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मंगलवार, 23 सितंबर 2014

हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों का'विदेशियों' से घृणा करो जिहाद-भाग.2


यह तथ्य कि 'लव जिहाद' शब्द काफी बाद में प्रचलन में आयाए इंगित करता है कि इस नामकरण के पीछे के उद्धेश्य पवित्र नहीं हैं। जिहाद शब्द को मीडिया ने लोकप्रियता दी है। सामान्य तौर पर सिमी, इंडियन मुजाहिदीन व ऐसे ही अन्य संगठनों द्वारा, कथित रूप से किए जाने वाले आतंकी हमलों को जिहाद कहा जाता है। किसी चतुर हिन्दुत्ववादी ने इस शब्द का इस्तेमाल, अंतर्धार्मिक विवाहों . विशेषकर मुस्लिम पुरूषों व हिन्दू महिलाओं के बीच . को कलंकित करने के लिए करना शुरू किया। कई इस्लामिक विद्वानों का मत है कि जिहाद का अर्थ है कोशिश या संघर्ष करना और यह संघर्ष अपने अहं, इच्छाओं, लालच और ईर्ष्या व भय जैसे नकारात्मक भावों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.ऐसे भावों को जो व्यक्ति को ईश्वर की राह से विमुख करते हैं। परंतु मध्यकालीन मुस्लिम शासकों और ऐसे राजनैतिक संगठनों, जो इस्लाम के नाम का दुरूपयोग करते हैं,के कारण जिहाद का अर्थ, गैर.मुसलमानों के खिलाफ युद्ध, जिनमें आतंकी हमले शामिल हैं, बन गया है। अंतर्धार्मिक विवाहों को कलंकित करने के लिए जिहाद शब्द का उपयोग, सबसे पहलेए कुछ वर्ष पूर्व केरल में किया गया था। सन् 2009 में इसका निर्यात पड़ोसी कर्नाटक में हुआ, जहां हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों ने मुस्लिम लड़कों व हिन्दू लड़कियों के बीच दोस्ती के विरूद्ध अभियान चलाया। पुलिस ने इन संगठनों के इस आरोप में कोई दम नहीं पाया कि मुस्लिम युवक, केवल उनका धर्मपरिवर्तन करवाने के उद्धेश्य से,हिन्दू लड़कियों से दोस्ती कर रहे हैं। पुलिस ने नवम्बर 2009 में इस मसले की जांच बंद कर दी। सन् 2012 में केरल पुलिस ने भी लव जिहाद की जांच की और यह पाया कि 'ऐसा कोई अभियान अस्तित्व में नहीं है'।
परंतु हिन्दू संगठन अपनी बात पर अड़े रहे। उनके अनुसार, सन् 2006 से लेकर अब तक, केरल में मुस्लिम लड़कों और हिन्दू लड़कियों के बीच 25 हजार विवाह हुए हैं। उनके इस आरोप की पुष्टि के लिए उनके पास कोई प्रमाण नहीं है परंतु वे इसे लगातार दुहराते जा रहे हैं। सन् 2001 की जनगणना के अनुसार, देश में एक हजार पुरूषों पर 931 महिलाएं थीं। उत्तरप्रदेश में लिंगानुपात और कम.898.था। परिवार बेटियां नहीं चाहते परंतु पुरूष, महिलाएं चाहते हैं और अपने समुदाय की महिलाओं को अपनी संपत्ति मानते हैं। जाहिर है कि इस तरह के दावों के कारण,समुदाय के पुरूषों को लगता है कि उनकी 'संपत्ति' तेजी से घट रही है और वे उस संपत्ति को लूटने वाले दुश्मन के खिलाफ लामबंद हो जाते हैं। यही कारण है कि'बहू.बेटी बचाओ महापंचायत'में एक लाख हथियारबंद लोग इकट्ठा हो गए थे। मुसलमानों में लिंगानुपात थोड़ा बेहतर.936.था। अगर मुस्लिम युवक लव जिहाद में जुट जाएंगे तो मुस्लिम नवयुवतियों का क्या होगा?जाहिर है,उन्हें हिन्दू पुरूषों से विवाह करना पड़ेगा और तब तो यह मैच ड्रा हो जाएगा।
उत्तरप्रदेश में हालिया उपचुनावों में भाजपा का अभियान इसी तरह के बेसिरपैर के आरोपों पर आधारित था। यद्यपि पार्टी ने अपने आधिकारिक वक्तव्यों और दस्तावेजों में कहीं भी लव जिहाद शब्द का प्रयोग नहीं किया परंतु भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ और उत्तरप्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने अपने भड़काऊ भाषणों में लव जिहादियों को जमकर कोसा। उमा भारती ने इस मुद्दे पर बहस की जरूरत बताई। शायद ये नेता जनता का ध्यान उन 'अच्छे दिनों' से हटाना चाहते हैं, जिनका कहीं अतापता नहीं है।
भाजपा को अपनी भलाई इसमें ही नजर आती है कि आम आदमी लगातार बांटने वाले मुद्दों को लेकर लड़ता.भिड़ता रहे। जहां एक ओर आम लोग धर्म, जाति आदि से जुड़े गैर.जरूरी व महत्वहीन मुद्दों में उलझे हुए हैं वहीं कारपोरेट जगत, अपना खजाना भरने में जुटा हुआ है। हाल में श्रम कानूनों में किए गए बदलावों पर देश में बहुत कम चर्चा हुई। इन बदलावों ने मजदूरों को संगठित करना बहुत कठिन बना दिया है। भू.अधिग्रहण कानूनों में ऐसे परिवर्तन किए जाने प्रस्तावित हैं जिनसे पूंजीपति उद्योगपतियों को मिट्टी के मोल जमीन मिल सकेगी।
उत्तरप्रदेश चुनाव
