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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

गांधी प्रतिमा के समक्ष उपवास कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने योगी से मांगा इस्तीफा



भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आज 2अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपवास रखकर हाथरस,बुलंदशहर,बलरामपुर,आजमगढ़ में हुए बलात्कार सहित प्रदेश में व्याप्त जंगलराज के विरोध में सरकार के रवैए के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री योगी से इस्तीफे की मांग की गई।

 

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए राज्य परिषद सदस्य - रणधीर सिंह सुमन ने कहा योगी राज में प्रदेश बलात्कार और अपराध में देश में एक नंबर पर पहुंच गया है,जिलासचिव - का.बृजमोहन वर्मा ने कहा हाथरस में बलात्कार और हत्या के बाद वहां के जिलाधिकारी और एस पी ने बिल्कुल तानाशाही रवैया अपनाया इसके बाद भी अपने पद पर बने हुए हैं,ऐसे में एस आई टी का गठन बिल्कुल बेमानी है,निष्पक्ष जांच के लिए दोनों अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए,रिटायर्ड जजों की समिति बनाई जाए,अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कृषि कानून2020 को किसानों के गले का फंदा और जमीन छीनने का हथकंडा बताया,उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कहा योगी और मोदी जो कहते है काम उसके बिल्कुल उल्टा करते है,2करोड़ रोजगार देने का वादा कर रोजगार छीना, बेटी बचाओ नारा देकर बलात्कारियों को बचा रहे हैं,का.मुनेश्वर ने कहा मोदी जी कहते है 70साल में कांग्रेस ने कुछ नहीं किया जबकि जो सरकारी संपत्ति बेंच रहे हैं,वह पूर्व सरकार द्वारा ही बनाई गई है।इस अवसर पर सह सचिव डॉ कौसर हुसैन,अखिल भारतीय नौजवान सभा अध्यक्ष आशीष शुक्ला, महामंत्री नीरज वर्मा, अध्यक्ष आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन महेंद्र यादव,कोषाध्यक्ष अंकित यादव, सर्वेश यादव,प्रतीक शुक्ला,दीपक शर्मा,पवन पांडे,भूपेंद्र प्रताप सिंह, दिग्विजय सिंह,एड.श्याम सिंह,एड.अंकुल वर्मा,दीपक वर्मा,अमरसिंह,राम नरेश,मो.कासिफ आदि लोग उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017

एनकाउंटर के नाम पर हत्याएं

 उत्तर प्रदेश में बिगडती हुई कानून व्यवस्था को सभालने के नाम 'स्वच्छ यूपी अभियान' सरकार ने जारी किया है सीएम योगी के निर्देश के बाद इस साल 1 अप्रैल से 14 सितम्बर 2017 तक कुल 420 मुठभेड़ हुई। आईजी एलओ एचआर शर्मा ने बताया, अब तक 15 कुख्यात बदमाशों को पुलिस ने मार गिराया है।
उसी अभियान के तहत  नोएडा में मुठभेड़ के दौरान सुमित गुर्जर को मार गिराने के मामले में सुमित के परिजन पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगा रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव व डीजीपी को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।
3 अक्टूबर की रात ग्रेटर नोएडा में कथित मुठभेड़ के दौरान  सुमित गुर्जर को ग्रेटर नोएडा पुलिस ने मार गिराया गया था। सुमित समेत 7 बदमाशों पर 20 सितंबर की रात डकैती के दौरान 2 लोगों की हत्या व डकैती का आरोप था। वहीं बुधवार को सुमित के परिजनों ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए नोएडा में जाम लगाया था। इस मामले में गुरुवार को एनएचआरसी की तरफ से जारी किए प्रेस नोट में कहा गया है कि अगर पुलिस का एनकाउंटर जांच में फर्जी पाया गया तो यह मानव अधिकारों का उल्लंघन होगा।
नोएडा में  सुमित गुर्जर एनकाउंटर के बाद गांव चिरचिटा में माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। पुलिस से खफा परिजनों ने सुमित के शव का तीसरे दिन भी देर शाम तक अंतिम संस्कार नहीं किया। बृहस्पतिवार को भी विभिन्न दलों के नेता गांव पहुंचे।
 सपा नेता अतुल प्रधान और भाजपा नेता मुखिया गुर्जर समेत दूसरे नेताओं ने कहा कि सुमित के खिलाफ एक भी मुकदमा कायम नहीं है। नोएडा पुलिस ने उसे कुख्यात बदमाश बताकर उसका एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या कर दी।
  वैसे एनकाउंटरका खेल पुलिस पुराना खेल है जब कानून व्यवस्था भ्रष्टाचार के कारण चरमरा गई है तब जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह का खेल शुरू होता है सुमित गुर्जर के मामले में भी यही हुवा है  कि घर से पकड़ कर एनकाउंटर कर दिया गया है पुलिस के एक सी ओ जो  सेना कि सेवा के बाद बने थे और वह अपनी वीरता के किस्से जबरदस्ती सुनाते थे एक बार गोरखपुर में हाथी  पागल हो गया था तब उसको मारने के लिए सी ओ  साहब ने कई राउंड फायर किया और  हाथी भाग गया एक भी गोली उसको छुई नही थी 
अभी हाल में भारत सरकार के 30 सितंबर 2017 के राजपत्र में राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में  मध्य-प्रदेश में नियुक्ति आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी का पुलिस वीरता पदक रद्द करते हुए उसे जब्त करने के लिए कहा गया है. दरअसल सन् 2002 में झाबुआ जिले में मोस्ट-वॉंटेड अपराधी लोहार को मार गिराने पर भारत सरकार ने 15 मई 2004 को धर्मेंद चौधरी को वीरता पुरस्कार से नवाजा था. वही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच में इस मुठभेड़ का गलत बताया है.
हत्याओ का दौर जारी रहेगा- ईनाम, पुरुस्कार व प्रमोशन के लालच में घरो से पकड़ कर एनकाउंटर होते रहेगे . लूट ,हत्या ,डकैती ,बलात्कार बंद करना है तो योगी साहब पुलिस का भ्रष्टाचार बंद करना होगा
अभी हाल में एक आई जी स्तर के अधिकारी के मामले में जो लीपापोती कि गई है वह कानून व्यवस्था  कायम करने की ईच्छाशक्ति को प्रदर्शित  नही करता है
सुमन
लो क सं घ र्ष !

