शनिवार, 25 सितंबर 2010

ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी नरसंहार के आगे वर्ल्ड ट्रेड की घटना नगण्य है


संयुक्त राष्ट्र महासभा को ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने संबधित करते हुए कहा कि 9/11 की घटना अमेरिकी साजिश का परिणाम है। अमेरिका ने अपनी अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के लिए और एशियाई मुल्कों के ऊपर अपना शिकंजा कसने के लिए किया था। इस घटना में 2700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
अहमदीनेजाद ने आरोप लगाया कि इजराइली यहूदी शासन को बरकरार रखने और मध्य-पूर्व के मुद्दे को भटकाने के लिए अमरीका ने ये साजिश रची। अहमदीनेजाद ने यहां तक कहा कि आत्मघाती हमलावरों को अमरीकी प्रशासन की ओर से मदद दी गई। उन्होंने कहा कि जिस वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को आत्मघाती हमलावरों ने विमान से टकरा कर जमीदोंज कर दिया उसके मलबे से अमरीकी पासपोर्ट मिले जबकि हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिला।
अहमदीनेजाद ने कहा कि ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व में हुए अभियानों में मारे गए हजारों लोगों के सामने यह आंकड़ा नगण्य है।
अहमदीनेजाद के भाषण के दौरान ही अमेरिका के 33 समर्थक देश उठ कर चले गए। गौरतलब बात यह है कि ईराक के ऊपर हमला करने से पूर्व अमेरिकन साम्राज्यवाद ने तरह-तरह के दावे किये थे कि ईराक में परमाणु हथियार और रासायनिक हथियार बनाये जा रहे हैं और उनका भण्डारण किया जा रहा है लेकिन आज जब अमेरिकन सेनाओ की वापसी तक हो गयी लेकिन अमेरिकन दावों की पुष्टि आज तक नहीं हुई।
अमेरिकन या अन्य साम्राज्यवादी देशों की बातें उस मिलावटखोर, मुनाफाखोर बनिये की तरह होती हैं जो हर वक्त ईश्वर की सौगंध खा कर अपने माल को बेचने के लिए तरह-तरह की झूठी कसमें खाता रहता है, अमेरिकन या साम्राज्यवादी तत्व अर्धविकसित व विकसित देशों को गुलाम बनाये रखने के लिए उनके ऊपर तरह-तरह के आरोप लगाये रखते हैं और अपनी लूट आधारित व्यवस्था को बनाये रखना चाहते हैं। इससे पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने पूरी दुनिया में जितने नरसंहार किये हैं वह भले ही इतिहास की बात हो गयी है लेकिन मानवता साम्राज्यवादियों के आगे हमेशा कराहती ही रही है। वियतनाम, ईराक, अफगानिस्तान, फिलिस्तीन सहित कितने ही मुल्कों अमेरिकन साम्राज्यवाद ने तबाह व बर्बाद कर डाला है। इससे लगता है कि अहमदीनेजाद की बातों में कहीं न कहीं दम जरूर है।

इसके पूर्व फरवरी 2010 में अहमदीनेजाद ने कहा था कि

The West’s ultimate goal is not Iran, but India and China, Iran’s President Mahmoud Ahmadinejad was quoted as saying by Irinn.

He named the wish to undermine China’s and India’s rapidly growing economies as the causes of the West’s interest.

He named the recent concentration of NATO forces around India and unrests in Pakistan as an argument.

Presently, the West experiences a rapid downturn in the economy and the leaders of the Western countries have decided to conceal reality from their peoples, he said at today’s news conference.

Ahmadinejad said that NATO almost completely surrounded Russia and once Russia will understand this.

“Russia should respond to the deployment of NATO forces along its borders,” he said।

thepepoleofpakistan

यह भी यथार्थ के नजदीक उनका बयान था।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

9 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
फ़ुरसत में ….बड़ा छछलोल बाड़ऽ नऽ, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

S B Tamare ने कहा…

sahi kahaa , mai sahamat hoo!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चेताने के लिए शुक्रिया!

राज भाटिय़ा ने कहा…

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की एक एक बात से सहमत है, लेकिन इन्हे ओर हमे अकल कब आयेगी, जो इस के कहने से हम आपस मै लड रहे हे.

ALOK KHARE ने कहा…

jab koi rashtr neta ais abole, aur iten analytical reply de, to jaroore uski bat me sachhai tohogi hi, aur americans are known to act to help themselves.

i agreed wid Iranian President

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
कहानी ऐसे बनी– 5, छोड़ झार मुझे डूबन दे !, राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

nice ?

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के इस वक्तव्य से हमें भी सहमति हो रही है...