गिरीश पंकज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गिरीश पंकज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

यह सपना अधूरा है अब तक पूँजीवादी व्यवस्था का खात्मा चाहते थे कार्ल मार्क्स

कार्ल मार्क्स का नाम आते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि उभरती है, जिसने पूरी दुनिया को वैज्ञानिक समाजवाद का दर्शन दिया। 5 मई सन 1818 को कार्ल मार्क्स का जन्म जर्मनी के एक यहूदी परिवार में हुआ था। इनके परिवार ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था लेकिन जब कार्ल मार्क्स बड़े हुए तब उन्होंने ईसाई धर्म को त्याग कर नास्तिकता की राह अपनाई और पूरे जीवन भर अपने अर्थशास्त्रीय ज्ञान के आधार पर समाजवाद की स्थापना में लगे रहे। उनका आर्थिक-राजनैतिक चिंतन आज भी महत्वपूर्ण है और दुनिया भर के मजदूरों को एकजुट करने का उनका सपना पूरी मानवता के लिए महत्व रखता है। मार्क्स के जीवन को हम देखें, तो आश्चर्य होता है कि पूरी दुनिया में पूँजीवाद के खिलाफ संघर्ष करने वाले ऐसे दार्शनिक को घनघोर आर्थिक मुसीबतों का सामना करना पड़ा। 14 मार्च 1883 को लंदन में कार्ल मार्क्स का निधन हुआ।
    कार्ल मार्क्स ने ‘दास कैपिटल’ जैसी कालजयी कृति की रचना की। कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र भी कार्ल मार्क्स ने तैयार किया था। इस घोषणा पत्र को साम्यवादी घोषणा पत्र के रूप में याद किया जाता है, जिसमें पूँजीवादी विसंगतियों के बारे में बताते हुए सर्वहारा लोगों की सत्ता कैसे स्थापित हो, इस पर गंभीर विमर्श किया गया है। कार्ल मार्क्स ने यह घोषणा पत्र फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ तैयार किया था। 1848 में पहली बार यह घोषणा पत्र जर्मन भाषा में ही तैयार हुआ। बाद में तो दुनिया के अनेक देशों की भाषाओं में इसका अनुवाद भी हुआ। मार्क्स का चिंतन आज भी पूरी दुनिया में संघर्षशील बिरादरी को लगातार हौसला प्रदान करता है। समतावादी समाज की रचना की दिशा में मार्क्स का घोषणा पत्र काबिलेगौर है। दुर्भाग्य है कि ऐसे समय में जबकि साम्यवाद पूरी दुनिया का आधार बन सकता था, तब उसकी जगह पूँजीवादी व्यवस्था ने ले ली है। यही कारण है कि पूँजीवादी व्यवस्था ने संघर्षशील मनुष्य के दमन की परिपाटी शुरू कर दी है तथा वर्ग संघर्ष की स्थिति निरंतर बनी हुई है। गरीब और गरीब होता जा रहा है, पूँजीपति और अधिकतम सम्पन्न बनता जा रहा है। विषमता की खाई बढ़ रही है और समाज में विद्वेष भी फैलता जा रहा है। जिसके कारण हिंसा भी बढ़ी है। ऐसी विषम स्थिति के बीच जब हम कार्ल मार्क्स के चिंतन को देखते हैं तो समझ में आता है कि दुनिया को इसी रास्ते से आगे बढ़ना था, लेकिन हर महान सपना बहुत जल्दी तार-तार हो जाता है। वैज्ञानिक समाजवाद भी
धीरे-धीरे हाशिए पर चला गया।
    मार्क्स ने अपने घोषणा पत्र में यही चिंता व्यक्त की थी कि पूरी दुनिया में एक तरफ पूँजीवाद बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ सर्वहारा की समस्या भी बढ़ती जा रही है। दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति है। एक मालिक है और दूसरा श्रमिक है। श्रमिक जीवन भर श्रमिक ही बना रहता है। वह अपनी तरक्की नहीं कर पाता।  और दूसरी तरफ मालिक दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है। यही कारण है कि दोनों के बीच निरंतर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। कोई भी सत्ता जब बड़े पूँजीवादियों के हाथों में चली जाती है तो समाज के छोटे-छोटे लोग प्रभावित होते हैं। ये छोटे दुकानदार भी हो सकते हैं। कास्तकार हो सकते हैं। किसान हो सकते हैं, मजदूर हो सकते हैं। ये सब अंततः शोषित पीड़ित वर्ग में शरीक हो जाते हैं। मार्क्स मजदूर संगठनों पर विशेष जोर देते हैं और उनकी एकता के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं। इस घोषणा पत्र के बाद सर्वहारा वर्ग में वैश्विक स्तर पर एक चेतना आई और लोग अपने अधिकारों के लिए उठ खड़े हुए। यही कारण है कि 1871 मैं पेरिस में संघर्ष हुआ। 70 दिनों तक मजदूरों ने सत्ता पर अपना एकाधिकार जमाए रखा। तब मार्क्स ने एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता पर काबिज होकर ही हम अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकते। सत्ता में सुधार कैसे लाया जाए, इस दिशा में चिंतन करना चाहिए। मार्क्स के दर्शन से प्रभावित होकर रूस में 1917 में मजदूर आंदोलन ने क्रांति का रुप ले लिया और उसका साम्यवादी चेहरा उभर कर पूरी दुनिया के सामने आया, लेकिन कहीं-न-कहीं आंतरिक विफलताओं और सामंजस्य के अभाव के कारण साम्यवादी  स्वप्न तार-तार हो गया। ऐसा किसलिए हुआ, इस पर आज भी मिल-जुलकर के विचार करने की जरूरत है। समाज में पूँजीवादी व्यवस्था खत्म हो, यही मार्क्स के घोषणापत्र का पवित्र लक्ष्य था। लेकिन हम देख रहे हैं इस दिशा में बहुत संतोषजनक प्रगति नहीं हो रही है और अब तो पूरी दुनिया जैसे पूँजीवादी बाजार के खूनी पंजे में ही कैद होकर रह गई है। ऐसे समय में एक बार फिर नए सिरे से मार्क्स को पढ़ने, समझने और समझाने की जरूरत है।                

 -गिरीश पंकज
मोबाइल : 09425212720
लोकसंघर्ष पत्रिका अप्रैल 2018 विशेषांक में प्रकाशित

मंगलवार, 28 अगस्त 2012

प्रेम और सौहार्द्र का विकास भी होगा


दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्श्नेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात

दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्श्नेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात

आज से 75 साल पहले सन 1936 में लखनऊ शहर प्रगतिषील लेखक संघ के प्रथम अधिवेषन का गवाह बना था, जिसकी गूंज आज तक सुनाई पड़ रही है। उसी प्रकार आज जो लखनऊ में ब्लॉग लेखकों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है, इसकी गूंज भी आने वाले 75 सालों तक सुनाई पड़ेगी।

उपरोक्त विचार बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग, लखनऊ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रतिष्ठित कवि उद्भ्रांत ने व्यक्त किये। सकारात्मक लेखन को बढ़ावा देने के उद्देष्य से यह सम्मेलन तस्लीम एवं परिकल्पना समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में पूर्णिमा वर्मन (षारजाह) रवि रतलामी (भोपाल), षिखा वार्ष्णेय (लंदन), डॉ0 अरविंद मिश्र (वाराणसी), अविनाष वाचस्पति (दिल्ली), मनीष मिश्र (पुणे), इस्मत जैदी (गोवा), आदि ब्लॉगरों ने अपने उद्गार व्यक्त किये। कार्यक्रम को मुद्राराक्षस, शैलेन्द्र सागर, वीरेन्द्र यादव, राकेष, शकील सिद्दीकी, शहंषाह आलम, डॉ. सुभाष राय, डॉ. सुधाकर अदीब, विनय दास आदि वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी सम्बोधित किया।

मंचासीन डॉ सुभाष राय,सुश्री शिखा वार्ष्नेय,वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, डॉ अरविंद मिश्रा, गिरीश पंकज आदि

मंचासीन डॉ सुभाष राय,सुश्री शिखा वार्ष्नेय,वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, डॉ अरविंद मिश्रा, गिरीश पंकज आदि

वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंटरनेट एक ऐसी तकनीक है, जो व्यक्ति को अभिव्यक्ति का जबरदस्त साधन उपलब्ध कराती है, लोगों में सकारात्मक भावना का विकास करती है, दुनिया के कोने-कोने में बैठे लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराती है और सामाजिक समस्याओं और कुरीतियों के विरूद्ध जागरूक करने का जरिया भी बनती है। इसकी पहुँच और प्रभाव इतना जबरदस्त है कि यह दूरियों को पाट देता है, संवाद को सरल बना देता है और संचार के उत्कृष्ट साधन के रूप में उभर कर सामने आता है। लेकिन इसके साथ ही साथ जब यह अभिव्यक्ति के विस्फोट के रूप में सामने आती है, तो उसके कुछ नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलते हैं। ये परिणाम हमें दंगों और पलायन के रूप में झेलने पड़ते हैं। यही कारण है कि जब तक यह सकारात्मक रूप में उपयोग में लाया जाता है, तो समाज के लिए अलादीन के चिराग की तरह काम करता है, लेकिन जब यही अवसर नकारात्मक स्वरूप अख्तियार कर लेता है, तो समाज में विद्वेष और घृणा की भावना पनपने लगती है और नतजीतन सरकारें बंदिषें का हंटर सामने लेकर सामने आ जाती हैं। लेकिन यदि रचनाकार अथवा लेखक सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए इस इंटरनेट का उपयोग करे, तो कोई कारण नहीं कि उसके सामने किसी तरह का खतरा मंडराए। इससे समाज में प्रेम और सौहार्द्र का विकास भी होगा और देष तरक्की की सढ़ियाँ भी चढ़ सकेगा।

