मंगलवार, 14 अप्रैल 2009

दक्षिण एशिया -भयंकर साम्राज्यवादी तूफ़ान की चपेट में-5

अमर प्रताप सिंह


लेखिका -निलोफर भागवत ,उपाध्यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ़
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अनुवादक -मोहम्मद एहरार , मो .न. 09451969854
प्रस्तुतकर्ता- अमर प्रताप सिंह
दक्षिण एशिया में वर्तमान में घटित हो रही घटनाओ के पीछे एतिहासिक पुनरावृत्ती है। सउदी अरब एवं पाकिस्तान के सहयोग से अमेरिका एवं ब्रिटेन ने जिस साजिश का ताना - बाना अफगानिस्तान की सौर क्रांति एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार तख्ता पलटने के लिए किया गया था आज पाकिस्तान उसी में फंस रहा है । जिन मुजाहिद्दीन या' पवित्र योद्धाओं ' को गुप्तचर संस्थाओं द्वारा हस्तक्षेप करने के लिए पैदा किया गया था अब वही पाकिस्तान के लिए काल सिद्ध हो रहे है ।
सम्पूर्ण केन्द्रीय एशिया , दक्षिण एशिया , पश्चिम एशिया की राजनैतिक बागडोर को नियंत्रित करने के लिए एवं रूसी सेनाओ को अफगानिस्तान में जिनसे रूस के एतिहासिक एवं राजनैतिक संबंध थे , घसीटने के लिए C.I.A और पाकिस्तान की खुफिया एजेन्सी I.S.I के सहयोग से मुजाहिद्दीन एवं अलकायदा जिसका सरगना अरब पति ओसामा बिन लादेन है, का गठन किया । अलकायदा की अनेको शाखाएं जो इस्लामी नामो का इस्तेमाल करतें है कई देशो में बने गई ताकि समय- समय पर राजनैतिक हितों की सुरक्षा के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सके । उनसे बम विस्फोट कराये गए ताकि स्थानीय समस्याओं के प्रति लोगो में आक्रोश को विदेशी ताकत के नाम पर शांत रखा जा सके।
इसी विकास के सामानांतर एवं लगभग उसी समय बहुसंख्यक संगठनों फासीवादी समूहों को
दक्षिण एशिया में गठित किया गया जिनका सम्बन्ध पूर्व के फासीवादी समूहों से था एवं जो ब्रिटिश राज्य में हिंदुत्व का प्रतिनिधत्व करते थे । ऐसा इसलिए किया गया ताकि विभाजन करके शाशन करने की नीति पर वे बने रहे अल्पसंख्यक वर्ग में इनके जावाब में मुस्लिम लीग एवं जामाते इस्लामी को गठित किया गया इस हकीक़त को भारत में कभी उल्लेख नही किया जाता की हिंदू उग्रवादी नेता के लिए उतने ही जिम्मेदार थे जितना की मुस्लिम कट्टरपंथी नेता।
राजनैतिक विभाजन के लिए धर्म का प्रयोग नया नही है। इंग्लॅण्ड की हुकूमत पहली सरकार थी जिसने अपना स्वयं का चर्च अर्थात चर्च ऑफ़ इंग्लॅण्ड की स्थापना की। ऐसा उन्होंने पोप का विरोध करने के लिए किया जो कि इंग्लॅण्ड के विरोधियों का समर्थन करते थे । यूरोप के विभिन्न शासको एवं सरकारों ने धर्म एवं सांस्कृतिक प्रजातियों का प्रयोग अपने राष्ट्र के लोगो के विरुद्ध किया ताकि वे सत्ता में बने रहे इसलिए इसमें कोई आश्चर्य कि बात नही है कि साम्राज्यवादियों ने धर्म एवं सांस्कृतिक समूहों का प्रयोग दक्षिण एशिया के राजनैतिक कटाव को प्रज़्जवलित रखने के लिए किया है ताकि वे यहाँ के लोगो का आर्थिक एवं राजनैतिक शोषण कर सके।

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