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बुधवार, 12 सितंबर 2018

अरुण जेटली ने माल्या को भगाने में मदद की

किंगफ़िशर एयरलाइन्स के मालिक व प्रमुख शराब व्यवसायी विजय माल्या जब 7000 करोड़ रुपये देनदारी को छोड़कर विदेश जा रहा था तो विदेश जाने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस हवाई अड्डों को प्राप्त हो चुकी थी इसलिए विजय माल्या को विदेश जाने के लिए किसी दमदार नेता की जरूरत थी जो एरोड्रम पर उसकी गिरफ्तारी न होने दे. इस कार्य के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से विजय माल्या मिले और उसी के बाद वह समस्त देनदारियां छोड़ कर विदेश चले गये और उसके बाद सरकार अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए माल्या को इंग्लैंड से देश में लाने के लिए एक राजनीतिक ड्रामा करने लगी. 
             भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी  ने 12 जून को ट्वीट किया था, माल्या देश नहीं छोड़ सकता क्योंकि हवाई अड्डों पर उसके खिलाफ कड़ा लुक आउट नोटिस जारी हो चुका था. इसके बाद वो दिल्ली आया और उसने किसी प्रभावी शख्स से मुलाकात की जो विदेश जाने से रोकने वाले उस नोटिस को बदल सकता था. वो शख्स कौन है जिसने नोटिस को कमजोर किया?
            आज विजय माल्या द्वारा जब यह स्वीकार कर लिया गया कि देश छोड़ने से पहले उसने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी. इस तथ्य को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अभी तक देश से छिपाए रखा था.
         इस तरह के मामले में अगर किसी विपक्ष के नेता का नाम आया होता तो सीबीआई प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उस नेता की गिरफ्तारी कर लेती और न्यायलय में सीबीआई रिमांड का प्रार्थना पत्र देकर कम से कम तीन महीने का सीबीआई रिमांड  आदेश प्राप्त कर टोर्चेर करने का काम शुरू कर दिया होता. देश के अन्दर इस समय सीबीआई अमित शाह के तोते के रूप में जानी जाती है. 

रणधीर सिंह सुमन 

सोमवार, 7 मार्च 2016

काश ! यही इलाज मोहन भागवत का कर देते

अरुण जेटली ने कहा कि जब कन्हैया जेल से निकलकर आए, तो उन्हें तिरंगा दिखाकर भारत माता की जय बोलना पड़ा। यह टिप्पणी करते समय अरुण जेटली को यह याद नहीं रहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय पर तिरंगा झंडा नहीं फहराया जाता है और जब राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा तय हुआ था तो संघ ने जमकर विरोध किया था. भारतीय संविधान की प्रस्तावना से लेकर राष्ट्रीय ध्वज तक संघ और उसके संगठन नहीं मानते हैं. संविधान के अनुसार देश धर्मनिरपेक्ष है और संघ उसको हिन्दू राष्ट्र के रूप में बदल देना चाहता है. तिरंगे झंडे का कभी भी विरोध कम्युनिस्ट पार्टियों ने नहीं किया है. 1947 तक के संग्राम में जो भी कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थक या सदस्य था वह जेल गया था. उस समय संघ के गुरु गोलवलकर से लेकर आजादी के बाद तक संघ अंगेजों की ही वकालत में लगा रहा. पता नहीं क्या हो गया है कि इन नेताओं को सफ़ेद झूठ बोलते समय भी जरा सा भी लज्जा और एहसास नहीं होता है. महात्मा गाँधी से विचारों का विरोध तो हो सकता है लेकिन हत्या जैसे जघन्य अपराध को आप ही की विचारधारा को मानने वाले लोगों ने किया और आज भी गोडसे वाद का समर्थक संघ है. आजादी की लड़ाई में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ कम्युनिस्टों का महत्वपूर्ण योगदान है लेकिन धर्म के आधार के ऊपर देश विभाजन का सिद्धांत संघ का ही है. अब इतिहास के पन्नो को झुठलाने का काम सुनियोजित तरीके से संघ परिवार कर रहा है. उसी का एक हिस्सा अरुण जेटली का बयान है. कम्युनिस्ट किसी की चरित्र हत्या व झूठे लांछन लगाने का काम नहीं करते हैं. गाँधी और नेहरु की चरित्र हत्या का काम गोडसेवादी आज भी कर रहे हैं.
अगर कन्हैया को फर्जी मामले में जेल भेजने से राष्ट्रवाद पैदा हुआ है तो मोहन भागवत से लेकर उनके मानने वाले सभी लोगों को अरुण जेटली जी जेल की यात्रा करा दीजिये शायद उनके अन्दर देश भक्ति और राष्ट्र प्रेम जाग्रत हो जाए और वह भी इच्छा पूरी हो जाए की आजादी की लड़ाई में जेल नहीं जा पाए थे. अब वह हसरत पूरी हो जाए.
पूंजीपतियों की गुलाम सरकारों की वकालत आप कर सकते हैं, कम्युनिस्ट नहीं. इस देश के अन्दर रहने वाले लोगों का देश और उनकी जीवन पद्धतियों के अनुसार उनको रहने का अधिकार है. उनकी व्यवस्था में आपको कोई हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. आप सभी लोग अम्बानी, अडानी के मुनाफे को बढाने के लिए कार्य करते रहिये. मेनगे, बेरोजगारी, भूंख, शोषण, अत्याचार के सम्बन्ध में आप के पास कोई कार्य योजना नहीं है, इसीलिए आप सभी लोग देशभक्तों को देशद्रोही साबित करने का भरपूर प्रयास करते हैं जिससे अंग्रेजों की मुखबिरी करने जैसे मामलों से मुक्ति मिल सके लेकिन यह मुक्ति नहीं मिल सकती है. आज भी आपका चरित्र बदला नहीं है. आप कॉर्पोरेट सेक्टर से गुलाम हैं और गुलामी करके खुश रहिये. 