परिकल्पना ब्लॉग दशक सम्मान
दशक के ब्लॉगर: (१) पूर्णिमा वर्मन (२) समीर लाल समीर (३) रवि रतलामी(४) रश्मि प्रभा (५) अविनाश वाचस्पति
दशक के ब्लॉग: (१) उड़न तश्तरी: ब्लॉगर समीर लाल समीर (२) ब्लोग्स इन मिडिया: ब्लॉगर बी एस पावला (३) नारी: ब्लॉगर रचना (४) साई ब्लॉगः ब्लॉगर डॉ अरविंद मिश्र (५) साइंस ब्लोगर असोसिएशन: ब्लॉगर डॉ अरविंद मिश्र डॉ जाकिर अली रजनीश
दशक के ब्लॉगर दंपति:
कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव

तस्लीम परिकल्पना सम्मान-2011

मुकेश कुमार सिन्हा, देवघर, झारखंड ( वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि) , संतोष त्रिवेदी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश (वर्ष के उदीयमान ब्लॉगर), प्रेम जनमेजय, दिल्ली (वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार ),राजेश कुमारी, देहरादून, उत्तराखंड (वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका, यात्रा वृतांत ), नवीन प्रकाश,रायपुर, छतीसगढ़ (वर्ष के युवा तकनीकी ब्लॉगर),अनीता मन्ना,कल्याण (महाराष्ट्र) (वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग सेमिनार के आयोजक),डॉ. मनीष मिश्र, कल्याण (महाराष्ट्र) (वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग सेमिनार के आयोजक),सीमा सहगल(रीवा,मध्यप्रदेश) रू रश्मि प्रभा ( वर्ष की श्रेष्ठ टिप्पणीकार, महिला ), शाहनवाज,दिल्ली (वर्ष के चर्चित ब्लॉगर, पुरुष ), डॉ जय प्रकाश तिवारी (वर्ष के यशस्वी ब्लॉगर),नीरज जाट, दिल्ली (वर्ष के श्रेष्ठ लेखक, यात्रा वृतांत),गिरीश बिललोरे मुकुल,जबलपुर (मध्यप्रदेश) (वर्ष के श्रेष्ठ वायस ब्लॉगर), दर्शन लाल बवेजा,यमुना नगर (हरियाणा) (वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक),शिखा वार्ष्णेय, लंदन ( वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका, संस्मरण), इस्मत जैदी,पणजी (गोवा) (वर्ष का श्रेष्ठ गजलकार),राहुल सिंह, रायपुर, छतीसगढ़ (वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक),बाबूशा कोहली, लंदन (यूनाइटेड किंगडम) (वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री ), रंजना (रंजू) भाटिया,दिल्ली (वर्ष की चर्चित ब्लॉगर, महिला),सिद्धेश्वर सिंह, खटीमा (उत्तराखंड) (वर्ष के श्रेष्ठ अनुवादक), कैलाश चन्द्र शर्मा, दिल्ली (वर्ष के श्रेष्ठ वाल कथा लेखक ),धीरेंद्र सिंह भदौरोया (वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार, पुरुष),शैलेश भारतवासी, दिल्ली (वर्ष के तकनीकी ब्लॉगर),अरविंद श्रीवास्तव, मधेपुरा (बिहार) (वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग समीक्षक),अजय कुमार झा, दिल्ली (वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग खबरी),सुमित प्रताप सिंह, दिल्ली (वर्ष के श्रेष्ठ युवा व्यंग्यकार),रविन्द्र पुंज, यमुना नगर (हरियाणा) (वर्ष के नवोदित ब्लॉगर), अर्चना चाव जी, इंदोर (एम पी) (वर्ष की श्रेष्ठ वायस ब्लॉगर),पल्लवी सक्सेना,भोपाल (वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका, सकारात्मक पोस्ट) ,अपराजिता कल्याणी, पुणे (वर्ष की श्रेष्ठ युवा कवयित्री ) ,चंडी दत्त शुक्ल, जयपुर (वर्ष के श्रेष्ठ लेखक, कथा कहानी ),दिनेश कुमार माली,बलराजपुर (उड़ीसा) वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (संस्मरण ),डॉ रूप चंद शास्त्री मयंक (खटीमा) वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार, सुधा भार्गव,वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका, डॉ हरीश अरोड़ा, दिल्ली ( वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग समीक्षक ) आदि

