सोमवार, 28 सितंबर 2015

नेपाल में लगे 'मोदी मुर्दाबाद'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी की अनावश्यक विदेश यात्राओं ने भारत की छवि और विदेश नीति को जबरदस्त हानि पहुंचाई है. जिसका नतीजा है कि नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को भारत विरोधी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने  'मोदी मुर्दाबाद' और 'भारतीय विस्तारवाद मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए। फेसबुक से लेकर गूगल तक की यात्राएं भारत के प्रधानमंत्री पद की गरिमा तथा गंभीरता को कम कर रही हैं. देहात में कहा जाता है कि यदि बार-बार ससुराल भी जाओगे तो आखिर में खुरपा व खारा लेकर सास कह देगी कि दामाद जी जरा भैंस के लिए घास छोल लाओ. यही स्तिथि भारतीय प्रधानमंत्री ला रहे हैं. 
नेपाल ने बीते हफ्ते ही नया संविधान अपनाया है जिस पर भारत ने कथित तौर पर आपत्ति जताई है। भारत ने नेपाल के नए संविधान में सात बदलावों की मांग की थी, जो नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है भारत की विदेश नीति किसी भी मुल्क के अन्दर आंतरिक हस्तक्षेप करने की नहीं रही है किन्तु नयी विदेश नीति में विस्तारवादी रवैये को भी शायद अपनाया है इसीलिए नेपाल में हो रहे विरोध प्रदर्शन वर्तमान सरकार की विदेश नीति की हंसी उड़ा रहे हैं. हद तो यहाँ तक हो गयी है कि नेपाल जाने वाले इंडियन आयल के टैंकरों को रोक दिया गया है जिसके बाद नेपाल में लोगों को वाहन कम इस्तेमाल करने और तेल बचाने की सलाह दी गई है। अगर यही विदेश नीति जारी रही तो नेपाल की जनता का भारत के साथ मधुर सम्बन्ध रख पाना संभव नहीं होगा और वह चीन की तरफ झुकाव होगा जिससे भारत को आर्थिक व राजनीतिक नुकसान होगा. जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी. नेपाल के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता के मुताबिक चीन से सीमा पर दो रास्ते फिर से खोलने का अनुरोध किया गया है। इस तरह से नेपाल चीन की तरफ बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री गूगल और फेसबुक के मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं. जहाँ से भारत को कोई लाभ नहीं होना है और अगर गरिमा और गंभीरता प्रधानमंत्री पद की कम हुई तो वहां के कर्मचारी भी नरेन्द्र मोदी मुर्दाबाद के नारे लगाने लगेंगे लेकिन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को अपने पद की गंभीरता याद नहीं है. विदेशों में भी वह देश की राजनीति में कटाक्ष करने से बाज नहीं आ रहे हैं. 

सुमन 

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (30-09-2015) को "हिंदी में लिखना हुआ आसान" (चर्चा अंक-2114) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat ने कहा…

नेपाल हमारा हिन्दू राष्ट्र है, उसकी ओर पूरा ध्यान देने की जरुरत है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो स्थिति प्रतिकूल बनते देर नहीं लगेगी...समय रहते इस ओर जल्दी से सकारात्मक प्रयास करने चाहिए ...