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शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

मुसलमानों को शैतान की छवि में दिखाने लगते हैं

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने आईबीएन 7 से बातचीत करते हुए कहा कि जब कभी दिल्ली, बम्बई या बंगलुरु में बम विस्फोट होता है तो कुछ ही घंटो के अन्दर लगभग सभी चैनल एक खास तरह की न्यूज़ दिखाना शुरू कर देते हैं जैसे कि एक ईमेल या एसएमएस आया जिसमें इंडियन मुजाहिद्दीन ने जिम्मेदारी ली या जैश-ऐ-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली या फिर हरकत उल जेहाद या कोई मुस्लिम नाम ने जिम्मेदारी ली. यह किसी शरारती व्यक्ति की भी हरकत हो सकती है लेकिन इसे टी वी चैनल और उसके अगले दिन प्रिंट मीडिया में दिखाना, मीडिया एक स्थापित तरीके से यह कहना चाहती है कि सभी मुस्लिम आतंकी हैं या बम फेकने वाले हैं या शैतानी हैं। 
                 सभी धर्मो के  99% लोग शरीफ लोग हैं। मुझे लगता है कि यह मीडिया का जानबूझ कर उठाया गया कदम है जिससे लोग धर्म के आधार पर बँट जाएँ. यह बात राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है।
 बम विस्फोट के कुछ ही घंटो के अन्दर एसएमएस और ईमेल के आधार पर आप मुसलमानों को शैतान की छवि में दिखाने लगते हैं. इस बात का क्या मतलब है ?

नोट- यह YouTube के इस लिंक का अनुवाद है

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

भारत को युद्ध क्षेत्र मत बनाओ

प्रधानमंत्री आवास के पास इजराइली दूतावास की कार में विस्फोट के बाद इजराइल ने विस्फोट के पीछे ईरान का हाथ बताया है यह बात कहीं से समझ में आने वाली नहीं है ईरान और भारत के अच्छे सम्बन्ध है भारत अपने पेट्रोलियम पदार्थों की पूर्ती ईरान से लेकर करता है जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे पर आधारित हैं अमेरिकी इजराइली गठजोड़ काफी समय से ईरान के ऊपर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा रहा है और अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर भी दबाव डाल रहा है कि वह ईरान से अपने हितों को त्याग कर सम्बन्ध विच्छेद कर ले उसी कड़ी का एक षड्यंत्र कार बम विस्फोट भी हो सकता है भारत को इन देशों की हरकतों के ऊपर गंभीर रूप से नजर रखने की जरूरत है काफी दिनों से आर्थिक रूप से विश्व मानचित्र पर उभर रहे भारत को पिछाड़ने के लिये चाइना युद्ध की बात पश्चिमी मीडिया द्वारा व्यापक स्तर पर प्रचारित की जाती रही है हमारे देश को ऐसी घ्रणित चालों से होशियार रहने की जरूरत है
ईरान का कहना कि -
ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने सोमवार को नई दिल्ली और तिबलिसी में संदिग्ध आतंकवादी घटना में ईरान का हाथ होने की बात कही है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार नई दिल्ली में सोमवार को इस संदिग्ध आतंकवादी घटना में इस्राइली दूतावास की एक इनोवा कार के पीछे एक मैग्नेटिक बम चिपका कर धमाका किया गया जिसमें भारत में इस्राइली कूटनैतिक की पत्नी तथा कार चालक घायल हो गये।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रामीन मेहमान परस्त ने इस आरोप का खंडन करते हुए उल्लेख किया है कि इस्राइल इन घटनाओं में ईरान पर आरोप लगाकर अवैध अधिक्रत फ़िलिस्तीन में अपने अत्याचारों तथा इसी प्रकार ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या के संदर्भ में विश्व समुदाय का ध्यान भटकाना चाहता है।
इसी प्रकार ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि संभवतः ईरान की छवि ख़राब करने के उद्देश्य से इस्राइल ने इस संदिग्ध घटना का षडयंत्र रचा हो।
जासूसी संस्था मूसाद जिस शैली को ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में प्रयोग करती रही है उसी शैली का नई दिल्ली की आतंकवादी घटना में भी प्रयोग किया गया है।
कुछ दिन पहले ब्रिटेन की साप्ताहिक पत्रिका टेलीग्राफ़ ने ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या में मूसाद की भूमिका के संदर्भ में विवरण देते हुए लिखा था कि एक गोपनीय बैठक में मूसाद के पूर्व प्रमुख ने आतंकी गुट केदून को ईरानी परमाणु वैज्ञानिको की हत्या के आदेश दिये थे।
ज़ायोनी शासन के एजेंट अब तक अनेक आतंकवादी घटनाएं अंजाम दे चुके हैं, सन् 1995 में मालटा द्वीप में फ़िलिस्तीन के इस्लामी जेहाद आंदोलन के संस्थापक फ़तही शक़ाक़ी तथा संयुक्त अरब इमारात में फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोधक आंदोलन हमास के वरिष्ठ कमांडर की हत्या इस शासन द्वारा अंजाम दी गयी आतंकवादी घटनाओं के कुछ उदाहरण हैं।
निःसंदेह ज़ायोनी शासन कि जो स्वंय आतंकवाद की पैदावार है संदिग्ध आतंकवादी घटनाओ के बारे में निराधार दावे करके अपनी अत्याचारपूर्ण नीतियों पर पर्दा नहीं डाल सकता।

सुमन
लो क सं घ र्ष !
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