गुरुवार, 12 नवंबर 2015

आरक्षण और हिंदुत्व

सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भारत सरकार ने अब भारतीय कानून के जरिये सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों और धार्मिक/भाषाई अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को छोड़कर सभी सार्वजनिक तथा निजी शैक्षिक संस्थानों में पदों तथा सीटों के प्रतिशत को आरक्षित करने की कोटा प्रणाली प्रदान की है। भारत के संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व के लिए भी आरक्षण नीति को विस्तारित किया गया है। भारत की केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में 27% आरक्षण दे रखा है और विभिन्न राज्य आरक्षणों में वृद्धि के लिए क़ानून बना सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता है।
.                          इस व्यवस्था के खिलाफ नागपुर मुख्यालय समय-समय पर समाप्त करने के लिए तरह-तरह के मुखौटे लगा कर आन्दोलन चलने का काम करता रहा है. विश्वनाथ प्रताप सिंह जब प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने का काम पूरा कर दिया था. तब नागपुर मुख्यालय ने छात्रों नौजवानों से लेकर अडवानी की रथयात्रा निकलवा कर मंडल पर कमंडल की विजय प्राप्त करने की कोशिश की थी. संघ ने आखिर विश्वनाथ प्रताप सिंह की खिचड़ी सरकार को गिरा कर ही दम लिया था. हाँ यह बात जरूर सही है कि मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू होने के बाद उसको समाप्त नहीं कर पाए थे. इस बीच संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात उठा कर इस मुद्दे को पुन: जीवंत कर दिया मुख्य सवाल यह है कि आरक्षण के बाद जो अभिजात्य वर्ग आरक्षित समुदायों में पैदा हुआ उसका सीधा सम्बन्ध हिन्दुवत्व की राजनैतिक विचारधारा वाले संघ को फायदा हुआ संघ के राजनितिक मुखौटे भाजपा को दलितों के एक बड़े समुदाय का मत व समर्थन प्राप्त हुआ. गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री पद पर राज इसलिए भी किया कि दलितों, पिछड़ों व सवर्णों के जो आर्थिक टकराव थे उस आर्थिक टकराव को उन्होंने मुस्लिम विरोध में बदल दिया था. इस बार संसदीय चुनाव में मुस्लिम विरोध के नाम पर दलितों, पिछड़ों व सवर्णों का एक हिन्दुवत्व वादी बड़ा समूह तैयार हुआ व उसने हर-हर मोदी करते हुए शुद्ध नागपुरी विचारधारा को शासन सत्ता दिला दी.
                सत्ता प्राप्ति के बाद नागपुर को यह महसूस होने लगा कि हिन्दुवत्व की विचारधारा बहुसंख्यक आबादी को ग्राह हो गयी है तो आरक्षण की भी समीक्षा कर उसके आधार को आर्थिक कर दिया जाए जिससे दलितों, पिछड़ों, आदिवासी, जनजातियों को सैकड़ों वर्ष पूर्व सेवक की भूमिका में बदला जा सके इसीलिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की ओर से मिलने वाली स्कालरशिप की व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. अगर इन तबकों को स्कालरशिप के नाम पर मिलने वाली आर्थिक मदद बंद हो जाये तो उच्च शिक्षा संस्थानों में इन समुदायों के छात्रों की संख्या स्वत: कम हो जाएगी.
       आज जब सरकारी नौकरियां समाप्त की जा रही हैं और एक विशाल प्राइवेट सेक्टर रोजगार का सृजन कर रहा है तो उसमें आरक्षण लागू करने की आवश्यकताएं महसूस की जा रही हैं और यह मांग समाज में उठनी प्रारंभ हो चुकी है ऐसे वक्त में सरकारी नौकरियों में आरक्षण बनाये रखने की बजाये उसके आधार को बदल देने की नागपुर की मनुस्मृति को लागू करने की पुन: कोशिश है.
जैसे-जैसे वंचित तबकों में खुशहाली आ रही है उतनी ही तेजी से नागपुर की विषाक्त विचारधारा के कारण मुस्लिम विरोध के नाम पर हिन्दुवत्व वादी विचारधारा बढ़ रही है. इसके लिए नागपुर मुख्यालय में बैठे हुए लोग इतिहास का नवीनीकरण कर रहे हैं. जिससे मुस्लिम विरोध के नाम पर इन तबकों में मत का प्रतिशत हिंदुवत्व के लिए बढ़ रहा है.
नागपुर में बैठे हुए लोग इतिहास के अर्धसत्यों को लेकर तरह-तरह की झूठी कहानियां गढ़ कर एक भ्रामक इतिहास भी तैयार कर रहे हैं. कर्नाटक में टीपू सुलतान के इतिहास का संप्रदायीकरण उसका विशेष उदहारण है. टीपू सुलतान ने अंग्रेजों को कई बार युद्ध में हराया. टीपू सुलतान के विरोध में अंग्रेजों के साथ मराठे, आयंकर ब्राह्मण, हैदराबाद रियासत के लोग थे जो अंग्रेजों के साथ मराठे व अयंकर ब्राहमण थे वह युद्ध में अगर मारे गए तो नागपुर मुख्यालय को इसको हिन्दू मुसलमान बना कर आज घडियाली आंसू रो रहा है. वह इतिहास को इस दृष्टि से नहीं देख रहा है कि ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ रहने वाले लोग मारे गए थे. नागपुर मुख्यालय की निष्ठां सदैव अंग्रेजों के साथ रही है. अंग्रेजों के साथ रहने वाले लोगों के युद्ध में मारे जाने के इतिहास को वह बदल रही है. 
आरक्षण भारत के इतिहास को बदलने की एक आवश्यकता है. सभी नागरिकों को एक सामान करने में आगे बढे हुए लोगों को कुछ संतोष करना पड़ेगा जब दुनिया में हम खड़े होते हैं तो हमारे यहाँ पेड़ की छाल उबाल कर पीने लोग या गोबर से गेंहू निकाल कर खाने वाले लोग मौजूद होते हैं वहीँ दूसरी तरफ एक तबका मंगल व चाँद पर मकान बनाने की तैयारी कर रहा है. इस अंतर को समाप्त करने के लिए आरक्षण का सहारा लेना ही पड़ेगा और नागपुर मुख्यालय यह बात समझने में असमर्थ है. अरक्षित तबकों को वोट के लिए साथ भी रखेंगे और गला भी काटेंगे. मुस्लिम या अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के खिलाफ लड़ाई में आगे रखेंगे लेकिन हिन्दू मानेगे भी नहीं. मदिर में प्रवेश निषेध लिखा मिलेगा.

सुमन 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (14-11-2015) को "पञ्च दिवसीय पर्व समूह दीपावली व उसका महत्त्व" (चर्चा अंक-2160) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'