सोमवार, 19 अक्तूबर 2015

प्रधानमंत्री हैं या नाटककार

हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री स्वप्नदर्शी जवाहर लाल नेहरु थे. नेहरु की कद काठी का राजनेता भारत में होना मुश्किल है. नेहरु बच्चों से लेकर बड़ों तक में लोकप्रिय थे. नेहरु के समय में मुस्लिम लीग भी थी, हिन्दू महासभा भी थी, अम्बेडकर वादी भी थे, कम्युनिस्ट भी थे, समाजवादी भी थे. सभी अपनी-अपनी बात जनता के अन्दर संसद के अन्दर रखने के लिए स्वतन्त्र थे. भारतीय संविधान के अनुरूप सभी अपनी-अपनी बातें, अपनी-अपनी नीतियाँ जनता के सामने रखते थे और जनता जिसको चुनती थी वह सरकार बनाता था बाकी दल पांच साल तक फिर अपनी नीतियों को जनता को समझाने के लिए आन्दोलन, प्रदर्शन किया करते थे. अगर उन्होंने नाटक किया होता और संविधान के अनुरूप कार्य न किया होता तो बहुत सारे नेता और दल का एबॉर्शन हो गया होता और वे पैदा नहीं होते.
काफी कुछ लोकतान्त्रिक था लेकिन 2014 में बहुमत पाने वाले नरेन्द्र दामोदर मोदी की सरकार बनने के बाद देश की स्तिथि में एक विषाक्त वातावरण पैदा हुआ है, जिसके कारण लेखक से लेकर सामान्य जन परेशान हैं. अभी हाल में पूर्व प्रधानमंत्री के विशेष कार्याधिकारी सुधीन्द्र कुलकर्णी के चेहरे के ऊपर शिव सैनिकों ने कालिख पोत दी. महारष्ट्र की भाजपा सरकार व केंद्र में भाजपा सरकार बयानवीर बनकर ही रह गयी.
              साक्षी, प्राची, योगी, संगीत सोम, उमा भारती, महेश शर्मा सहित अनेक नेता आये दिन समाज को विभाजित करने वाले बयान जारी करते रहते हैं. प्रधानमंत्री के दिशा निर्देश पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इन नेताओं को बुलाकर प्रधानमंत्री की नाराजगी व्यक्त करते हैं, उसके बावजूद केंद्र शासित दिल्ली में जम्मू एंड कश्मीर के विधायक इंजिनियर रशीद के चेहरे के ऊपर स्याही फेंक दी जाती है. प्रधानमंत्री अगर नाटक नहीं कर रहे हैं तो बगैर मर्जी के एक विधायक के चेहरे के ऊपर स्याही फेंक देना क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था के ऊपर कलंक नहीं है लेकिन झूठ पर झूठ बोलने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अनुवांशिक संगठन भारतीय जनता पार्टी है उसके मुखपत्र पांचजन्य तूफ़ैल चतुर्वेदी का आलेख प्रकाशित हुआ है जिसमें यह कहा गया कि वेद के अनुसार दादरी के एखलाक की हत्या विधि विधान के अनुरूप है.जिसपर आर एस एस के मनमोहन वैद्य ने कहा पांचजन्य आर एस एस का मुखपत्र नहीं है. यह प्रधानमंत्री जी की व्यक्तिगत जानकारी में है की आर एस एस का मुखपत्र अंग्रेजी में आर्गेनाइजर व हिंदी में पांचजन्य है. उसके बाद कोई कार्यवाई न होना उनकी बेबसी को प्रदर्शित करता है या वह जान बूझ कर नाटक कर रहे हैं. भाई नरेन्द्र जी, आप देश के प्रधानमंत्री हैं या नागपुर मुख्यालय के प्रधानमंत्री हैं इस बात को आपको स्पष्ट करना होगा. 
संघ की विषाक्त विचारधारा के कारण देश के अन्दर कई बुद्धिजीवियों की हत्या हो चुकी है जिसके विरोध में देश के विभिन्न भाषाओँ के विद्वान पुरस्कृत लेखक अपने-अपने पुरस्कार वापस कर रहे हैं. देश के अन्दर बहु भाषीय, बहु धर्मीय, बहु सांस्कृतिक एकतामाय वातावरण रहेगा या आर एस एस की विषाक्त विचारधारा हिन्दुवत्व के अनुसार देश चलेगा. 
नरेन्द्र जी समय है अब भी सुधार कर लो आप देश के प्रधानमंत्री हैं. इस देश की एकता और अखंडता की हिफाजत करना आपकी संवैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी है. आप नागपुर मुख्यालय के प्रधानमंत्री नहीं हैं आप देश के प्रधानमंत्री हैं. पूर्वोत्तर भारत के भारतीय नागरिक गौ मांस भक्षी हैं क्या आप उनका वध करवा डालेंगे. आपके मंत्रिमंडल में कई मंत्री गौ मांस भक्षी हैं आप उनको कब मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर उनका वध कराएँगे.  भारत की एकता और अखंडता के लिए जाति, धर्म, भाषा, प्रांतीयता आदि के ऊपर विभेद का जो वातावरण तैयार किया जा रहा है उसको रोकने के लिए अविलम्ब कदम उठाये. आपकी कुर्सी के नीचे जिन लोगों ने इंजिनियर रशीद विधायक के चेहरे के ऊपर स्याही फेंकी है उनके खिलाफ कठोर कार्यवाई नहीं करते हैं तो आपके सम्बन्ध में समाज में यह सन्देश जा रहा है कि आप प्रधानमंत्री से ज्यादा नाटककार हैं. नाटक नागपुर में लिखा जाता है जिसको आप जनता के समक्ष प्रदर्शित करते हैं. 

सुमन 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (20-10-2015) को "हमारा " प्यार " वापस दो" (चर्चा अंक-20345) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'