भाजपा को उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी थी। पार्टी को यह भान था कि अगर 16वीं लोकसभा के चुनाव के बाद उसे सत्ता में आना है तो उसे उत्तरप्रदेश में जबरदस्त प्रदर्शन करना होगा। बाबरी मस्जिद का मुद्दा मृतप्रायः था। ऐसे में, हिन्दू संगठनों को लगा कि युवाओं के बीच अंतर्धार्मिक संबंधों को लेकर तूफान खड़ा किया जा सकता है। इस अभियान का फोकस पश्चिमी उत्तरप्रदेश पर था जहां के विभिन्न समुदाय, महिलाओं के 'सम्मान' के प्रति अतिसंवेदनशील हैं और जहां खाप पंचायतों का बोलबाला है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जाटों और मुसलमानों के बीच मधुर संबंध थे। सन् 1857 के विद्रोह में मुसलमानों और जाटों ने कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था।  परंतु भाजपा और उसके साथी संगठनों ने अपने लव जिहाद अभियान के जरिए कुछ ही वर्षों में इन मधुर संबंधों को शत्रुता में बदल दिया और दोनों समुदायों को ध्रुवीकृत करने में सफलता हासिल कर ली। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले,भाजपा ने मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने के लिए अत्यंत आक्रामक अभियान चलाया। मुसलमानों के खिलाफ भावनाएं भड़काने में जो हथियार सबसे कारगर सिद्ध हुआ वह था मुस्लिम लड़कों और हिन्दू लड़कियों के बीच दोस्ती या मुस्लिम लड़कों द्वारा हिन्दू लड़कियों के साथ छेड़छाड़ को मुद्दा बनाना। तथ्य यह है कि सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लड़के, लड़कियों पर फब्तियां कसते हैं और उनके साथ छेड़छाड़ करते हैं।
मुजफ्फरनगर,उत्तरप्रदेश के सर्वाधिक विकसित और समृद्ध जिलों में से एक है। वहां के शक्कर, स्टील व कागज उद्योग के कारण, जिले का औद्योगिक विकासए राज्य के अन्य इलाकों की तुलना में बहुत तेजी से हुआ है। संपन्नता बढ़ने के साथ.साथ शिक्षा का प्रसार भी हुआ। जाहिर है कि शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न धर्मों व जातियों के लड़के.लड़कियों के बीच मेलजोल बढ़ा। इससे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं और नए विचारों के बीच टकराव अवश्यंभावी था। विभिन्न जातियों की खाप पंचायतों द्वारा युवाओं, विशेषकर लड़कियों, पर तरह.तरह के प्रतिबंध लगाने की कोशिशए इसी टकराव का नतीजा थी। ऐसे वातावरण में, लव जिहाद का मुद्दा उछाला गया और जाट समुदाय के बुजुर्ग वर्ग में इसकी सकारात्मक प्रतिक्रिया हुई। मुद्दे को महिलाओं के सम्मान से जोड़कर उसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अनवरत प्रचार के कारण मुस्लिम.विरोधी भावनाओं में तेजी से उबाल आया और अंततः, सितंबर 2013 में जाट.मुस्लिम दंगे भड़क उठे। इससे धार्मिक ध्रुवीकरण और बढ़ा। भाजपा को लोकसभा चुनाव में इस ध्रुवीकरण से जबरदस्त लाभ हुआ।
जाति, लिंग व हिन्दू संगठनों का लव जिहाद अभियान
हिन्दू संगठनों का लव जिहाद अभियान, मुसलमानों द्वारा हिन्दू लड़कियों के अपहरण,उनके साथ बलात्कार अथवा उनको बहलाने.फुसलाने के विरोध तक सीमित नहीं है। यहए दरअसल, दोनों समुदायों और विभिन्न जातियों के बीच खून के रिश्ते बनने का विरोध है। जाति व्यवस्थाए अंतर्जातीय विवाहों को इसलिए प्रतिबंधित करती है क्योंकि उनसे जन्म पर आधारित सामाजिक भेदभाव के किले के ढ़ह जाने की आशंका होती है।
यद्यपि सतही तौर पर ऐसा लग सकता है कि लव जिहाद अभियानए बुरी नजर रखने वाले 'शत्रु समुदाय' के विरूद्ध है। परंतु असल में, यह हिन्दू महिलाओं पर अधिक कड़ा नियंत्रण स्थापित करने का अभियान है। किसी लड़की को किससे शादी करनी चाहिए, इसका निर्णय उसकी जाति और परिवार करते हैं और इसमें दोनों परिवारों के गोत्र,उनकी आर्थिक हैसियत, दहेज देने की क्षमता आदि जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। खाप पंचायतें इन सामाजिक नियमों को लागू करती हैं और जो लोग इनका पालन नहीं करते, उनको घोर अनैतिक व हिंसक सजाएं दी जाती हैं, जिनमें यौन हिंसा और यहां तक किए संबंधित महिला की हत्या तक शामिल है। विडंबना यह है कि इन हत्याओं को 'आनर किलिंग' कहा जाता है। खाप पंचायतें महिलाओं के लिए लक्ष्मण रेखा का निर्धारण करती हैं।। उनका कहना है कि अविवाहित महिलाओं को मोबाईल फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और दिन ढ़लने के बाद केवल किसी पुरूष रिश्तेदार के साथ ही घर से बाहर निकलना चाहिए। खाप पंचायतें, लड़कियों के इंटरनेट इस्तेमाल करने पर भी प्रतिबंध लगाना चाहती हैं। वे यह भी तय करना चाहती हैं कि लड़कियां कैसे कपड़े पहनें और किन स्थानों पर जाएं या न जाएं। मुस्लिम समुदाय और उसकी खाप पंचायतें भी अपनी महिलाओं पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाती हैं।
