रविवार, 30 अगस्त 2015

बहुरूपियो की भाषा

प्रफेसर एम.एम.कलबुर्गी
 देश के अन्दर ठगों, पिंडारियो व डकैतों की एक विशेष भाषा रही है उसी तरह नागपुर मुख्यलय की एक विशेष भाषा है. लाभ के लिए गाँधी भक्ति और गाँधी के विचारो को नष्ट करने के लिए उनका चरित्र हनन और जिन्दा गाँधी की हत्या भी- इनकी भाषा को समझ पाना आसान नहीं है
गोविन्द पंसारे
आरक्षण समाप्त करने के लिए गुजरात में पटेल जाति को ओ बी. सी. कोटे शामिल करने के लिए 'आरक्षण आन्दोलन', संघी समर्थकों ने प्रारम्भ कराया और व्यापक हिंसा हुई. भाषा उनकी यह है कि पटेल जाति को आरक्षण मिलना चाहिए. वहीँ इसके विपरीत हादिर्क पटेल ने कहा कि पिछले 60 सालों में आरक्षण से देश बर्बाद ही हुआ है या तो सरकार आर्थिक तौर पर कमजोर और योग्य लोगों को आरक्षण दे या फिर इसे खत्म कर दे। इसके लिए वह दिल्ली आकर जाट व गुर्जर नेताओं से आरक्षण आन्दोलन करने के लिए बड़ा गठजोड़ बनाना चाहते हैं. उनकी मंशा साफ़ है की सरकार इन तीन बिरादरियों में आरक्षण ओबीसी कोटे में आरक्षण न दे पाए तो आरक्षण व्यवस्था समाप्त कर दी जाए और उसका आधार जाति के बजाये आर्थिक कर दिया जाए. यह बहुरूपियेपन की भाषा हार्दिक पटेल ने नागपुर मुख्यालय से सीखी है. नागपुर मुख्यालय द्वारा प्रसारित उग्र हिन्दुवत्व की भाषा ने गाँधी और फिर बाद में नरेन्द्र दाभोलकर, गोविन्द पंसारे व आज प्रोफेसर एम.एम.कलबुर्गी की हत्या करा दी है.
नरेन्द्र दाभोलकर

ज्ञातव्य है कि वामपंथी विचारक और हंपी यूनिवर्सिटी के पूर्व उप कुलपति प्रफेसर एम.एम.कलबुर्गी की उनके निवास स्थान धारवाड़ में कुछ अज्ञात बंदूकधारी ने गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात रविवार सुबह 9 बजे हुई। कलबुर्गी एक तरह से कर्नाटक के दाभोलकर थे। महाराष्ट्र के रहने वाले नरेंद्र दाभोलकर जिनकी अगस्त 2013 में हत्या कर दी गई थी, की ही तरह प्रफेसर कलबुर्गी का भी दक्षिणपंथी हिंदुत्व विचारकों के साथ पिछले कई साल से विरोध था। अज्ञात हमलावरों की गोलियों के शिकार बने महाराष्ट्र के वरिष्ठ सीपीआई नेता गोविंद पांसरे की मौत हो गई थी.  16 फ़रवरी 2015 को कोल्हापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें गोली मार दी थी.
यह सिलसिला अब थमने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में इनकी नीतियों का जो भी विरोध करेगा उसकी हत्या इनके द्वारा प्रसारित उग्र हिन्दुवत्व वाले लोग कर देंगे. आरक्षण का सवाल हो या जादू-टोना या अंधभक्ति का विरोध जो शक्तियां करेंगी उनको नेस्तानबूत करने के लिए यह सब हर संभव प्रयास करेंगी. इनकी भाषा बहुरूपिये की भाषा है जो एक समय में ही चार तरह की भाषा बोलते हैं.
       आरक्षण के समर्थन में जो शक्तियां आयेंगी उनके दमन की भी पूरी तैयारी नागपुर मुख्यालय ने कर रखी है. अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले दंगो में उनकी हत्याएं तथा उनकी संपत्ति की लूट-पाट का काम अब पिछड़े व दलित जो उग्र हिन्दुवत्व से ओत-प्रोत होते हैं उन्ही से कराते हैं और वैचारिक समर्थन सवर्ण जातियों के उग्र हिन्दुवत्वादी देते हैं. 
मुल्क खतरे में है देश की एकता व अखंडता खतरे में है. जिस तरह से उग्र हिन्दुवत्व लागू किया जा रहा है उससे वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों का जीवन संकट में है. देश बहुधर्मी, बहुजातीय, बहुसांस्कृतिक, बहुभाषीय व बहुनस्ली है, परस्पर एक दुसरे के सम्मान से ही देश की एकता और अखंडता को सुरक्षित रखा जा सकता है. उग्र हिन्दुवत्व वाले लोग हत्याओं और दुष्प्रचार का सहारा लेकर एक छोटे से तबके के लिए उग्र हिन्दुवत्व विचारों वाला देश बनाना चाहते हैं जो असंभव है.

सुमन

कोई टिप्पणी नहीं: