बुधवार, 12 जून 2013

खालिद मुजाहिद की हत्या के सबूतों को नष्ट करने का कार्य शुरू

आतंकवाद के नाम पर फर्जी बरामदगी के आधार पर जेल में निरुद्ध खालिद मुजाहिद की न्यायिक अभिरक्षा में हत्या हो जाने के बाद लखनऊ जेल अधीक्षक, फैजाबाद जेल के अधीक्षक व डीआईजी कारागार शरद कुलश्रेष्ठ ने मीडिया को बताया था कि खालिद मुजाहिद बीमार नही था किन्तु अब नामजद पुलिस अधिकारीयों को बचाने के लिए लखनऊ कारागार अधीक्षक दधिराम मौर्या ने सात जून को पत्र संख्या 7626 लिख कर संशय की स्तिथि पैदा करनी शुरू कर दी है। उन्होंने कारागार प्रशासन को लिखा है कि जेल के डॉ प्रदीप बिजलानी ने 18 मई 2013 को खालिद मुजाहिद को दवा दी थी और डाक्टरी रिपोर्ट के अनुसार खालिद मुजाहिद को लेफ्ट साइड चेस्ट पेन था। इस पत्र को जनता में संशय फैलाने के लिए राजधानी लखनऊ के एक समाचार पत्र में प्रमुखता के साथ प्रकाशित भी कराया गया है। यह अखबार पुलिस अधिकारीयों को बचाने के लिए काफी समय
से तथ्यों में तोड़-मरोड़ कर समाचार प्रकाशित कर रहा है यदि खालिद मुजाहिद की तबीयत ख़राब थी तो 300 किलोमीटर की यात्रा करने की अनुमति जेल प्रशासन ने कैसे दी। वहीँ बाराबंकी पुलिस साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए न्यायलय की अनुमति लेकर विसरा को जांच करने के लिए भेज दिया जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने उक्त वाद की विवेचना सीबीआई द्वारा करने की घोषणा कर चुकी है। इस तरह यह साबित होता है कि पुलिस अधिकारीयों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए तथ्यों से छेड़छाड़ की जा रही है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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