गुरुवार, 17 अगस्त 2017

पिछली सरकार को योगी सरकार ने बेहतर साबित कर दिया-हीरालाल यादव


माकपा नेताओ ने गाँधी भवन में धरना देकर जिला प्रशासन को सौपा 5 सूत्रीय ज्ञापन
गैर जनपदों से आये कार्यकर्ताओ ने जुलूस निकाल गिराये गये कार्यालय का किया निरीक्षण

बाराबंकी। योगी सरकार ने घोषणा की थी कि प्रदेश के गुण्ड़े उत्तर प्रदेश छोड़ दे! वरना जेलो मे होगे! वही माकपा दफ्तर योगी की पुलिस की मदद से भू-माफियाओ ने लूट-पाट कर दफ्तर को गिरा दिया। और मुख्यमंत्री को सूचना देने के बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई। यह विचार गांधी भवन मे धरना देते हुये मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य महासचिव हीरालाल यादव ने कहा कि पिछली सरकार को योगी सरकार ने बेहतर साबित कर दिया है। और इनके राज्य में विपक्षी दलो के कार्यालय भी सुरक्षित नही है। माकपा पूर्व विधायक दीनानाथ ने कहा कि माकपा का दफ्तर ट्रस्ट का दफ्तर है। जो ट्रस्ट ने पार्टी को दिया था। वही माकपा के प्रदेश कमेटी सदस्य प्रेमनाथ राय ने कहा कि अगर प्रशासन यह समझता है कि हम चुप रहेगे तो वह उसकी नसमझी है। धरना कारियो को भाकपा राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन, लखनऊ जिला सचिव प्रदीप शर्मा, अशोक तिवारी फैजाबाद मण्ड़ल, सत्यभान सिंह आदि ने सम्बोधित किया। धरना सभा के दौरान पार्टी नेताओ द्वारा जिलाधिकारी को सम्बोधित 5 सूत्रीय ज्ञापन पत्र नायब तहसीलदार को सौपा। ज्ञापन मे कहा गया है कि रुपेश सोनी तथा उसके साथियो के उपर जबरन अपहरण करने, अवैध रुप से कार्यालय भवन ढहाने, लूटपाट करने तथा धमकी देने की धाराओ मे मुकदमा कायम कर उन्हे गिरफ्तार किया जांए। पार्टी कार्यालय को उसके पूर्व रुप से बहाल कराया जाये। ट्रस्ट की जमीन व मकान की कथित खरीद ब्रिकी के साथ सम्पूर्ण प्रकरण की जांच कराई जांए। रुपेश सोनी के अवैध कारनामो मे पुलिस की मिली-भगत तथा पार्टी कार्यालय ढहाने, लूटपाट करने की खुली छूट देने की जांचकर सख्त कार्यवाही की जांये। रुपेश सोनी के साथ आये गुण्ड़ो को चिन्हित कर उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जांए। इसके पश्चात माकपा कार्यकर्ताओ ने जुलूस निकालकर धनोखर चौराहा पर गिराये गये माकपा कार्यालय का निरीक्षण किया। और वहा पर सभा आयोजित कर कार्यकर्ताओ को सम्बोधित किया। इस मौके पर रामेश्वर प्रसाद यादव, सतीश कुमार, राजेन्द्र बहादुर सिंह, गणेश सिंह अनूप, आदि नेता मौजूद रहे।

