सोमवार, 2 अप्रैल 2012

पश्चिमी अर्थतंत्र का अन्तहीन पतन -6

अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का इस सम्बन्ध में रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है, हालाँकि इसे बड़े जोर शोर से शुरू किया गया था। इसने अमरीकी सरकार के नेताओं, सैन्य अधिकारियों, ठेकेदारों, प्राइवेट सुरक्षा ऐजेंसियों के खिलाफ, सुरक्षा परिषद द्वारा मुकदमा न चलाने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी है। यद्यपि कि उन्होंने नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध एवं युद्ध  अपराध किए हैं जिसकी कोई उपमा मानव इतिहास में उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत, अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्षों, जिन्होंने अपनी अर्थ व्यवस्था पर उप निवेशिक राजनैतिक नियंत्रण का विरोध किया, को खुले तौर से गिरफ्तारी के वारन्ट से धमकाया गया, जिसके फलस्वरूप अफ्रीकी संघ ने सुरक्षा परिषद एवं अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा गठित विशिष्ट न्यायालयों के राजनैतिक एवं द्वेषपूर्ण प्रकृति की घोर आलोचना की।
    मानवाधिकार संगठन जो कि मौत की सजा को व्यक्तिगत मामलों में उन्मूलन के लिए कार्यरत हैं अभी तक वे इस सच्चाई के प्रति नहीं जागे हैं कि जो कुछ नाटो शक्तियों के द्वारा उद्घोषित किया गया है, वह सभी देशों के नागरिकों के लिए सामूहिक मौत की सजा है। वे ऐसे हथियारों का प्रयोग कर रहे हैं, जो नागरिकों की हत्या कर रहे हैं जैसे कि डिप्लीटेड यूरेनियम हथियार, जो न्यूकिलयर उद्योग के रद्दी या बचे हुए उत्पादों से बना हैं एवं जो मानव के जीन कोड को नष्ट कर देता है एवं मार देता है, फ्यूल एअर इक्सप्लोसिव, डेयसी कटर बम, सफेद फासफोरस, नेपास, क्लस्टर बम, न्यूट्रान बम एवं छोटे न्यूक्लियाई हथियार जिनका प्रयोग तथाकथित रूप से लीबिया के सर्टे नामक स्थान पर किया गया। इन सारे हथियारों को अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।
    युद्ध के नियमों के सम्बन्ध में जेनेवा एवं हेग परम्परा जो सभी प्रकार के न्यूक्लियाई हथियारों एवं उन सभी हथियारों को  प्रतिबंधित करती है जो नागरिक जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। 25 अगस्त 2011 तक नाटो देशों द्वारा 27,000 से अधिक बम गिराए गए। नार्वे एवं डेनमार्क के द्वारा अकेले 700 बम गिराए गए। इसमें वह प्राणघातक बमबारी शामिल नहीं है जो इराक में सर्टी, बनी वलीद एवं फलूजा में की गई।
    संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्थापित यू0एन0 मानवाधिकार सभा क्या भूमिका अदा कर रही हैं? क्या यह करोड़ों लोगों के मानवाधिकारों, जिनके ऊपर अवैध कब्जा जमाया गया है को सुरक्षा प्रदान करने में सफल हुआ है? आक्रमणकारी युद्धों, इराक एवं अफगानिस्तान में नरसंहारों, एवं  अधिग्रहण सम्बंधी युद्ध अपराधों की सूचनाओं का क्या परिणाम हुआ? उन सूचनाओं को महासभा में कार्यवाही एवं प्रतिबंधों के लिए पेश नही किया गया है क्योंकि कुछ स्थाई सदस्य इसमें सम्मिलित थे। क्या नाटो राज्यों के किसी भी सदस्य के खिलाफ जो इन आपराधिक युद्धों मंे शामिल हैं, महासभा में उनकी सदस्यता की समाप्ति के सम्बन्ध में प्रस्ताव पारित किया गया? या उनके सम्बन्ध में विशेष अदालत का गठन किया गया या अन्तर्राष्ट्रीय अदालत में उन पर मुकदमा चलाया गया। 60,000 लीबियाई नागरिकों की हत्या पर एवं कर्नल गद्दाफी की हत्या पर मानवाधिकार संगठनों द्वारा सुरक्षा परिषद में कोई प्रतिनिधित्व क्यों नहीं किया गया। क्या हमें अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की विफलता एवं पतन, संयुक्त राष्ट्र संघ की नाकामयाबी का कोई अन्य प्रमाण चाहिए?

-नीलोफर भागवत
अनुवादक: मो0 एहरार एवं मु0 इमरान उस्मानी
क्रमश:

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