शनिवार, 26 अप्रैल 2014

मायावती जी, रामदेव का इलाज बेनी प्रसाद के पास

मायावती जी, रामदेव का इलाज बेनी प्रसाद के पास है। रामदेव संत का चोला धारण किये हुए हैं। वह चोला उनके लिए कवच कुंडल है। वह समझते हैं कि हम कुछ भी कहें कुछ भी करें। अंध धार्मिकता के कारण सब माफ़ी योग्य है।  वास्तव में संत बहुत कम लोग हैं कुसंत लोगों की संख्या ज्यादा है।  रामदेव औषधि व्यापारी हैं अथाह काला धन उनके पास है।  हर बात में असत्य का सहारा लेकर आरोप प्रत्यारोप लगाना उनकी आदत है अगर वह संत होते तो राजनीती में नहीं होते और उनके लिए सभी लोग बराबर होते। दलित विरोधी  मानसिकता जिस तरह से उन्होंने राहुल गाँधी के ऊपर कटाक्ष करते हुए उजागर की है वह किसी भी तरह से स्वागत योग्य नहीं हो सकती है।  रामदेव की स्तिथि एक सड़क छाप प्रचारक की है उस प्रचारक को यह नही मालूम होता है कि उसके द्वारा कहे जा रहे शब्दों का क्या अर्थ है।
 इसी सन्दर्भ में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में टिप्पणियां करते हुए कहा था कि वह दलितों के घर हनीमून और पिकनिक मनाने जाते हैं। इस मामले में शुक्रवार को उनके खिलाफ लखनऊ में धारा 171(6) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
 बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने  योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा कांग्रेस की आलोचना के दौरान दलितों के संबंध में की गई टिप्पणी की निंदा करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल भेजने की मांग की है।
बेनी ने का कि मोदी को सबक सिखाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जानवर खुद नहीं चलते हैं बल्कि उन्हें नकेल के साथ चलाया जाता है। बेनी ने कहा कि ऎसे जानवरों के साथ सलूक करना मुझे बखूबी आता है बेनी ने मोदी की जानवर से तुलना करते हुए उन्हें हंटर से रास्ते पर लाने की बात कही थी। इसके बाद बेनी प्रसाद वर्मा पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। हमारे जिले के इस्पात राज्य मंत्री श्री बेनी प्रसाद वर्मा की दिल्ली में चली होती तो उनका  योग (जो बाराबंकी जनपद में तो प्रसिद्द है ) उसका इस्तेमाल होता। राम नगर थाना जिला बाराबंकी में मंत्री जी के एक बडबोले विरोधी के ऊपर तत्कालीन थाना अध्यक्ष ने योग का प्रयोग किया था। जब न्यायालय में उक्त नेता जी का चालान आया तो पेट के बल वो लेटाये हुए थे और जब माननीय मंत्री जी का चुनाव आया तो उसमें सबसे आगे आगे वही नेताजी उनका चुनाव प्रचार कर रहे थे।
 सुमन
लो क सं घ र्ष !



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