भूपिंदर पाल सिंह

रविवार, 19 मार्च 2017

वादे मोदी के -इरादे योगी के

उत्तर प्रदेश में 46 मंत्रियों के साथ उग्र हिंदुवत्व के नेता योगी अजय सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री पद का पदभार संभाल लिया है और आशा की जाती थी. अन्य मुद्दों के अलावा किसान के कर्ज माफ़ी की घोषणा की जाएगी किन्तु किसान कर्जे के सम्बन्ध में या अन्य वादों के सम्बन्ध में कोई भी बात नहीं की गयी है. वादे चुनाव में मोदी के थे और  मोदी प्रधानमंत्री हैं, उत्तर प्रदेश का चुनाव समाप्त हुआ और अब वह गुजरात सहित अन्य राज्यों की तैयारियां शुरू कर दी हैं. वादों से अब उनका कोई सम्बन्ध नही रह गया है. वहीँ, योगी साहब के इरादे भी सत्ता मिलते ही बदल गये हैं. अगर कोई दूसरा दल होता और अल्पसंख्यक समुदाय का सदस्य न जीत कर आता और कोई मंत्री उस समुदाय का बनाया जाता तो तुरंत नागपुर मुख्यालय और उसका प्रचारतंत्र मुस्लिम तुष्टिकरण का राग अलापना शुरू हो जाता लेकिन योगी साहब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही सबसे पहला काम मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत मोहसिन रजा को मंत्रिपद की शपथ दिलाना था. उग्र हिंदुवत्व फायरब्रांड नेता अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ आदित्यनाथ ने विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलन में कहा कि देश के हर मस्जिद में गौरी-गणेश की मूर्ति विराजमान कर देंगे जैसे उकसावेपूर्ण बयानबाजी के लिए जाने जाते थे अब वह सेक्युलर संविधान के तहत शपथ लेकर नया मुखौटा धारण कर लिया है. गुंडाराज बनाम मंगलराज का नारा देने वाले लोग उच्च आदर्शों और राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ अभियान चलाने वाले अब जब मुख्यमंत्री योगी साहब को चुना जिनके ऊपर कई अपराधिक मुक़दमे विचाराधीन हैं तब यह सब लोग पूर्व में कही गयी बातें भूल गये. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ऊपर हत्या सहित सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने समेत 11 अपराधिक मुक़दमे हैं.
        गुंडाराज को समाप्त करने का नारा अब सिर्फ जुमला रह गया है. मोदी के वादे सिर्फ कल्पना मात्र हैं वहीँ मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी साहब के इरादे ओस की बूंदों की तरह से गायब हो गये हैं. जब भी किसी दुसरे दल की सरकार बनेगी तब ये वादे और इरादे पुनर्जीवित होंगे. सिर्फ समाज को विघटन की दिशा में ले जाने के लिए ये वाडे और इरादे दिखाई देते हैं. संघ का एजेंडा बहुत धीमी रफ्तार से लागू करने की प्रक्रिया जारी रहेगी जिससे लोग उनके सम्बन्ध में सही बात न जान पाएं. 
  योगी ने सभी मंत्रियों को 15 दिन के अंदर संपत्ति का ब्योरा देने का निर्देश दिया है जैसी बाते कर रहे है जबकि सभी  विधायक चुनाव आयोग को अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे  चुके हैविकास का नारा दिया जा है  जनता की आय  विकास होगा या पूंजीपतियों का होगा बात साफ नही की जा रही है केंद्र सरकार कि नीतियों से जनता कि आय घटी है और  अदानी  ,अम्बानियो कि औय में लाखो गुना   बढ़ी है
      वर्तमान सरकार कॉर्पोरेट जगत के रुपयों से चुनी गयी है और जिस तरह से कॉर्पोरेट जगत के इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मडिया ने एक छाया जनता की भलाई का दिखाया है. जनता का भला नहीं होने जा रहा है हाँ अब कॉर्पोरेट सेक्टर की लूट बढ़ेगी बैंक सिर्फ जनता से पैसा जमा कराकर कॉर्पोरेट सेक्टर को देंगे और कॉर्पोरेट सेक्टर उन रुपयों को वापस नही करेगा. मजदूर, किसान, मेहनतकश जनता सिर्फ लुटेगी और लुटेगी इसके अतिरिक्त कोई उपलब्धि नही होगी. 
बेरोजगारी के सवाल पर सरकार का कोई नजरिया नहीं रहेगा जिससे नवजवानों को रोजगार नही मिलेंगे.कॉर्पोरेट सेक्टर की सेवक सरकार सिर्फ कॉर्पोरेट सेक्टर की ही सेवा करेगी. 