हिन्दू संगठन, अंतर्धार्मिक प्रेम के विरूद्ध आक्रामक अभियान चलाते हैंए उनका अतिश्योक्तिपूर्ण विवरण पेश करते हैं और यह आरोप भी लगाते हैं कि हिन्दू लड़कियों से दोस्ती करने के पीछे मुस्लिम युवकों के विशिष्ट उद्धेश्य होते हैं।  परंतु असल में उनके निशाने पर महिलाओं की स्वतंत्रता है, विशेषकर उनके अपना जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता। वे तो लड़कों और लड़कियों के मेलमिलाप के भी खिलाफ हैं और उनकी दृष्टि में आदर्श पुत्र या पुत्री वह है जो आंख मूंदकर अपने माता.पिता की आज्ञा माने और उन्हें अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार दे। आश्चर्य नहीं कि प्रेम विवाह के खिलाफ इस अभियान को सभी समुदायों के अभिभावकों में भारी लोकप्रियता मिली। लव जिहाद अभियान की सफलता इस तथ्य से आंकी जा सकती है कि कालेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवा, जिनसे स्वाभाविकतः विद्रोही होने की उम्मीद की जाती है,भी अंतर्धार्मिक विवाहों के खिलाफ हो गए। हमारे संगठन सीएसएसएस ने हाल में एक नए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया। इन पंक्तियों के लेखक को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि युवा छात्र.छात्राओं में भी अंतर्धार्मिक विवाह के प्रति जबरदस्त प्रतिरोध है।
हिन्दू संगठनों के लव जिहाद अभियान का असली उद्धेश्य यह है कि हिन्दू महिलाएं, स्वमेव, पुरूषों द्वारा उन पर थोपे जा रहे प्रतिबंधों को स्वीकार कर लें और उन्हें अपना रक्षक मान लें। जबकि तथ्य यह है कि हिन्दू महिलाओं को हिन्दू पुरूषों से सुरक्षा की उतनी ही जरूरत है जितनी कि मुस्लिम महिलाओं को मुस्लिम पुरूषों से। कन्या भ्रूड हत्याए दहेज हत्याए परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों द्वारा बलात्कार व घरेलू हिंसा आदि आखिरकार पुरूषों द्वारा अपने ही समुदाय की महिलाओं के विरूद्ध किए जाने वाले अपराध हैं। महिलाओं को उस संपत्ति से वंचित करना,जो उत्तराधिकार में उन्हें मिलनी चाहिए भी ऐसा ही एक उदाहरण है। हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन कभी लैंगिक न्याय की बात नहीं करते और ना ही वे कभी महिलाओं को उनके परिवारों के पुरूषों से सुरक्षा दिलवाने के मसले पर कुछ बोलते हैं।
भारतीय प्रजातंत्र और अंतर्धार्मिक विवाह
    हिन्दू संगठन चाहते हैं कि हम यह स्वीकार कर लें कि युवाओं का एक.दूसरे के प्रति आकर्षित होना, उनके बीच मित्रता होना व उनके द्वारा अपने जीवनसाथी का स्वयं चुनाव करना शैतानी वृति है। क्या जिन सौ 'स्मार्ट सिटी' का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकास करना चाहते हैंए उनमें अलग.अलग लिंगों और धर्मों के लोगों को अलग.अलग रखा जाएगा?जब दो समुदायों के लोग एक साथ रहते हैं तो वे एक.दूसरे से मिलते.जुलते हैं और ऐसे में युवाओं का एक.दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाना स्वाभाविक और सामान्य है। विभिन्न धार्मिक समुदायों और अलग.अलग सांस्कृतिक परंपराओं के लोगों के आपसी संव्यवहार से वे स्वयं को और दूसरों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और एक.दूसरे से अच्छी बातें सीखते हैं। आपसी मेलजोल न सिर्फ सभी संस्कृतियों को समृद्ध बनाता है वरन वह सांस्कृतिक विविधता को भी जन्म देता है। शहरों में इस तरह के मेलजोल के लिए कई स्थान होते हैं जिनमें मोहल्ले, बाजार, शैक्षणिक संस्थाएं, मनोरंजन के स्थल,कार्यस्थल,सार्वजनिक परिवहन व नागरिक सुविधाएं हासिल करने के लिए एक साथ मिलकर किए जाने वाले संघर्ष शामिल हैं। जब तक ये स्थान रहेंगे तब तक विभिन्न समुदायों और लिंगों के लोगों को एक.दूसरे से पृथक रखना असंभव नहीं तो बहुत कठिन अवश्य होगा।
