गुरुवार, 27 जनवरी 2011

कौन है इस देश के मूल निवासी ?

माननीय उच्चतम न्यायलय ने कहा कि आदिवासी देश के असली नागरिक हैंशेष 92 फ़ीसदी लोग आव्रजक आक्रमणकारियों की संतानें हैंलेकिन हम उनके साथ बुरा व्यवहार करते हें पुराने समय में उन्हें राक्षस और असुर जाने क्या क्या कहा जाने लगा जबकि ये लोग गैर आदिवासियों के मुकाबले चरित्रवान होते हें, ये कभी झूठ बोलते हें कभी ठगते हैंलेकिन इन पर लगातर अत्याचार होते रहे हैंइसकी वजह से ये लोग सैकड़ों साल पहले जंगलों में चले गएआज वे सबसे ज्यादा अशिक्षित, भूमिहीन, बीमार तथा काम आयु तक जीवित रहने वाले लोग बन गए हैंलेकिन अब जंगलों में भी उन्हें विकास के नाम पर बेदखल किया जा रहा हैकभी खदानें तो कभी कारखाना लगाकर उन्हें वहां से भी खदेड़ा जा रहा हैवाक्य गया है कि हम उनके प्रति किये गए ऐतिहासिक अन्याय के बदले में उनके साथ अच्छा व्यवहार करें तथा उन्हें अपना जीवन जीने दें
माननीय उच्चतम न्यायलय की इस टिपण्णी के बाद जरा अपने बारे में सोचिये कि आप क्या हैं ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

5 टिप्‍पणियां:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Vicharneey bindu.
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Kajal Kumar ने कहा…

इस तथ्य पहली बार पढ़ने में आए हैं पता नहीं किस रिसर्च का हिस्सा हैं... इस देश में किसी को भी कुछ भी कहने आज़ादी है भई...

Kajal Kumar ने कहा…

इस तथ्य = इस तरह के तथ्य

निर्मला कपिला ने कहा…

वाकई विचारनीय मुद्दा है। धन्यवाद।

P S Bhakuni ने कहा…

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों के पिछड़ेपन के जो कारण बताये हैं वास्तव में सही जान पड़ते हैं लेकिन मात्र वही लोग इस देश के असली नागरिक हैं यह किस आधार पर कहा गया है यह एक सोचनीय मुद्दा है ,
...... वक़्त आ गया है कि हम उनके प्रति किये गए ऐतिहासिक अन्याय के बदले में उनके साथ अच्छा व्यवहार करें तथा उन्हें अपना जीवन जीने दें। निसंदेह ...........
धन्यवाद।
ध्यानार्थ :- "वाक्य" > वक़्त