रणधीर सिंह सुमन 

सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

होइगा स्वतंत्र भारत हमार

होइगा स्वतंत्र भारत हमार
जैसेइ छाडि़नि अंग्रेज मुलुक, हथियाय लिहिन लीडरू मुलुक
उड़तै खन अंग्ररेजी, बहारु, भरिगा औरौ कूड़ा कबारु
वैसैइ रहिगा देहरी दुवारु हल्ला मचिगा हटिगा बोखारु
गल्ली गल्ली मचिगै पुकार, होइगा स्वतंत्र भारत हमार।।
ऊपर चिरई कौवा बोले, खाले बिरई बिरवा बोले
पुरवै तै बोले गिद्ध लुट्ठ, पछुवै ते बोले चपरचट्ट
बढि़-बढि़ बोले रागी भोगी, छिपि छिपि बोले त्यागी योगी
हिन्दू बोले अपनी बोली, मुस्लिम बोले अपनी बोली।
भारत बोला अपनी बोली, यूरोप बोला अपनी बोली।।
सब बोलि उठी जनता भोली, मेहरी निकरीं लै लै रोली
सब अपनी अपनी हमजोली, सब गावैं बरिखा मा होली
सब लीडर बोले खीस बाय, झंडा उठाय लेक्चर बंबाय
सबकी बोलिन कै यहै सार, होइगा स्वतंत्र भारत                                  
-गुरु प्रसाद सिंह ‘मृगेश’

