बुधवार, 13 मई 2009

बेबस हम है...



(हिन्दुस्तान अखबार से साभार )
पुलिस का मानवीय चेहरा
उत्तर प्रदेश में पुलिस का मानवीय चेहरा यह है कि पुलिस जुर्माने से दंडनीय अपराधो में थानों में लाकर जबरदस्त पिटाई करती है और पैसा वसूलती है कानून यह कहता है कि जुर्माने से दंडनीय अपराधो में मौके पर (जहाँ गिरफ्तारी दिखाई जाती है) जमानत दे दी जानी चाहिए लेकिन पुलिस रुपया वसूलने के लिए थानों में थर्ङ डिग्री का इस्तेमाल करती है । शासन प्रशासन और उच्च अधिकारियो का संरक्षण थानों कि पुलिस को प्राप्त होता है और हिस्सेदारी होती है । हमारी न्यायपालिका स्थानीय स्तर पर खामोश रहती है । कोई व्यक्ति विरोध नही कर सकता है न्याय पालिका के पास अवमानना से करने का मजबूत डंडा है । आम आदमी उत्पीडन से बचने का लिए जाए तो जाए कहाँ ? बेबस हम है ।

सुमन

कोई टिप्पणी नहीं: