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रविवार, 13 मई 2012

इस्राईल के विनाश के लिए शस्त्र उठाने की आवश्यकता नहीं है- अहमदीनेजाद


अमेरिकी साम्राज्यवाद के पिट्ठू देश इजराइल को समाप्त करने के लिये किसी युद्ध की आवश्यकता नहीं है. यह बात कहकर ईरानी राष्ट्रपति ने इजराइल व उसके आका अमेरिका की असली हालत बता दी है। यह बात सही है कि यदि तीसरी दुनिया के मुल्क अमेरिका व इजराइल से अपने आर्थिक सम्बन्ध समाप्त कर ले तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था स्वयं ही आत्मघाती दौर से गुजर रही है स्वत: नष्ट हो जाएगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी हिंदुस्तान यात्रा पर आई थी और उन्होंने भारतीय संघवाद के विपरीत आचरण प्रदर्शित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सीधे मुलाकात की और अमेरिकी एजेंडे को संसद में पास कराने के लिये विचार विमर्श किया। उस में मुख्य रूप से यह बात भी शामिल थी कि भारत ईरान से पेट्रोलियम पदार्थों को न ख़रीदे। भारतीय राजनेताओं नागरिकों राजदूतों की जिस तरह से बेइज्जती तलाशी के नाम पर अमेरिकी हवाई अड्डों पर होती है। उसका कोई भी जवाब भारत सरकार नहीं दे पाती है उलटे अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी ने भारतीय संघ की परवाह न करके सीधे बंगाल की मुख्यमंत्री से सम्बन्ध कायम करने की कशिश की है। यदि भारतीय संघ ने विरोध प्रदर्शित किया होता तो विदेश मंत्री हिलेरी की हिम्मत पस्त होती।
राष्ट्रपति डाक्टर महमूद अहमदी नेजाद ने कहा है कि इस्राईल के विनाश के लिए शस्त्र उठाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपनी प्रांतीय यात्रा के अंतर्गत शनिवार को पूर्वी प्रांत ख़ुरासान रज़वी के काश्मर नगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। डाक्टर अहमदी नेजाद ने कुछ क्षेत्रीय देशों द्वारा कुछ बाहरी शक्तियों से अरबों डालर के शस्त्र ख़रीदने की आलोचना करते हुए कहाः यदि इन शस्त्रों को ख़रीदने के पीछे उनका उद्देश्य ज़ायोनी शासन से लड़ना है तो उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि इस्राईल की तबाही के लिए युद्ध की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय देश ज़ायोनी शासन से संबंध विच्छेद कर थोड़ी सी त्योरी चढ़ा लें तो इस शासन का काम तमाम हो जाएगा। ईरानी राष्ट्रपति ने कुछ क्षेत्रीय शासकों की तेल की आय के साठ अरब डालर को, पश्चिम से शस्त्र ख़रीदने पर व्यय करने पर आलोचना की। ज्ञात रहे कि दिसंबर 2011 में अमरीका ने आधिकारिक घोषणा में कहा था कि उसने सऊदी अरब से तीस अरब डालर का शस्त्र समझौता किया है जिसके अंतर्गत वह इस दशेश को एफ़-15 युद्धक विमान सहित दूसरे युद्ध उपकरण मुहैया करेगा। ईरानी राष्ट्रपति ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के हाथों अफ़ग़ान जनता के जनसंहार की भी भर्त्सना की।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

भारत को युद्ध क्षेत्र मत बनाओ

प्रधानमंत्री आवास के पास इजराइली दूतावास की कार में विस्फोट के बाद इजराइल ने विस्फोट के पीछे ईरान का हाथ बताया है यह बात कहीं से समझ में आने वाली नहीं है ईरान और भारत के अच्छे सम्बन्ध है भारत अपने पेट्रोलियम पदार्थों की पूर्ती ईरान से लेकर करता है जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे पर आधारित हैं अमेरिकी इजराइली गठजोड़ काफी समय से ईरान के ऊपर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा रहा है और अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर भी दबाव डाल रहा है कि वह ईरान से अपने हितों को त्याग कर सम्बन्ध विच्छेद कर ले उसी कड़ी का एक षड्यंत्र कार बम विस्फोट भी हो सकता है भारत को इन देशों की हरकतों के ऊपर गंभीर रूप से नजर रखने की जरूरत है काफी दिनों से आर्थिक रूप से विश्व मानचित्र पर उभर रहे भारत को पिछाड़ने के लिये चाइना युद्ध की बात पश्चिमी मीडिया द्वारा व्यापक स्तर पर प्रचारित की जाती रही है हमारे देश को ऐसी घ्रणित चालों से होशियार रहने की जरूरत है
ईरान का कहना कि -
ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने सोमवार को नई दिल्ली और तिबलिसी में संदिग्ध आतंकवादी घटना में ईरान का हाथ होने की बात कही है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार नई दिल्ली में सोमवार को इस संदिग्ध आतंकवादी घटना में इस्राइली दूतावास की एक इनोवा कार के पीछे एक मैग्नेटिक बम चिपका कर धमाका किया गया जिसमें भारत में इस्राइली कूटनैतिक की पत्नी तथा कार चालक घायल हो गये।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रामीन मेहमान परस्त ने इस आरोप का खंडन करते हुए उल्लेख किया है कि इस्राइल इन घटनाओं में ईरान पर आरोप लगाकर अवैध अधिक्रत फ़िलिस्तीन में अपने अत्याचारों तथा इसी प्रकार ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या के संदर्भ में विश्व समुदाय का ध्यान भटकाना चाहता है।
इसी प्रकार ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि संभवतः ईरान की छवि ख़राब करने के उद्देश्य से इस्राइल ने इस संदिग्ध घटना का षडयंत्र रचा हो।
जासूसी संस्था मूसाद जिस शैली को ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में प्रयोग करती रही है उसी शैली का नई दिल्ली की आतंकवादी घटना में भी प्रयोग किया गया है।
कुछ दिन पहले ब्रिटेन की साप्ताहिक पत्रिका टेलीग्राफ़ ने ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में मूसाद की भूमिका के संदर्भ में विवरण देते हुए लिखा था कि एक गोपनीय बैठक में मूसाद के पूर्व प्रमुख ने आतंकी गुट केदून को ईरानी परमाणु वैज्ञानिको की हत्या के आदेश दिये थे।
ज़ायोनी शासन के एजेंट अब तक अनेक आतंकवादी घटनाएं अंजाम दे चुके हैं, सन् 1995 में मालटा द्वीप में फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के संस्थापक फ़तही शक़ाक़ी तथा संयुक्त अरब इमारात में फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोधक आंदोलन हमास के वरिष्ठ कमांडर की हत्या इस शासन द्वारा अंजाम दी गयी आतंकवादी घटनाओं के कुछ उदाहरण हैं।
निःसंदेह ज़ायोनी शासन कि जो स्वंय आतंकवाद की पैदावार है संदिग्ध आतंकवादी घटनाओ के बारे में निराधार दावे करके अपनी अत्याचारपूर्ण नीतियों पर पर्दा नहीं डाल सकता।

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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