बुधवार, 6 मार्च 2013

भगवा आतंकवाद के उद्गम स्थल की पुष्टि-3

संघ और भा0ज0पा0 ने षिंदे के इस वक्तव्य पर अपनी राजनैतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया। बहुत साफ तरीके से इसे हिन्दुओं का अपमान बता कर भावनात्मक शोषण और नफरत की राजनीति का शंखनाद हो गया। हालाँकि अगर उन्होंने स्वंय आतंकवाद को धर्म से जोड़कर मुसलमानों को कटघरे में खड़ा करने और उससे राजनैतिक लाभ उठाने की परम्परा कायम न की होती तो शायद आतंक के इस चेहरे के सामने आने के बाद भी इसे मात्र आतंकवाद ही कहा जाता। देष का सामाजिक ढाँचा भी और मजबूत होता और आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई भी। भा0ज0पा0 ने इतने ही पर बस नहीं किया उसने षिंदे के वक्तव्य पर हाफिज सईद की प्रतिक्रिया का भी भरपूर इस्तेमाल करने की कोषिष की। देष की अखंडता से जुड़े इस गम्भीर मुद्दे पर अपनी सांगठनिक वफादारी को कुर्बान कर देने के बजाए हाफिज सईद की बकवास के नाम पर आतंकवाद के इस दूसरे चेहरे को फिर से नकारने के प्रयास में लग गए। प्रचारित यह किया जाने लगा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का केस कमजोर हो गया। वास्तविक्ता तो यह है कि समझौता एक्सप्रेस धमाके के बाद लष्कर-ए-तैयबा और सिमी पर आरोप लगा कर इनकी संलिप्तता के जो सुबूत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दिए गए थे वह झूठे और गढ़े हुए थे। बाद की तफतीष के नतीजे में होने वाली गिरफ्तारियों से उन प्रमाणों का दूर का भी कोई सम्बन्ध साबित न होने की वजह से हमारी विष्वसनीयता को गहरा आघात लगा था। परन्तु भा0ज0पा0 को इससे कोई आघात नहीं पहुँचा। उसने यह सवाल उस समय नहीं उठाया कि इससे आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई को नुकसान पहुँचा है। समझौता विस्फोट के मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों की टिप्पणियों पर भी उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इस बार भी संघ या भा0ज0पा0 को आतंकवाद के खिलाफ देष के अभियान के कमजोर पड़ने की चिन्ता नहीं है। दरअसल बौखलाहट उस हकीकत से है जिसका उल्लेख षिंदे ने पहली बार नाम लेकर कर दिया।
    सवाल यह भी उठाया गया कि षिंदे ने यह बात 2014 के आम चुनाव के मद्दे नजर अल्पसंखयकों को लुभाने के लिए कही है परन्तु इससे सच्चाई तो नहीं बदल सकती। षिंदे के बयान और कांग्रेस सरकारों की आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों के साथ होने वाली ज्यादतियों के प्रति संवेदनहीन रवैयों को देखते हुए वक्तव्य के समय और कांग्रेस के दोगलेपन की आलोचना की जानी चाहिए। परन्तु इस बहाने से तथ्यों पर परदा डालने की कोई भी कोषिष निंदनीय है। सवाल यह भी है कि कांग्रेस सरकार के गृहमंत्री को अगर यह पता था कि धमाके करवा कर मुसलमानों को फँसाने का खेल खेला गया है तो उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि उनकी सरकार ने इस सिलसिले में कौन से कदम उठाए हैं? आतंकवाद के आरोप में गिरफतार आरोपियों में कांग्रेस शासित प्रदेषों में धर्म के आधार पर भेदभाव क्यों हो रहा है? जिन स्थानों पर तफतीष से यह साबित हो चुका है कि धमाकों में उन बेकसूरों का हाथ नहीं था जिन्हें पहले गिरफ्तार किया गया था तो अब तक उनके ऊपर से मुकदमें उठा कर उनके पुनर्वास के लिए कुछ क्यों नहीं किया गया? महाराष्ट्र और केन्द्र में सरकार में होने के बावजूद नान्देड़, परभनी, जालना और पूरना के धमाकों की जाँच करवा कर इंसाफ क्यों नहीं किया गया? मामला इंसाफ करने और दोषियों पर षिकंजा कसने का नहीं है। बात वोट बैंक की है। सपा ने बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने का वादा करके मुस्लिम वोट बैंक को अपने साथ लाने में सफलता पाई थी। कवायद बस इतनी है कि अखिलेष सरकार के वादा नहीं पूरा करने पर नाराज मुस्लिम मतदाता को अपनी ओर आकर्षित किया जाए। भा0ज0पा0 भी अपने उसी एजेन्डे पर है। आतंकवाद, मुसलमान, हाफिज सईद, पाकिस्तान किसी भी बहाने से ध्रुवीकरण हो और उसका लाभ उसे मिले, देष और समाज का उससे अहित होता है तो होता रहे।  
    षिंदे के वक्तव्य और संघ व भा0ज0पा0 की प्रतिक्रिया ने जो बहस छेड़ी है राष्ट्रीय स्तर पर इसकी आवष्यकता थी। इससे देष की सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनता में सकारात्मक समझ विकसित होने का अवसर मिलेगा।
-मसीहुद्दीन संजरी
     