सुमन 
मथुरा। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रविवार को जवाहार लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद पर वामदलों पर हमला बोलते हुए उन्हें देश विरोधी करार दे डाला। उत्तर प्रदेश के मथुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए जेटली ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी महात्मा गांधी का विरोध करती थी और वे भारत को स्वायत्ता दिए जाने के खिलाफ थे।
उन्होंने आगे कहा कि जब भारत को स्वतंत्रता मिली तो सभी वाम दल लोकतंत्र के खिलाफ थे। वाम दल भारत के हिंसक बटवारे में विश्वास रखते हैं। देश के खिलाफ बोलने की परंपरा में ये दल विश्वास रखते हैं। देश में जब आपातकाल लगा था, तब वामदल ही थे जिन्होंने कांग्रेस का इस कदम पर समर्थन किया था।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर जेटली ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल जेएनयू विवाद पर गंदी राजनीति कर रहा है। इसी हफ्ते जेल से छूटने के बाद जेएनयू में कन्हैया कुमार के भाषण पर टिप्पणी करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि यह विचारधारा कि लड़ाई है जिसमें भाजपा की जीत हुई है।
उन्होंने कहा, जब कन्हैया जेल से निकलकर आए, तो उन्हें तिरंगा दिखाकर भारत माता की जय बोलना पड़ा। यह हमारी वैचारिक जीत थी। बीजेवाईएम के इस कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जेएनयू मुद्दे पर विपक्ष पर जमकर हमला बोला। शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला
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मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

भारत माँ को कर शर्मिंदा करते मोदी

"भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद मैं एक ऐसी कमेटी का गठन करुंगा, जो सभी राजनेताओं पर लगाए गए आरोपों की जांच करेगा और कोई भी भ्रष्टाचारी नेता हो, चाहे वह भाजपा का ही क्यों न हो, उसे निकाल बाहर करुंगा !"
यह शब्द नरेन्द्र दामोदर मोदी ने वेटिंग प्रधानमन्त्री ने कहे थे लेकिन सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के भ्रष्टाचार के मामले आने के बाद उनके बचाव में पार्टी संगठन के साथ-साथ प्रधानमन्त्री मोदी भी खड़े हुए नजर आये. भ्रष्टाचार के सवाल के ऊपर बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले आदर्श और नैतिकता की बात करने वाले हिंदुवत्व की गंगा बहाने दिल्ली में लगे हुए हैं. इनकी किसी भी बात का यकीन करना वास्तव में छलावा है.
 डीडीसीए के भ्रष्टाचार मामले पर बीजेपी जेटली के साथ खड़ी नजर आ रही है वहीँ, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है  कि जेटली उसी तरह बेदाग निकल आएंगे, जैसे हवाला कांड में आडवाणी आए थे। 
 इस पर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा हवाला कांड में आरोप लगने के बाद आडवाणी जी ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले की जेटली से तुलना कर क्या पीएम अपने वित्त मंत्री को ऐसा करने का हिंट दे रहे हैं ? सीताराम येचुरी की यह बात भी सही नहीं है. 
                    यूपीए की सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में मंत्रियों के इस्तीफे लेकर कानून को अपना काम करने देती थी लेकिन मोदी सरकार जो उच्च आदर्शों, नैतिकता व हिंदुवत्व की माला चौबीस घंटे जपा करती है वह किसी का इस्तीफा नहीं लेंगे. भ्रष्ट मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों के समर्थन में नागपुर मुख्यालय से लेकर पार्टी का पूरा संगठन उसके बचाव में लग जाता है और उस भ्रष्टाचारी के भ्रष्टाचार को सही साबित करने के लिए विभिन्न भाषाओँ के शब्दकोशों का इस्तेमाल शुरू हो जाता है जिससे उस व्यक्ति के भ्रष्टाचार के ऊपर पर्दा पड़ा रहे. 
हर समय नागपुरी मुख्यालय भारत माँ-भारत माँ की गुहार लगाता फिरता रहता है लेकिन धृतराष्ट्र की तरह मोदी के मंत्रिमंडल के सदस्यों व मुख्यमंत्रियों के भ्रष्टाचार नहीं दिखाई देते हैं. यही महिमा है नागपुर मुख्यालय की एक तरफ तो भारत माँ हैं दूसरी तरफ वह कफ़न घसोटों के साथ रहेगा. भारत माँ भ्रष्टाचार से आहत नहीं होती हैं ऐसा मानना है शायद नागपुर मुख्यालय का.

सुमन 
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