शनिवार, 18 अप्रैल 2009

मिट- मिट के सुजाना है ...


मिट- मिट के सुजाना है हँस- हँस के दिखाना है ।
इक कूंच- ए जाना है इक राहे ज़माना है।

सागर की अदाएं है अँजूरी का ठिकाना है ।
इक अश्को की गागर है इक प्यार का पैमाना है ।

सुन- सुन के मचलते है , घिर घिर के बरसते है।
इक दर्द को सरगम है, इक कहे फ़साना है।

- डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

2 टिप्‍पणियां:

Nirmla Kapila ने कहा…

bahut sunder abhivyakti hai abhar

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।