  मोबाइल: 9455571488

सोमवार, 4 मार्च 2013

भगवा आतंकवाद के उद्गम स्थल की पुष्टि-2

दूसरी महत्वपूर्ण बात जो षिंदे ने कही वह है धमाके को अंजाम देकर अल्पसंख्यकों के सिर आरोप मढ़ने की। नया इसमें भी कुछ नहीं है। अब यह बात पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। मालेगाँव, अजमेर, हैदराबाद और समझौता एक्सप्रेस  धमाकों में इस साजिष का परदा फाष हो चुका है। जो कुछ बचा है वह सिर्फ इतना कि और कितनी आतंकी वारदातों में यह खेल खेला गया है। जमीनी वास्तविकता और निमेष आयोग की रिपोर्ट से उत्तर प्रदेष की कचहरियों में होने वाले सिलसिलेवार धमाकों में ऐसे ही षड्यंत्र की प्रबल आषंका बनती है। कचहरी धमाकोें के बाद प्रदेष के उच्च पुलिस अधिकारियों ने भी कहा था कि इन धमाकों और मक्का मस्जिद की वारदात में काफी समानताएँ हैं। कानपुर में बम बनाते समय होने वाले विस्फोट में विष्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के मारे जाने और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने से यह साबित भी हो गया था कि ऐसे तत्व प्रदेष में मौजूद हैं। फिर भी तत्कालीन मायावती सरकार ने साम्प्रदायिक शक्तियों से साँठ-गाँठ करके इतने बड़े मामले पर फाइनल रिपोर्ट लगवा कर दफन करवा दिया। यही खेल कांग्रेस शासित महाराष्ट्र के नान्देड़ में किया गया था। यदि साम्प्रदायिकता और मुसलमानों के प्रति पूर्वाग्रह अपनी भूमिका न अदा करता तो कोई कारण नहीं था कि नान्देड़ में बम बनाते समय संघ और उसके द्वारा संचालित अन्य संगठनों के सदस्यों के मारे जाने और घायल होने की घटना के बाद ही असली षड्यन्त्रकारियों के चेहरे से नकाब न उतर जाती। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 5,अपैल 2006 के नान्देड़ धमाके के जिम्मेदार अपने अंजाम को पहुँचे होते तो उसके बाद उसी वर्ष 8, सितंबर को मालेगाँव घटना और सन् 2007 में 19, फरवरी को समझौता एक्सप्रेस, 18, मई को मक्का मस्जिद और 11, अक्तूबर को अजमेर दरगाह की आतंकी वारदातों को होने से रोका जा सकता था। लेकिन उस समय नान्देड़ की घटना को पहले पटाखा धमाका बता कर बन्द करने का प्रयास किया गया बाद में जिंदा बम बरामद होने पर यह थ्योरी खारिज हो गई। परन्तु जिंदा बम के साथ आमतौर पर मुसलमानों के वेषभूषा की सामग्री कुर्ता पाजामा, टोपी, नकली दाढ़ी आदि का बरामद होना इस बात का साफ संकेत था कि
धमाके करने के साथ साथ मुसलमानों के सिर आरोप मढ़ने की योजना भी उनके षड्यंत्र का हिस्सा थी। इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि यह सब एक बडे़ षड्यंत्र का हिस्सा था और षड्यंत्रकारियों का संघ से अहम रिष्ता भी। इन तत्वों द्वारा अंजाम दी गईं वारदातें देष के जितने बड़े भूभाग में फैली हुई हैं और इतने बड़े धमाकों के लिए जिस ताने बाने की आवष्यक्ता होगी उससे तय है कि यह काम मात्र दस बारह लोगों का ही नहीं था जिन्हें अब तक आरोपी बनाया गया है और न ही इस षड्यंत्र को उन्हीं वारदातों तक सीमित समझा जा सकता है जो अब तक सामने आ चुकी हैं। कम से कम 2006 और 2007 में देष में होने वाले अन्य धमाकों की भी इस दृष्टिकोण से जाँच होनी चाहिए थी। परन्तु ऐसा होना तो बहुत दूर स्वयं नान्देड़ की घटना की जाँच पहले ए0टी0एस0 उसके बाद सी0बी0आई0 ने ठंडे बसते में डाल दिया। ऐसा भी अकारण नहीं हुआ है। यदि संघ परिवार के पास सांगठनिक ताकत और भा0ज0पा0 के रूप में राजनैतिक शक्ति न होती और कांग्रेस के पास इच्छा शक्ति का अभाव न होता तो इतने बड़े-बड़े मामलों को बहुत आसानी के साथ दफन नहीं किया जा सकता था। अब गृहमंत्री श्री षिंदे ने नान्देड़ की घटना के साथ जालना, पूरना और प्रभनी की मस्जिदों में होने वाले विस्फोटों की जाँच एन0आई0ए0 को सौंप दी है। इस जाँच का अंजाम क्या होगा यह तो कहना मुष्किल है लेकिन जब तक इन घटनाओं की पिछली जाँचों में राजनैतिक दखलअंदाजी और उन्हें बन्द कर दिए जाने के कारणों को जाँच में शामिल नहीं किया जाता इसे पूर्ण नहीं माना जा सकता। 
-मसीहुद्दीन संजरी

