मंगलवार, 19 जुलाई 2011

हर हिंदू शांतिप्रिय होता है लेकिन हिंदूव्त्व वाला हिंदू आतंकी होता है

आज कुछ मित्रों के साथ बैठे हुए चाय के साथ गपशप हो रही थी किी एक मित्र ने नया जुमला ढूँढ निकाला किी हर हिंदू शांतिप्रिय होता है लेकिन हिंदूव्त्व वाला हिंदू आतंकी होता है. इस पर कई मित्रो ने तस्दीक़ करते हुए कहा किी जब कोई आतंकी घटना होती तो उसकी जाँच मदरसों से शुरू होती है जबकि यह भी वास्तविकता है किी संघ क कार्यालय और उसके सहयोगी संगठन आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं और लिप्त हैं. जाँच उनकी भी होनी चाहिए और अगर द्विपक्षिशेय जाँच हो तो सही आतंकी पकड़े जाएँगे और और आतंकी घटनाओं पर रोक लग सकती है. प्रगया ठाकुर से लेकर असीमनंद तक भगवा आतंकवाद के एक लंबी श्रंखला है. और अपने आकाओं को खुश करने क लिए यह लोग आतंकी घटनायें करते रहते हैं और पाकिस्तान विरोध क नाम पर पूर्व मानसिकता क आधार पर ज़बरदस्ती एक दिशा में जाँच कर कुछ प्रतिफल ना मिलने पर भी कुछ लोगों को जेल भेज कर घटना का खुलासा कर इतिश्रि कर लेते हैं हद तो यहाँ तक हो गयी किी 15 अगस्त 2000 की पूर्व संध्या पर साबरमती बम विस्फोट कांड में कोई पुख़्ता सबूत ना होने क बावजूद भी अभियुक्तों क बयान के आधार पर आरोप पत्र दाखिल कर दिए गये क्योंकि जिस वाद की जाँच की दिशा ही मदरसे की ओर से ही शुरू की गयी थी यदि सही विवेचना हुई होती तो वास्तविक आतंकी पकड़े जाते और आतंकवाद क ख़ात्मे की ओर हमारा एक कदम होता.

सुमन
लोकसंघर्ष

5 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

हर संगठन में सोमनाथ होते हैं मेरे भाई ||
लीक से हटके चलने वाले ||
पिटते पिटते सहन शक्ति जवाब दे गई होगी
और फिर अनधिकृत कार्य कर बैठे होंगे ||

हर बार "यहीं क्यों" वाली मानसिकता ने उन्हें उत्प्रेरित किया होगा ||

सजा मिले यदि दोष सिद्ध होता है |

डॉ विनायक असीमानंद प्रज्ञा या सीमा आजाद ||

बढ़िया प्रस्तुति ||

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

भगवा पवित्रता का प्रतीक रंग है। इसे हिंदुओं के साथ मुसलमान सूफ़ियों ने भी पहना है। ग़लत लोग सही रंग पहनकर ग़लत काम करें तो उनके काम से वे ख़ुद ग़लत ठहरते हैं, उनके द्वारा पहना गया रंग नहीं। आतंकवाद की घटनाएं अंजाम देने वाले ये रंग अपने लिए समर्थन जुटाने के लिए और आपस में एक दूसरे के प्रति संदेह और नफ़रत पैदा करने के लिए पहनते हैं। हमें चाहिए कि उनके नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए किसी के धार्मिक पवित्र रंग को बुरा न समझें। यह भी आतंकवादियों की ही एक चाल होती है जिसमें नादान लोग फंस जाते हैं।
इसी तरह के विचार विमर्श के लिए
ब्लॉगर्स मीट अब ब्लॉग पर आयोजित हुआ करेगी और वह भी वीकली Bloggers' Meet Weekly

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

जब कोई आतंकी घटना होती तो उसकी जाँच मदरसों से शुरू होती है जबकि यह भी वास्तविकता है किी संघ क कार्यालय और उसके सहयोगी संगठन आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं और लिप्त हैं
@ कितनी जगह भाजपा की सरकारें है ? जो कथित हिंदू आतंकियों को बचा लेगी|
-अब तक आतंक के खिलाफ सबसे ज्यादा जाँच आपकी सेकुलर सरकार ने ही की है|
- लाल रंग वाले गरीबों को बहला फुसलाकर हाथ में बंदूकें पकड़ा दे तो वो क्रांति,मुस्लिम आतंक फैलाये तो जेहाद फिर यदि संघ ने कथित रूप से कर भी दिया तो हाय तौबा क्यों ? ये कैसा दोगलापन?
-हिंसा हिंसा होती है चाहे किसी के द्वारा की जाये जो निंदनीय है घ्रणित है|
-पर इस देश का दुर्भाग्य कि आतंकी घटनाओं में भी लोग राजनैतिक फायदा तलाशते है विरोधियों के ऊपर आरोप लगाकर|

हरभूषण ने कहा…

हर मुस्लिम शांतिप्रिय होता है लेकिन इस्लामिक सोच आतंकप्रिय होती है
ये जुमला कैसा लगता है?टिप्पणियाँ यदि सचमुच आपका उत्साह बढ़ाती हैं तो आप उनके ऊपर प्रतिक्रिया क्यों नहीं जताते कि आप टिप्पणियों से किस तरह उत्साहित होते हैं जबकि कई टिप्पणियाँ आपकी विचारधारा की सीधे शब्दों में निन्दा कर देती हैं। आप कम्युनिस्ट हैं लेकिन देखा जाए तो आपको जिस तरह मैं निजी तौर पर परिभाषित कर सकता हूँ वह ये है कि आप हिंदू विरोधी और मुस्लिम समर्थक हैं सचमुच आपको बाकी अल्पसंख्यकों से कोई सरोकार नहीं क्योंकि उनके वोट कम होंगे। जैन, बौद्ध,सिख, ईसाई,पारसी आदि भी इसी देश में रहते हैं कभी उन पर भी लिखने का साहस जुटाइये।

Arunesh c dave ने कहा…

गलत एंगल से लिखी सही बात कॊई भी आतंखी घटना होने पर सूत्र घटना स्थल और शहर से ही मिलते हैं । इन्हे निरपेक्ष भाव से खंगाला जाना चाहिये और दोशी कोई भी हो किसी भी मजहब का दल का या संगंठन का उसे पकड़ अंदर करना चाहिये जांच से कोई परे न हो और दोशी सिद्ध होने से पहले उसे बदनाम न किया जाये । लेखन का उद्देश्य किसी को चिढ़ाना न हो तो ही सार्थक बात कही जा सकती है और संबंधित पक्ष भी आत्ममंथन करता है