बुधवार, 7 मई 2014

ग्रीष्म निष्क्रियता


साभारaseemtrivedi17.blogspot.com
मोदी के पास अब सारे मुद्दे समाप्त हो गए हैं . इसलिए अब वह इंदिरा गाँधी से लेकर प्रियंका वाड्रा की बातें फ़िल्मी अंदाज में अर्ध सत्यों का सहारा लेकर कर रहे हैं . संघी गैंग व उसके चेले सोशल मीडिया पर हल्ला गुल सबसे ज्यादा मचा रहे हैं . यह इनकी पुरानी आदत है . 16 मई के बाद यह सब ग्रीष्म निष्क्रियता में चले जायेंगे .30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला हाउस में शाम की प्रार्थना सभा मे महात्मा गांधी की छाती पर तीन गोलियां मारी गईं। दुनिया भौंचक्की रह गई। खुद को सनातनी हिंदू कहने वाले गांधी पर गोली किसी और ने नहीं, हिंदुत्व का दर्शन देने वाले विनायक दामोदर सावरकर के शिष्य और महासभा के कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे ने चलाई थी। गोडसे कभी आरएसएस का सक्रिय सदस्य था। गांधी की हत्या एक ऐसे हिंदू की हत्या थी जिसने सत्य को ही ईश्वर माना। आजादी की लड़ाई के समय एक भी संघी जेल नहीं गया था और इनकी शाखाओं में ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की फ़ौज की भर्ती होती थी अब देश को ब्रिटिश साम्राज्यवाद की मुखबिरी करने वाले लोग राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं . भारतीय संविधान में इनका कभी विश्वास नहीं रहा है और न ही मानने के लिए तैयार ही रहते हैं . चरित्र हनन करना इन सब संघ के लोगों की प्रमुख विशेषता होती है . अभी चुनाव जैसे जैसे अंतिम क्षणों में पहुंचेगा चरित्र हनन करने का काम यह लोग बड़ी तेजी से करने लगेंगे .
प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कॉर्पोरेट जगत के रुपये खिलाकर जनता में जो उन्माद भरा जा रहा है वह उन्माद 16 मई को मालूम चल जायेगा किभारतीय जनता सोचने व समझने की अच्छी शक्ति रखती है .

-सुमन
लो क सं घ र्ष !

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