भारतीय संविधान अपने सभी नागरिकों को उनकी पसंद के धर्म में आस्था रखने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का हक देता है। कानून की हदों के भीतर रहते हुए हर व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में स्वयं निर्णय लेने का पूरा अधिकार और स्वतंत्रता है। ब्रिटिश राज से मुक्ति के बाद हमने एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लिया था जो प्रजातांत्रिक होगा, जिसमें सामाजिक न्याय होगा और जो विविधता और बहुवाद को सम्मान देगा। खाप और अन्य साम्प्रदायिक संगठनों की सोच के विरूद्ध, हमारा संविधान हर वयस्क को उसका जीवनसाथी चुनने का हक देता है। यही कारण है कि सन् 1954 में विशेष विवाह अधिनियम लागू किया गया। इसके अंतर्गत, विपरीत लिंग के कोई भी दो व्यक्ति, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या नस्ल के होंए बिना किसी धार्मिक या पारंपरिक रीतिरिवाज के, एक.दूसरे से विवाह कर सकते हैं। उन्हें केवल यह शपथ लेनी होती है कि वे एक.दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करते हैं। इस विवाह के लिए केवल एक माह के नोटिस और तीन गवाहों की आवश्यकता होती है। जाहिर है कि विवाह की प्रक्रिया का यह सरलीकरण,अंतर्धामिक व अंतर्जातीय विवाहों को प्रोत्साहित करने के लिए ही किया गया था।
हिन्दू राष्ट्रवादियों व अन्य धर्मों के साम्प्रदायिक व जातिवादी श्रेष्ठि वर्ग की इच्छा यह है कि लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगा,जाएं और ऐसे संगठनोंए संस्थाओं व प्रक्रियाओं की स्थापना की जाए जिनसे युवाओं पर उनका समुदाय व परिवार अपनी इच्छाएं थोप सके। गुजरात मॉडल में राजस्व अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे यह निर्णय करें कि किसी के लिए उसकी पसंद का व्यक्ति उपयुक्त जीवनसाथी होगा या नहीं। जब तक हम वयस्कों को उनके जीवन के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार नहीं देंगे तब तक भारत एक मजबूत प्रजातंत्र नहीं बन सकेगा।
इस उद्धेश्य की पूर्ति के लिए हमें सबसे पहले ऐसी शैक्षणिक संस्थाओं की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों में आलोचनात्मक दृष्टि का विकास करें। लोगों को शिक्षित और जागरूक बनाने का काम केवल शैक्षणिक संस्थाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि यह हर उस क्षेत्र में होना चाहिए जहां सामंती शक्तियां,धार्मिक और जातिगत पहचान को मजबूती देने की कोशिश कर रही हैं। हमें युवाओं से यह पूछना ही होगा कि वे क्या चाहते हैं। तभी हम सच्चे प्रजातंत्र की स्थापना की ओर बढ़ सकेंगे और समाज के दबे.कुचले वर्ग को स्वर दे सकेंगे। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि आज का महत्वाकांक्षी युवावर्ग किसी को यह इजाजत नहीं देगा कि वह उस पर हुक्म चलाए।
-इरफान इंजीनियर

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

बांटने वाली राजनीति के दो हथियार :नफरत फैलाने वाली भाषा और पितृसत्तात्मक मूल्य

पिछले आम चुनाव में विजय हासिल करने के बाद से भाजपा का चुनावी मुकाबलों में प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। आम चुनाव के बाद हुये उपचुनावों में पार्टी को करारी मात खानी पड़ी है। बिहार में भाजपा को परास्त करने में लालू.नीतीश मॉडल काम आया। उत्तरप्रदेश में उपचुनाव में क्या इस मॉडल को राज्य की राजनैतिक पार्टियां अपना सकीं हैंए यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है। भाजपा ने उत्तरप्रदेश में चुनावी विजय हासिल करने के लिए अपने पुराने हथियार.विभाजनकारी राजनीति.का जमकर इस्तेमाल किया। योगी आदित्यनाथ जहर उगलते पूरे प्रदेश में घूमे। इसके साथ हीए 'लव जिहाद' के नाम पर ढ़ेर सारी अफवाहें और झूठ फैलाये गये।
भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के इस सीजन की शुरूआत, लोकसभा में योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण से हुई। उन्होंने अपने भाषण में सांप्रदायिक दंगों के लिए मुसलमानों और केवल मुसलमानों को दोषी ठहराया। आगे भी वे इसी तर्ज पर बातें करते रहे। उन्होंने इस आशय के निराधार आरोप लगाये कि जिस इलाके में मुसलमानों की आबादी जितनी ज्यादा होती है वहां उतना ही तनाव और हिंसा होती है। उन्होंने कहा कि मुसलमान, हिंसा की शुरूआत करते हैं और बाद में इसका फल भी भोगते हैं। भारत में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की व्यापक जांचें और विश्लेषण हुये हैं और इनके नतीजे, योगी आदित्यनाथ के आरोपों को झुठलाते हैं। लव जिहाद की तरफ इशारा करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि अगर 'वे एक हिंदू लड़की को मुसलमान बनायेंगे तो हम सौ मुस्लिम लड़कियों को हिंदू बनायेंगे।' योगी आदित्यनाथ लगातार नफरत फैलाने वाली बातें कह रहे हैं और यह तब, जबकि प्रधानमंत्री ने यह कहा है कि देश में हिंसा पर 10 साल तक पूर्ण रोक लगनी चाहिए।
