो मर गया तो उस गुरु की आत्मा ने उस टाइल्स में वास कर लिया है... इसलिए वो भी अब ज़मीन पर ही बैठते है जबसे गुरु मरने के बाद टाइल्स में आया. मैं मन ही मन परेशान हो गया... और सोचने लगा कि कभी भी किसी इंसान रुतबे, पैसे और पद से जज नहीं करना चाहिये... चूतिया कोई भी हो सकता है.
उसने मुझे पहले उस गुरु की फोटो दिखाई जो मर गया था... फिर कहता है कि अब टाइल्स में देखिये आपको गुरु जी की शक्ल नज़र आएगी... मैंने टाइल्स में देखा तो सिर्फ डिज़ाइन नज़र आया मगर उसे यही बोला कि हाँ! गुरु जी मुझे भी देख कर मुस्कुरा रहे हैं. वो इस बात पर खुश हुआ. अब मेरे से वहां बैठा नहीं जा रहा था कि जो आदमी उरु-गुरु के चक्कर में पडा हो इसका मतलब है कि वो साइकोलॉजीक्ली और मेंटली बीमार आदमी है और उसकी इस बीमारी को आसपास के लोगों ने आस्था का नाम दे रखा है. आत्मा-वात्मा-रूह-सोल जैसी कोई चीज़ है ही नहीं... इंसान मर गया सो मर गया... आत्मा के बारे में दुनिया की कोई भी यूनिवर्सिटी और मेडिकल इंस्टिट्यूट नहीं पढ़ाते और ना ही आत्मा का कहीं कोई डिपार्टमेंट है.
कमज़ोर इंसान गुरु पालता है. इस दुनिया में किसी भी इंसान के पास कोई भी दैवीय शक्ति नहीं है.. है तो वो चूतिया काट रहा है लोगों का. अगर किसी भी इंसान को किसी पत्थर, दीवार, पहाड़, ज़मीन आसमान, बादल, जानवर, या किसी भी ऑब्जेक्ट में अपने अपने धर्मों के अनुसार कोई भगवान्, पैगम्बर, ख़ुदा या गुरु नज़र आता है तो यह एक दिमागी बीमारी है जिसे Pareidolia कहते हैं. यह एक खतरनाक दिमागी बीमारी है जिसमें इंसान किसी भी अनदेखे ऑब्जेक्ट को ईश्वर मान लेता है... और उसे पूजने लगता है... दुनिया में धर्म को भी ऐसे ही बनाया गया है... धर्म एक सिस्टेमेटिक, डिसिप्लिनड, और पैटर्नड बीमारी है जो कि Pareidolia से ही रिलेटेड है.
स्पिरिचुअलटी नाम की भी कोई चीज़ एक्सिस्ट नहीं करती है... यह हर धर्म के एकॉर्डिंग उसे मानने वाले अपने अपने स्पिरिचुअल सिस्टम को डेवेलोप कर लेते हैं... नहीं तो ऐसा भी होता कि हिन्दू मुसलमानों के स्पिरिचुअल सिस्टम को मानते और मुसलमान हिन्दुओं के स्पिरिचुअल सिस्टम को मानते.. क्यूंकि स्पिरिचुअलिटी का तो कोई धर्म ही नहीं है... मानों तो सबका मानों... जबकि ऐसा है ही नहीं...
हर धर्मों के जितने भी कर्म काण्ड है वो सब एक दिमागी बीमारी Pareidolia और Apophenia से रिलेटेड हैं.. यह टोने-टोटके.. लकी चार्म, काला जादू, बंगाली बाबा, लॉकेट, भस्म, तावीज़,और हर धर्मों के तमाम टाइप के ईश्वरों की उलटी-सीधी कहानियाँ और उनसे रिलेटेड कांस्पीरेसी थ्योरी यह सब एक बीमारी Apophenia कहलाती हैं. एक्चुअल में जो चीज़ एक्सिस्ट ही नहीं करती उसे मानना और अपनाना एक बहुत ही बड़ी दिमागी बीमारी है और इसे Apophenia कहते हैं... और इस बीमारी को अब यूरोप समझ चुका है इसलिए वहां चर्च बंद हो रहे हैं या फिर रेस्टोरेंट्स में बदल रहे हैं.
बहुत से देश इस बीमारी से पीड़ित और ग्रसित हैं... और लोग भी इस बीमारी को आस्था और धर्म से जोड़ कर बाबाओं, मुल्लाओं, पादरियों, नकली साधुओं, और नशेडी टाइप के लोगों के चक्कर में फँस जा रहे हैं... एक बहुत बड़ी जनसंख्या आस्था के नाम पर बिमारियों में फँसी पड़ी है और कोई सुध लेने वाला नहीं है... शातिर लोग इस बीमारी का फायदा उठा कर अपने सुख सुविधा बढ़ा रहे हैं.
चलते-चलते बताता चलूँ कि धार्मिक इंसान एक सामाजिक आतंकवादी होता है... इनसे दूर रहें... यह समाज और देश में गंदगी फैलाते हैं.. और साइंटिफिक टेम्परामेंट से लोगों को दूर कर अपने जैसा बनाते हैं... और इन्हें किसी साइकेट्रिस्ट या साइकोलोजिस्ट को ज़रूर दिखाएँ.. यह बीमार लोग हैं... इन्हें इलाज की ज़रूरत है. लोगों को Apophenia और Pareidolia जैसी बीमारी से बचायें.
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1 टिप्पणी:
हर शाख़ पर उल्लू बैठा है।
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