तस्लीम परिकल्पना विशेष ब्लॉग प्रतिभा सम्मान-2011

कुँवर कुसुमेश, लखनऊ, प्रीत अरोड़ा, चंडीगढ़, सुनीता शानू, दिल्ली, कनिष्क कश्यप, दिल्ली, निर्मल गुप्त, मेरठ, मुकेश कुमार तिवारी, इंदोर,अल्का सैनी,चंडीगढ़,प्रवीण त्रिवेदी, फ़तहपुर आदि

वटवृक्ष का लोकार्पण : वायें से सुश्री शिखा वार्ष्नेय,डॉ अरविंद मिश्रा, डॉ सुभाष राय, श्री शैलेंद्र सागर,श्री उद्भ्रांत, श्री गिरीश पंकज,ज़ाकिर अली रजनीश,रणधीर सिंह सुमन व अन्य

वटवृक्ष का लोकार्पण : वायें से सुश्री शिखा वार्ष्नेय,डॉ अरविंद मिश्रा, डॉ सुभाष राय, श्री शैलेंद्र सागर,श्री उद्भ्रांत, श्री गिरीश पंकज,ज़ाकिर अली रजनीश,रणधीर सिंह सुमन व अन्य

इस अवसर पर देष के कोने-कोने से आए 200 से अधिक ब्लॉगर, लेखक, संस्कृतिकर्मी और विज्ञान संचारक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में तीन चर्चा सत्रों (न्यू मीडिया की भाषाई चुनौतियाँ, न्यू मीडिया के सामाजिक सरोकार, हिन्दी ब्लॉगिंगः दषा, दिषा एवं दृष्टि) में रचनाकारों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने ब्लॉगरों की सर्वसम्मति से सरकार से ब्लॉग अकादमी के गठन की मांग की, जिससे ब्लॉगरों को संरक्षण प्राप्त हो सके और वे समाज के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।

इस अवसर पर ‘वटवृक्ष‘ पत्रिका के ब्लॉगर दषक विषेषांक का लोकार्पण किया गया, जिसमें हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण ब्लॉगरों के योगदान को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही साथ कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ0 जाकिर अली रजनीष की पुस्तक ‘भारत के महान वैज्ञानिक‘ एवं अल्का सैनी के कहानी संग्रह ‘लाक्षागृह‘ तथा मनीष मिश्र द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंगः स्वरूप व्याप्ति और संभावनाएं‘ का भी लोकार्पण इस अवसर पर किया गया।

कार्यक्रम के दौरान ब्लॉग जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्णिमा वर्मन, रवि रतलामी, बी एस पावला, रचना, डॉ अरविंद मिश्र, समीर लाल समीर, कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को ‘परिकल्पना ब्लॉग दशक सम्मान‘ से विभूषित किया गया।

इसके साथ ही साथ अविनाश वाचस्पति को प्रब्लेस चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान, रश्मि प्रभा को शमशेर जन्मशती काव्य सम्मान, डॉ सुभाष राय को अज्ञेय जन्मशती पत्रकारिता सम्मान, अरविंद श्रीवास्तव को

“लखनऊ में स्थापित होगा डॉ राम मनोहर लोहिया ब्लॉगर पीठ, इस आशय का प्रस्ताव संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने सभा पटल पर रखा जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। साथ इस अवसर पर रवीन्द्र प्रभात ने ब्लॉगर कोश बनाने की बात कही ।”

केदारनाथ अग्रवाल जन्मशती साहित्य सम्मान, शहंशाह आलम को गोपाल सिंह नेपाली जन्मशती काव्य सम्मान, शिखा वार्ष्णेय को जानकी बल्लभ शास्त्री स्मृति साहित्य सम्मान, गिरीश पंकज को श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान, डॉ. जाकिर अली रजनीश को फैज अहमद फैज जन्मशती सम्मान तथा 51 अन्य ब्लॉगरों को ‘तस्लीम-परिकल्पना सम्मान‘ प्रदान किये गये।

Share |