शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

डाकिया पर अब निबन्ध लिखने की आवश्यकता नहीं है.....

डाक विभाग के अधिकारीयों की इच्छा है कि तनख्वाहें मिलती रहे और कोई काम न करना पड़े और अंत में यह विभाग किसी भी तरीके से इसका निजीकरण हो जाए। इसके लिए जनता और डाक घर के बीच काम करने वाले लोग बड़ी तत्परता से काम कर रहे हैं।  नयी तकनीक आने के बाद इनकी मनी आर्डर सेवा लगभग समाप्त सी हो रही है।  मनी आर्डर सेवा जब लोगों की आवश्यकता थी तब तरह-तरह के तरीके जनता को परेशान करने के लिए डाक विभाग के अधिकारी व कर्मचारी करते थे। डाक घरों से पार्सल, रजिस्ट्री जिससे जनता का सीधा सम्बन्ध है, करने में पूरा का पूरा दिन लग जाता है। बाराबंकी जनपद में शहर में जितने भी पोस्ट ऑफिस हैं सबके सर्वर डाउन रहते हैं और कार्य न करना पड़े उसके समस्त उपाय उनके इंचार्ज करते हैं जिससे ऊब कर पार्सल व अति आवश्यक पत्रों का रुख प्राइवेट कूरियर सेवा की तरफ मुड गया है। इनके अधिकारीयों की कार्यशैली देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि प्राइवेट कूरियर वालों की एक प्याली चाय के लिए काउंटर पर बैठा हुआ आदमी अपना बुकिंग का कार्य नही कर रहा है। जब बड़े स्तर पर सरकारी नौकरियों में रजिस्टर्ड आवेदन पत्र मांगे जाते हैं।  दो दो हजार नवजवानों की भीड़ डाक घर पर रोज इकठ्ठा होती है। डाक घर के अधिकारीयों की नॉलेज के बाद भी कभी भी अतिरिक्त काउंटर खोल कर भीड़ का कार्य नही किया जाता है।  नयी तकनीक के आने के बाद इस समस्या से बचने के लिए ऑनलाइन फॉर्म्स स्वीकार करने का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। 
 वस्तुत: डाक विभाग के अधिकारीयों का विशेष रूप से ध्यान इस विभाग को किसी भी तरीके से ध्वस्त करने में ही लगा रहता है। नियमो और उपनियमो के तहत डाक विभाग कार्य नही कर रहा है इसीलिए अब डाकिया पर अब निबन्ध लिखने की आवश्यकता नहीं है।

सुमन
लो क सं घ र्ष ! 


6 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

डाक विभाग की अगर यही स्थित बनी रही तो आने वाले समय में डाक विभाग बंद हो जाएगा,,,...!
नवरात्रि की शुभकामनाएँ ...!

RECENT POST : अपनी राम कहानी में.

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (12-10-2013) को "उठो नव निर्माण करो" (चर्चा मंचःअंक-1396) पर भी होगी!
शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

HARSHVARDHAN ने कहा…

आज की विशेष बुलेटिन जेपी और ब्लॉग बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है। सादर .... आभार।।

रश्मि शर्मा ने कहा…

वाकई हाल बुरा है...तार की तरह ये भी बंद न हो जाए कहीं

आशा जोगळेकर ने कहा…

अब तो डाकिये का इन्तज़ार भी नही रहता सब काम ई-मेल से जो होजाते हैं और सेल फोन और कूरीयर तो है ही।

कविता रावत ने कहा…

सही विश्लेषण
अब तो ई चिट्ठी का जमाना है ..डाक विभाग अभी नहीं जागा तो कब जागेगा यह बड़ा सवाल सबके सामने होगा ..