उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनाव में प्रथम चरण की शुरुवात हो चुकी है। कांग्रेस, सपा, बसपा, व भाजपा की ओर से बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा आया रुपया ( ब्लैक मनी) मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिये खर्च किया जा रहा है। प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया के उद्घोषक से लेकर उनका पूरा तंत्र इन्ही दलों के घमासान की खबरें छापने व उद्घोषित करने में लगा हुआ है। छोटे दलों या निर्दलीय प्रत्याशियों के प्रतिनिधि जब समाचार देने जाते हैं तो उनसे सीधे-सीधे विज्ञापन की मांग की जाती है इससे यह साबित होता है कि उनके समाचार सर्वेक्षण में सब कुछ इन चार दलों के थैलीशाहों द्वारा प्रायोजित है। जनता लाख कोशिश करे किन्तु व्यवस्था इन थैलीशाहों द्वारा नियोजित की जा रही है। मतदान करना ही है तो इन चार दलों में से ही मतदाता किसी न किसी को तो मतदान कर ही आएगा। अन्तोगत्वा चाहे बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं बनी ही रहेंगी। अरबों रुपये जो लोग चुनाव जिताने में खर्च कर रहे हैं। तो सरकार चाहे जिसकी बने पहले थैलीशाहों के हित व स्वार्थ उसको पूरे करने होंगे। पूरे चुनाव प्रक्रिया में आम मतदाता का कोई अर्थ नहीं रह गया है और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार चाहे जिस दल की हो वह थैलीशाहों की ही होगी।
सुमन
लो क सं घ र्ष !
2 टिप्पणियाँ:
बहुत बढ़िया !
गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज 26 जनवरी है।
लोग ख़ुश हैं। ख़ुश होने की वजह भी है लेकिन जो लोग आज के दिन भी ख़ुश नहीं हैं उनके पास भी ग़मगीन होने की कुछ वजहें हैं। हमारा ख़ुश होना तब तक कोई मायने नहीं रखता जब तक कि हमारे दरम्यान ग़म के ऐसे मारे हुए मौजूद हैं जिनका ग़म हमारी मदद से दूर हो सकता है और हमारी मदद न मिलने की वजह से वह उनकी ज़िंदगी में बना हुआ है।
हमारे अंदर अनुशासन की भावना बढ़े, हम ख़ुद को अनुशासन में रखें और किसी भी परिस्थिति में शासन के लिए टकराव के हालात पैदा न करें।
जो लोग आए दिन धरने प्रदर्शन करते हुए शासन और प्रशासन से टकराते रहते हैं, उन्हें 26 जनवरी पर यह प्रण कर लेना चाहिए कि अब वे देश के क़ानून का सम्मान करेंगे और किसी अधिकारी से नहीं टकराएंगे बल्कि उनका सहयोग करेंगे।
टकराकर देश को बर्बाद न करें।
लोग अंग्रेज़ो से टकराए तो वे देश से चले गए और आज बहुत से लोग यह कहते हुए मिल जाएंगे कि देश में आज जो असुरक्षा के हालात हैं, ऐसे हालात अंग्रेज़ों के दौर में न थे।
कहीं ऐसा न हो कि फिर टकाराया जाए तो देश और गड्ढे में उतर जाए।
सो प्लीज़ हरेक आदमी यह भी प्रण करे कि अब हम क्रांति टाइप कोई काम नहीं करेंगे।
जो राज कर रहा है, उसे राज करने दो।
एक जाएगा तो दूसरा आ जाएगा।
अपना भला हमें ख़ुद ही सोचना है।
सादर ,
Read entire message :
प्लीज़ क्रांति न करे कोई No Revolution
http://www.ahsaskiparten.blogspot.com/2012/01/no-revolution.html
-Good piece of information.
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