शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

कल राष्ट्रभक्ति - देशभक्ति का दिन है

 
राष्ट्रगीत में भला कौन वह
भारत-भाग्य-विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका
गुन हरचरना गाता है।
मखमल टमटम बल्लम तुरही
पगड़ी छत्र चँवर के साथ
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
जय-जय कौन कराता है।
पूरब-पच्छिम से आते हैं
नंगे-बूचे नरकंकाल
सिंहासन पर बैठा, उनके
तमगे कौन लगाता है।
कौन-कौन है वह जन-गण-मन-
अधिनायक वह महाबली
डरा हुआ मन बेमन जिसका
बाजा रोज़ बजाता है। 
 
- रघुवीर सहाय

कालीमिर्च में पपीते का बीज, पिसी हल्दी में रामरज, पिसी धनिया में घोड़े की लीद, चावल जैसे कंकड़ मिलाने वाले लोग उछल-उछल कर, कूद-कूद कर. लपक-लपक कर राष्ट्रभक्ति-देशभक्ति का गीत गायेंगे. सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले अधिकांश: कर्मचारी-अधिकारी जो सबसे ज्यादा छुट्टियों का उपयोग करते हुए. दिनभर में दो वाक्य लिखने में मजबूर साबित होते हैं और मुट्ठी गरम होने पर बड़े से बड़ा कागज लिख डालते हैं. पुलिस विभाग के लोग रुपया वसूलने के लिए पिटाई करने में आगे रहने वाले लोग सबसे ज्यादा देश भक्ति का प्रदर्शन करेंगे.
          1925 की विजय दशमी के दिन संस्कृतिक राष्ट्रवाद के जन्मदाता संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ देशभक्ति-राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र जारी करेंगे. 1925 से 15 अगस्त 1947 तक जिनका कोई स्वयं सेवक राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया था. वह देश के अन्दर उनके स्वयं सेवक राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और सलामी लेंगे. विभिन्न घोटालों के आरोपी खद्दर-कुरता, सूट-सफारी  पहन कर जन-गण-मन गुनगुनायेंगे. नकली दवाओं के विक्रेता, जमाखोरी-मुनाफाखोरी करने वाले लोग, भ्रष्ट अफसरशाही जो अपने तनख्वाह से कई गुना ज्यादा प्रति माह खर्चा करते हैं और कई-कई सौ करोड़ रुपये की पारी संपत्तियां इकट्टा करने वाले लोग, खेत मजदूरों, किसानो, कारखाना मजदूरों या मेहनतकश आवाम को राष्ट्रवाद का पहाडा पढ़ाएंगे.
                  आतंकवाद में फर्जी गिरफ्तारियां दिखा कर बड़े-बड़े अधिकारी पुलिस पदक से लेकर राष्ट्रपति पदक तक पाएंगे और बेगुनाह लोग इन्साफ मांगते-मांगते जेलों में मर जायेंगे. देश के अन्दर जेलों में वही लोग मरने-सड़ने के लिए रहते हैं जिनके पास रुपया नहीं है. जिनके पास रुपया है वह ललित मोदी की तरह विदेश में रहकर ट्विटर से राज खोलने का काम करेंगे. फिलहाल, आजादी का दिन है, हमारा खून चूसा जा रहा है तब भी हम खुश हैं और जो खून चूस रहे हैं वह भी खुश हैं क्यूंकि उन्हें खून चूसने की आजादी हैं. हमारी आजादी आदमी और मगरमच्छ को एक साथ रखने की आजादी है. हमारी आजादी का उपयोग तभी है जब कॉर्पोरेट सेक्टर के लोग हमारा घर, जल, जंगल, जमीन छीन लें और विरोध करने पर विभिन्न मामलों में लपेटकर पूरी ज़िन्दगी न्यायिक प्रक्रिया के चक्कर लगाने में बीत जाए- लेकिन हम आज़ाद हैं !

- सुमन 


1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (15-08-2015) को "राष्ट्रभक्ति - देशभक्ति का दिन है पन्द्रह अगस्त" (चर्चा अंक-2068) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
स्वतन्त्रतादिवस की पूर्वसंध्या पर
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'