आरएसएस.भाजपा गठबंधन को मानो लव जिहाद के नाम पर सोने की खान हाथ लग गई है। लव जिहाद को मुद्दा बनाने से उन्हें दोहरा लाभ हुआ है। जब वे यह कहते हैं कि मुस्लिम लड़कों को हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है तो एक ओर वे मुसलमानों का दानवीकरण करते हैं तो दूसरी ओर महिलाओं और लड़कियों के जीवन पर उनका नियंत्रण और कड़ा होता है। इस प्रचार में यह निहित है कि हिंदू महिलाओं को आसानी से बहलाया.फुसलाया जा सकता है और वे अपनी जिंदगी के बारे में सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं। इस तरह,सांप्रदायिक राजनीति के एजेण्डे के दो लक्ष्य एक साथ पूरे होते हैं। सांप्रदायिक राजनीतिए धार्मिक अल्पसंख्यकों को समाज के हाशिये पर पटकना चाहती है और साथ में समाज में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रताओं पर रोक लगाना भी उसके एजेण्डे में रहता है।
भाजपा और उसके साथी लव जिहाद का न सिर्फ भाषणों और वक्तव्यों के जरिये विरोध कर रहे हैं वरन् उन्होंने लव जिहाद का 'मुकाबला' करने के लिए मोर्चे बनाने भी शुरू कर दिये हैं। ऐसा ही एक मोर्चा मेरठ में गठित किया गया है और अन्य शहरों में भी इस तरह के संगठन बनाये जाने की चर्चा है। विहिप ने इस मुद्दे पर मोर्चा संभाल लिया है। विहिप का कहना है कि 'लव जिहाद के विरूद्ध हमारी लड़ाई का देशभक्त समर्थन करेंगे क्योंकि यह देश को एक दूसरे विभाजन की ओर ले जा रहा है।'संघ परिवार से जुड़ा एक अन्य संगठन धर्म जागरण मंच अचानक सक्रिय हो गया है और उसने एक अभियान चलाकर हिंदुओं से लव जिहाद के'खतरे' से लड़ने की अपील की है।
जहां तक लव जिहाद के जरिये हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने के आरोप का संबंध है इसमें कोई दम नहीं है। मेरे एक मित्र, जो उत्तरप्रदेश में रहते हैंए ने बताया कि वे वहां लड़कियों के एक कालेज में किसी विषय पर भाषण देने गये थे। वहां पर उन्हें कालेज के एक युवा शिक्षक ने.जो हिंदू लड़कियों की रक्षा के लिए कटिबद्ध थे.बताया कि उनके इलाके में 6,000 से अधिक लड़कियां मुसलमान बन गई हैं। परंतु जब उनसे यह कहा गया कि वे उनमें से कम से कम 60 के नाम दे दें तो वे पीछे हट गये। उन्होंने कहा कि ये बात उनने सुनी थीं और इसलिए सच होंगी!
लव जिहाद के षड़यंत्र के संबंध में 15 रूपये कीमत की एक पुस्तिका भी जगह.जगह दिखलाई दे रही है। इस पुस्तिका का शीर्षक है 'हमारी महिलाओं को लव जिहाद के आतंकवाद से कैसे बचायें?'इसमें लव जिहाद के कुछ तथाकथित मामलों का वर्णन किया गया है। सभी विवरण लगभग एक से हैं। कोई मुस्लिम पुरूष स्वयं को हिंदू बताकर किसी हिंदू लड़की से प्रेम संबंध स्थापित कर लेता है। पुस्तिका में यह दावा किया गया है कि शादी हो जाने के बादए लड़कियों पर इस्लाम कुबूल करने का दबाव डाला जाता है। ऐसी लड़कियों को 'मुक्त' कराये जाने की जरूरत है।
लव जिहाद के मुद्दे पर कई बातें कही जा रही हैं परंतु इनमे से दो महत्वपूर्ण हैं। कई विश्लेषकों ने मोदी की राजनीति की तुलना हिटलर की राजनीति से की है। हिटलर ने भी जर्मनी के नागरिकों को यहूदियों का शत्रु बनाने के लिए इसी तरह की रणनीति का इस्तेमाल किया था। यहूदियों को 'आतंरिक शत्रु' बताया जाता था। हिटलर की प्रचार मशीनरी यह कहती थी कि युवा यहूदी पुरूष, जर्मन लड़कियों को बहला.फुसलाकर आर्य नस्ल की शुद्धता को प्रदूषित कर रहे हैं और उनका उद्देश्य जर्मन राष्ट्र को गुलाम बनाना है।
भारत में आर्यसमाज और हिंदू महासभा ने सन् 1920 के दशक में इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। उस समय भी इन संस्थाओं ने हिंदू महिलाओं के सम्मान को बचाने का आह्वान करते हुए पर्चे निकाले थे जिनमें से एक का शीर्षक था 'हिन्दू औरतों की लूट'। इस दुष्प्रचार का इस्तेमाल समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करने के लिए किया गया था।
क्या इस दुष्प्रचार का मुकाबला करने का कोई तरीका है? एक खबर यह है कि लव जिहाद के धुआंधार प्रचार में घिरे कुछ इलाकों के मुस्लिम युवकों ने सद्भाव का वातावरण निर्मित करने के लिए शांतिमार्च निकालने का निर्णय किया है। हमें उम्मीद है कि ऐसे ढे़र सारे मार्च निकाले जायेंगे और हमारे समाज को उस पागलपन से बचाया जायेगा जिस ओर उसे ढकेला जा रहा है।
-राम पुनियानी

सोमवार, 25 अगस्त 2014

क्या प्रेम को धर्म की सीमाओं में बांधा जा सकता है ?