रविवार, 3 मार्च 2013

भगवा आतंकवाद के उद्गम स्थल की पुष्टि-1


       
          जयपुर चिन्तन शिविर के बाद आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के खुले अधिवेषन में गृहमंत्री सुशील  कुमार सिंदे  ने एक खुले रहस्य से परदा उठा दिया। एक ऐसा रहस्य जिससे देष पहले से वाकिफ था। एक ऐसा वक्तव्य जिससे एक वर्ग कांग्रेस के हृदय परिवर्तन से हैरान और उत्साहित हो गया। उसे लगा कि आतंकवाद के नाम पर उसके साथ जो अन्याय हो रहा था अब यह उसके अन्त का संकेत है। दूसरा वर्ग षिंदे के इस दुस्साहस पर आष्चर्यचकित, बौखलाया हुआ और आक्रोशित था। अपनी तीव्र प्रतिक्रिया से शायद वह देष को यह जताना चाहता था कि गृहमंत्री ने कोई नई और तथ्यहीन बात कह दी हो। भाजपा को सबसे अधिक आपत्ति हिन्दू आतंकवाद कहे जाने पर थी।  राजनाथ सिंह ने भाजपा अध्यक्ष चुने जाते ही देषव्यापी आन्दोलन का एलान कर दिया और साथ ही यह कहा कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की माफी से कम कुछ भी मंजूर नहीं। माफी न माँगने पर संसद को भी न चलने देने की धमकी भी दे डाली। षिंदे के आरोप और भाजपा की प्रतिक्रिया ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को दो तरफा चर्चा में लाकर खड़ा कर दिया। इस विषय पर बात करने से पहले यह जान लेना आवष्यक है कि षिंदे ने कहा क्या था?
    खुफिया एजेंसियों का हवाला देते हुए षिंदे ने कहा उनके पास ऐसी रिपोर्ट आई है जिससे साबित होता है कि भाजपा और संघ अपने कैम्पों में आतंकवाद की ट्रेनिंग दे रहे हैं। (अमर उजाला, पेज-13, 21 जनवरी, 2013)। हमारे पास ऐसी रिपोर्ट आई है कि संघ के लोगों ने कई बम लगाए हैं। (दैनिक जागरण, पेज-3, 21 जनवरी 2013)। ‘षिंदे ने कहा कि आर0एस0एस0 और बी0जे0पी0 के लोग बम प्लांट करते हैं ताकि इसका दोष अल्पसंख्यकों पर मढ़ा जा सके‘। (अमर उजाला, पेज-13, 21 जनवरी 2013)। उन्होंने कहा कि हमें भाजपा के विष फैलाने वाले प्रचार को रोकना होगा। (अमर उजाला, पेज-13, 21 जनवरी 2013)। ‘बी0जे0पी0 या आर0एस0एस0 के लोग, उनके ट्रेनिंग कैम्प हैं जो हिन्दू दहषतगर्दी को फरोग दे रहे हैं। इस पर हमारी गहरी नजर है। (इंकलाब उर्दू, पेज-1, 21 जनवरी 2013)। ‘बवाल मचने पर बाद में सफाई देते हुए षिंदे ने कहा कि उन्होंने हिंदू आतंकवाद नहीं भगवा आतंकवाद कहा था। (अमर उजाला, पेज-13, 21 जनवरी, 2013)। भाजपा ने ‘हिंदू आतंकवाद‘ कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। संघ प्रवक्ता राम माधव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना गलत है। सवाल यह है कि आतंकवाद को धर्म से जोड़ने की परम्परा का सृजन और जन-जन तक उसको पहुँचाने का काम भी तो भा0ज0पा0 और संघ के लोगों ने ही किया था। सर संघचालक से लेकर भजपा अध्यक्ष और इन संगठनों के तमाम पदाधिकारियों और नेताओं ने इस्लामी आतंकवाद कहने में कोई संकोच नहीं किया। इस्लामी आतंक, जेहादी आतंक, मुस्लिम आतंक, जेहादी साहित्य यह सब शब्दावलियाँ किसी और ने नहीं संघ और भा0ज0पा0 के लोगों ने ही प्रचारित की थीं। आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों की छवि को खराब करने का कोई भी अवसर कभी हाथ से नहीं जाने दिया। ऐसा वातावरण निर्मित हो गया कि आतंकवाद का मतलब ही मुस्लिम आतंकवाद हो कर रह गया था। ऐसे में आतंकवाद के इस देर से पहचाने गए चेहरे को जाहिर करने के लिए नए प्रतीक की जरूरत तो पड़नी ही थी। समय रहते यदि आतंकवाद को मात्र आतंकवाद समझने दिया गया होता तो उसके विरुद्ध अधिक प्रभावी तरीके से लड़ा जा सकता था। इतना ही नहीं आतंकवादी वारदातों में लिप्त आरोपियों के प्रति संघ परिवार और उस मानसिकता के लोगों ने साबित किया कि कोई डार्लिंग आतंकवादी है और कोई दुष्मन आतंकवादी, और इस भेदभाव का आधार भी धर्म ही था। एक पृष्ठभूमि के आरोपी की अदालत में पेषी के समय वकीलों द्वारा पिटाई का सामना और जेल में कैदियों के हमले का जोखिम तो दूसरे का फूलों से स्वागत और श्रद्वा भरी नजरों का नजराना। एक के लिए बार कौंसिलों द्वारा आतंकी का मुकदमा न लड़ने का फरमान और पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं पर हमले तो दूसरे के लिए अच्छे वकीलों का प्रबंध और मुकदमा लड़ने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन तथा आर्थिक सहायता की अपील। एक तरह के आरापियों का नाम आते ही फाँसी पर लटकाने की माँग और दूसरे की सिफारिष के लिए प्रधानमंत्री तक से मुलाकात तथा जाँच अधिकारियों पर भारी दबाव और