सारे विश्व में,संबंधित समुदाय के 'सम्मान' को, उस समुदाय की महिलाओं के शरीर से जोड़कर, संकीर्ण व सांप्रदायिक ताकतें,हिंसा और तनाव फैलाती आईं हैं। यह सांप्रदायिक राजनीति में निहित पितृसत्तात्मक मूल्यों का प्रकटीकरण है। हमें यह याद है कि किस प्रकार अलग.अलग समुदायों के दो युवकों के वाहनों की टक्कर को 'हमारी लड़की' की इज्जत को 'दूसरों' द्वारा लूटने का स्वरूप दे दिया गया था। पंचायतें हुईं, जिनमें खुलेआम घातक हथियार लहराये गए और मुजफ्फरनगर को हिंसा के दावानल में ढकेल दिया गया। और यहए 'हमारी महिलाएं बनाम उनकी महिलाएं' मानसिकता और उसके दुरूपयोग का अंत नहीं था। आज भी उत्तरप्रदेश में कई ऐसी गतिविधियां जारी हैंए जिनका उद्देश्य समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करना है।
एक मदरसा शिक्षिका ने आरोप लगाया कि उसे कुछ मुस्लिम युवकों ने अगवा किया और उसके साथ बलात्कार किया। वह अपने बयान बार.बार बदलती रही और अंत में उसने स्वीकार कर लिया कि वह अपने प्रेमी के साथ भागी थी। इस रक्षाबंधन ;अगस्त 2014 पर पश्चिमी उत्तरप्रदेश में आरएसएस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में लोगों की कलाईयों पर राखी बांधी और उनसे कहा कि उन्हें मुसलमान लड़कों द्वारा 'लव जिहाद' के लिए हिन्दू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाने की कोशिशों के प्रति सावधान रहना चाहिए। मुसलमान युवकों द्वारा हिन्दू लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और उन्हें फंसाने के प्रयास, इन दिनों पश्चिमी उत्तरप्रदेश में, आरएसएस के प्रचार का मुख्य मसाला बन गए हैं। जहां प्रधानमंत्री, लालकिले की प्राचीर से, सांप्रदायिकता व जातिवाद पर दस साल के लिए रोक लगाने की बात कर रहे हैं वहीं उनकी ही पार्टी के चंद्रमोहन, जो कि उत्तरप्रदेश में भाजपा प्रवक्ता हैं, फरमाते हैं कि'मदरसा शिक्षिका के साथ जो कुछ हुआ वह'वैश्विक लव जिहाद' का हिस्सा है,जिसके निशाने पर भोलीभाली हिंदू नवयुवतियां हैं।'भाजपा के पितृसंगठन आरएसएस की शाखाओं के बाद, उसके स्वयंसेवक घर.घर जाकर लोगों को 'लव जिहाद के खतरे' के प्रति आगाह करते हैं और'हमारी लड़कियों' की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। मुजफ्फरनगर हिंसा पर'अनहद' की रपट 'ईविल स्टाक्स द लैण्ड'  इस झूठ का पर्दाफाश करती है कि 'मुसलमान युवक, हिंदू लड़कियों से इसलिए बात करते हैं ताकि वे उन्हें बहला.फुसला कर उनके साथ शादी कर लें और बाद में उन्हें मुसलमान बना लें।' यही वह मुद्दा है जिसका इस्तेमाल दंगे भड़काने के लिए किया गया था। पश्चिमी उत्तरप्रदेश के सहारानपुर में इन दिनों एक बाबा रजकदास बड़ी चर्चा में हैं। वे उन हिंदू लड़कियों का 'इलाज' करते हैं जो मुस्लिम लड़कों से प्रेम करती हैं!
हिंदुओं को हिंसा करने के लिए भड़काने हेतु जिस 'लव जिहाद' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका अजीबोगरीब इतिहास है। इस शब्द के दो हिस्से हैं.लव और जिहाद। और जिसने भी इस शब्द को गढ़ाए उसे शायद यह नहीं मालूम था कि इन दोनों शब्दों के नितान्त विपरीत अर्थ हैं। 9-11-2001 के बाद से जिहाद शब्द का इस्तेमालए मीडिया द्वारा नकारात्मक अर्थ में किया जाता रहा है और यह नकारात्मक अर्थ, धीरे.धीरे सामूहिक सामाजिक सोच का हिस्सा बन गया है। कुरान के अनुसार जिहाद का अर्थ है कोशिश या प्रयास करना। परंतु मीडिया में उसे गैर.मुसलमानों को मारने के अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है। लव जिहाद शब्द किसी शैतानी दिमाग की उपज है और इसका इस्तेमाल मुसलमानों के दानवीकरण के लिए किया जा रहा है। ऐसा प्रचार किया जा रहा है कि कुछ मुस्लिम संगठन, मुसलमान युवकों को इसलिए धन उपलब्ध करवाते हैं ताकि वे गैर.मुस्लिम लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसायें और उनसे शादी कर मुसलमानों की आबादी में बढ़ोत्तरी करें। यह अफवाह भी फैलाई जा रही है कि मुसलमान युवकों को धन इसलिये दिया जाता है ताकि वे नईए चमकीली मोटरसाइकिलें और महंगें मोबाइल सेट खरीद सकें।
अगर गूगल पर आप यह टाईप करें कि ष्ष्वाय हिन्दू गर्ल्सष्ष् ;क्यों हिंदू लड़कियांद्ध तो सर्च इंजन अपने आप इस वाक्य को कुछ यूं पूरा कर देता है 'आर अट्रेक्टिड टू मुस्लिम बायस' ;मुसलमान युवकों के प्रति आकर्षित होती हैं!  महाराष्ट्र में 'हिन्दू रक्षा समिति' नामक एक संस्था ऐसे हिन्दू.मुस्लिम विवाहित जोड़ों में तलाक करवाने की मुहिम चला रही है जिनमें कि पत्नी हिन्दू है। संस्था का दावा है कि वह हिन्दू धर्म को बचाने के लिए यह कर रही है। ऐसा नहीं है कि इस तरह के दंपत्तियों की संख्या बहुत बड़ी है परंतु केवल संदेह के आधार पर हीए हिंदू धर्म के स्वनियुक्त रक्षक,संबंधित युवक पर हिंसक हमले करने से नहीं चूकते। मराठी में लव जिहाद पर प्रकाशित एक पुस्तिका में एक मुस्लिम युवक को मोटरसाईकिल चलाते हुए दिखाया गया है और उसके पीछे एक हिन्दू लड़की बैठी है। यह शब्द इतना प्रचलन में आ गया है कि संघ से जुड़े केरल के एक ईसाई संगठन नेए संघ परिवार की एक सदस्य विहिप से लव जिहाद रोकने के लिए कहा है। सच यह है कि लव जिहाद जैसी कोई चीज ही अस्तित्व में नहीं है।
भारत में इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल तटवर्ती कर्नाटक के मैंगलोर शहर व केरल के कुछ हिस्सों में शुरू हुआ। आरएसएस द्वारा प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रमोद मुताल्लिक द्वारा स्थापित श्री राम सेना ने हिंदू पत्नी.मुस्लिम पति दंपतियों पर हमले करने शुरू किए। इस तरह की शादियों को संदेह की निगाह से देखा जाने लगा और अगर लड़की के माता.पिता इस तरह के विवाह के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करते, तो श्रीराम सेने उन्हें मामले को अदालत में ले जाने में मदद भी करती थी। बहाना यह बनाया जाता था कि हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों के साथ शादी करने पर'मजबूर' किया जा रहा है। सिजालराज व अजहर के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक जज ने अपने फैसले में यहां तक कह डाला कि तथ्य ;लव जिहाद राष्ट्रव्यापी महत्व के हैं......इनका संबंध देश की सुरक्षा व महिलाओं की गैर.कानूनी तस्करी से है'! इसलिए अदालत ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक व महानिरीक्षक को यह आदेश दिया कि वे 'लव जिहाद' की विस्तृत जांच करें। जांच पूरी होने तक लड़की को उसके माता.पिता के पास ही रहने का आदेश दिया गया। मामला एक सामान्य हिन्दू.मुस्लिम विवाह का था। लड़की अपनी बात पर दृढ़ रही और सामाजिक दबाव के आगे नहीं झुकी। पुलिस जांच में यह सामने आया कि लव जिहाद जैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं है।
इसके पहले, इसी तरह के मामले में दो अभिभावकों की अपील पर केरल उच्च न्यायालय ने भी ऐसा ही निर्णय दिया था। दो हिन्दू लड़कियां अपने घर से भाग गईं। उन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया और उनका इरादा मुस्लिम लड़कों से शादी करने का था। केरल उच्च न्यायालय ने भी पुलिस को इस तरह की घटनाओं की जांच करने का आदेश दिया। पुलिस जांच में फिर यह सामने आया कि लव जिहाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है। यह आरोप बेबुनियाद है कि इस तरह के विवाहों को किसी संगठन या समूह द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। परंतु दुर्भाग्यवश ऐसी आम धारणा बन गई है कि देश में लव जिहाद चल रहा है।