धमकियाँ। क्या इस आचरण से आतंकवाद के खिलाफ देष के अभियान को झटका नहीं लगा? आतंकवाद के नाम पर इन अनैतिक, गैरकानूनी एंव फिरकापरस्त कारगुजारियों का औचित्य ढूँढने वाले कौन लोग थे। निष्चित रूप से इसके पीछेे संघ और भा0ज0पा0 से जुड़े बडे़ नाम अवष्य मिल जाएँगे। आज यदि हिन्दू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद की संज्ञा दी गई है तो यह पूर्व में आतंकवाद को इस्लामी या जेहादी नाम से जोड़ने का दुष्परिणाम ही तो है।
    यह बात भी ढकी छुपी नहीं है कि संघ परिवार के कुछ संगठनों ने खुलेआम अपने कैम्पों में आधुनिक हथियारों को चलाने का सामूहिक प्रषिक्षण दिया है और उसकी तस्वीरें भी समाचार पत्रों में छप चुकी हैं। इसमें किसी अगर-मगर या किन्तु-परन्तु की कोई गुंजाइष नहीं है। रहा आतंकवाद के प्रषिक्षण का मामला तो संघ से जुड़े कई कार्यकर्ता बम बनाते और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते समय विस्फोट में मरे और घायल हो चुके हैं। यह भी सही है कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा की खुलेआम वकालत करते हैं। एस्थान, प्रतापगढ़ के दंगों के तुरंत बाद विष्व हिन्दू परिषद के प्रवीण तोगडि़या ने उस क्षेत्र से मुसलमानों को बल पूर्वक निकाल देने के लिए हिन्दुओं को ललकारा था। फैजाबाद में देवकाली मंदिर चोरी के मामले में योगी आदित्य नाथ ने मुसलमानों के खिलाफ जहर उगला और असम में मुसलमानों को कत्ल करने के लिए बोडो चरम पंथियों की जमकर तारीफ भी की। इस तरह फैजाबाद में उन दंगों की बुनियाद रखी जिसमें एक तरफा मुसलमानों के सैकड़ों दुकानें और मकान जला दिए गए। मध्य प्रदेष के जनपद ीरोंज के कस्बे दामोह में कहा ‘यदि हम इस देष के प्रधानमंत्री बन जाएँ तो सबसे पहले मुसलमानों से वोट का अधिकार छीन लेंगे। देष के किसी भी विधिक पद पर मुसलमानों को नहीं रहने देंगे‘। (अनुवाद उर्दू इनकलाब, 2, फरवरी, 2013 पेज-1)। ऐसे सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। परन्तु हमारा मीडिया धड़ल्ले के साथ इन संगठनों को समाज का सेवक बनाकर प्रस्तुत करता है और शासन प्रषासन की आँखें इनकी तरफ से बन्द होती हैं। परन्तु अकबरुद्दीन ओवैसी यदि ऐसा कोई बयान दे दें तो पुलिस प्रषासन स्वयं नोटिस लेकर मुकदमा दर्ज करता है और तुरंत कार्रवाई होती है। वह मीडिया जो तोगडि़या और योगी जैसे लोगों की देष भक्ति के अलावा कुछ नहीं लिखता अचानक बड़ी-बड़ी खबरें छापने लगता है। दरअसल मीडिया में कुछ सफेद पोष भी वही काम कर रहे हैं जो मिषन योगी और तोगडि़या का है। षिंदे के बयान के समर्थन में बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने हाफिज सईद को ‘साहब‘ कह दिया। बनारस से प्रकाषित होने वाले हिन्दी के एक समाचार ने 22, जनवरी को इस पूरे प्रकरण पर सम्पादकीय लिखा जिसमें कहा गया ‘आखिर षिंदे के बयान के बाद दिग्विजय सिंह का जमात उद दावा के प्रमुख और भारत में वांछित आतंकी हाफिज सईद के नाम का अदब से जिक्र करने का क्या मतलब है? यदि वाकई यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है तो षिंदे के इस बयान की अभी जरुरत भी नहीं थी‘। यह बात बिल्कुल सही है कि इस बयान को बहुत पहले आना चाहिए था और मात्र बयान ही नही कार्रवाई भी होनी चाहिए थी। परन्तु शायद सम्पादक की यह मंषा नहीं थी। उनके हिसाब से यह बयान आना ही नहीं चाहिए था। इतना ही नहीं इसमें ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है कि सरसरी तौर पर पाठक को ऐसा लगे कि भगवा आतंक पर बयान देने और हाफिज सईद का नाम अदब से लेने से भारतीय मुसलमान खुष होता है।   
-मसीहुद्दीन संजरी
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