श्रीराम सेना ने यह दावा किया कि लगभग 4000 हिन्दू लड़कियों को मुसलमान बना लिया गया है। इस झूठ को हर संभव तरीके से फैलाया गया। इस हास्यास्पद,काल्पनिक दावे का इतना प्रचार हुआ कि हिन्दू लड़कियों के अभिभावक डर गये। कई मामलों में, जिनमें कि लड़कियां सचमुच मुसलमान लड़कों से प्रेम करती थीं और अपनी इच्छा से मुसलमान बनना चाहती थीं, उन्हें भी अपने अभिभावकों के साथ रहने पर मजबूर होना पड़ा। अभिभावकों द्वारा लड़कियों का इस हद तक भावनात्मक ब्लेकमेल किया गया कि कुछ लड़कियों ने हथियार डाल दिये और यह कह दिया कि उन्हें फंसाया गया थाए जिहादी सीडी दिखाई गई थी इत्यादि।
इसी तरह का प्रचार, गुजरात कत्लेआम के बाद भी किया गया था। यह कहा जाता था कि 'मुस्लिम लड़के आदिवासी लड़कियों को फंसा रहे हैं।' विहिप.बजरंग दल के एक कार्यकर्ता बाबू बजरंगी ने गुण्डों की एक सेना तैयार की थी जो ऐसे प्रेमी युगलों पर हमले करती थी और उन्हें डराती धमकाती थीए जिनमें लड़के और लड़की अलग.अलग धर्मों के होते थे। बाबू बजरंगी ने गुजरात कत्लेआम में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। मजे की बात यह है कि इस हिंसा और गैरकानूनी कार्यवाहियों को धर्मरक्षा का नाम दिया जाता था। तथ्य यह है कि किसी भी बहुवादी समाज में अंतर्जातीय और अंतर्धामिक विवाह होना सामान्य और स्वाभाविक है। सांप्रदायिक राजनीति के परवान चढ़ने के साथ हीए अंतर्धामिक विवाह कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गये हैं। हम सब को रिजवान.उर.रहमान और प्रियंका तोडी का त्रासद विवाह याद है। प्रियंका, कलकत्ता के एक अत्यंत धनी व प्रभावशाली व्यवसायी की पुत्री हैं। अपने अभिभावकों व रिश्तेदारों के दबाव में आकर वे पलट गईं। उसके बाद क्या और कैसे हुआ यह किसी को ज्ञात नहीं है परंतु जो ज्ञात है वह यह है कि रिजवान.उर.रहमान को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। इस तरह के सभी मामलों में पुलिस और राज्यतंत्र का व्यवहार, कानूनी प्रावधानों व कानून की आत्मा के विरूद्ध ही रहा है। जिन्हें कानून की रक्षा करनी चाहिए वे गैर.कानूनी कार्यवाहियां करने वालों का साथ देते नजर आते हैं।
अंतर्जातीय व अंतर्धामिक विवाहों के खिलाफ इस तरह के अभियान न केवल राष्ट्रीय एकता को कमजोर करते हैं वरन् वे पितृसत्तात्मकता के सिद्धांतों के अनुरूप,लड़कियों के जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश भी हैं। महिलाओं के शरीर को संबंधित समुदाय के सम्मान से जोड़ दिया जाता है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ भावनाएं भड़काई जाती हैं और समाज को विभाजित किया जाता है। इससे संप्रदायवादी राजनीति कई तरह से लाभांवित होती है। चूंकि पितृसत्तात्मक व्यवस्था में महिलाओं को पुरूषों की संपत्ति समझा जाता है और उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे पुरूषों द्वारा निर्धारित सीमाओं में रहें, अतः इस तरह के मुद्दों पर भावनाएं भड़काना आसान होता है। अल्पसंख्यकों को निशाना बनानाए सांप्रदायिक राजनीति के एजेण्डे का हिस्सा है। जाहिर है कि काल्पनिक 'लव जिहाद' के खिलाफ अभियान से एक तरफ मुसलमान घृणा के पात्र बनते हैं तो दूसरी ओर पितृसत्तात्मक व्यवस्था को मजबूती मिलती है।
कुछ समय पूर्व तक यह सब कुछ हिन्दू लड़कियों के जीवन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था.यह सुनिश्चित करने के लिए कि लड़कियां अपनी पसंद का जीवनसाथी न चुन सकें। परंतु अब इससे एक कदम और आगे बढ़करए लव जिहाद का इस्तेमाल सांप्रदायिक दंगे करवाने के लिए किया जा रहा है जैसा कि हमने मुजफ्फरनगर में देखा। लगभग हमेशा ही सांप्रदायिक दंगे, झूठी अफवाहें फैलाकर भड़काए जाते हैं। यही लव जिहाद के मामले में भी हो रहा है। वाट्सएप और फेसबुक पर यह आरोप लगाया जाना आम है कि लव जिहाद,मुसलमानों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रचे गए षडयंत्र का हिस्सा है। यहां तक कि जोधा और अकबर के विवाह को भी इस तरह के षडयंत्र का हिस्सा बताया जा रहा है। हम सब जानते हैं कि राजा और बादशाह,राजनैतिक गठबंधन बनाने के लिए इस तरह के वैवाहिक संबंध बनाया करते थे परंतु जोधा अकबर की कथा का भी सांप्रदायिक ताकतें अपने निहित स्वार्थ पूरा करने के लिए निहायत कुटिलतापूर्वक इस्तेमाल कर रही हैं।
जहां तक महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का प्रश्न है, इस मामले में भारत में संघ परिवार,अफगानिस्तान में तालिबान, पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व और पूरी दुनिया के ईसाई कट्टरपंथी एकमत हैं। वे सभी महिलाओं को पुरूषों का गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं। चाहे श्रीराम सेना  हो या बाबू बजरंगी या मुजफ्फरनगर में हिंसा भड़काने वाले तत्व. सभी यह मानकर चलते हैं कि महिलाएं, पुरूषों की संपत्ति हैं और उनके जीवन पर नियंत्रण रखना पुरूषों का जन्मसिद्ध अधिकार है। इस तरह के मामलों में इस बात का कोई महत्व नहीं होता कि सच क्या है। मिथकों को लोगों के दिमाग में बैठा दिया जाता है। आरएसएस और उससे जुड़े संगठन,लव जिहाद के नाम पर सांप्रदायिकता का जहर घर.घर और मोहल्ले.मोहल्ले फैला रहे हैं।
-राम पुनियानी
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