शनिवार, 16 जनवरी 2016

मोदी जी देश को सोमालिया मत बनाइये

मजदूर किसानो के लिए या बहुसंख्यक जनता के लिए हमारे प्रधानमन्त्री के पास कुछ नहीं है. जिसमें किसानो के सम्बन्ध में उनके पास कोई योजना नहीं है लाखों किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं उसकी तरफ ध्यान न देकर अब कंपनियों को खोलने व बंद करने के लिए 10000 करोड़ रुपये का फण्ड कैपिटल गेन में छूट तथा क्रेडिट गारंटी स्कीम की योजनायें शुरू की हैं.
कंपनियों में काम करने वाले लोगों को श्रम कानूनों व अन्य कानूनों से पूरी तरह मुक्त रखा जायेगा. बेरोजगारों की मंदी में एक इंजिनियर को आप चाहे 10 हजार रुपये दे या 5 हजार कोई पूछने वाला नहीं होगा. उनके यहाँ किसी भी श्रम कानून को लागू नहीं किया जायेगा. उनके द्वारा कुछ भी किया जाए उसके लिए उन्हें लाइसेंस नहीं लेना होगा. पैसा जनता का हो, मुनाफा कंपनी का हो. मजदूरों का शोषण हो. सरकार से कोई लेना देना नहीं होगा. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप हो इसका अर्थ है कि सरकारी उद्यमों को भी उद्योगपतियों को सौंप देना. पैसा जनता से इकठ्ठा करने के लिए किसी भी तरह का वादा करना और वादे को पूरा न करना उसके लिए कोई कानून नहीं होगा.  जब चाहो कंपनी खोल लो, जब चाहो कंपनी में लगा जनत का पैसा डुबोकर कंपनी बंद कर दो. कंपनियों को कोई टैक्स न देना पड़े और वह प्राकृतिक संसाधनों से लेकर मानव संसाधन तक का दोहन करते रहो, उसमें सरकार की कोई दखलंदाजी न हो. कंपनियों को सस्ता कर्ज व तीन साल तक टैक्स में छूट दी जाएगी तथा सरकारी योजनाओं का भी लाभ उनको दिया जायेगा. यह है स्टार्ट अप योजना. कंपनी फ्लॉप शो हो जाए तो भी सरकार उसकी मदद करेगी.
मेक इन इंडिया का नारा भारत के लिए नहीं है. उसी तरह स्टार्ट अप भारत के लिए नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य है. विदेशी कंपनियों को यहाँ के प्राकृतिक संसाधन व मानव संसाधन की खुली लूट कराना. बहुसंब्ख्यक जनता को न तो मेक इन इंडिया से कोई फायदा होना है और न ही स्टार्ट अप से.
देश की नदियों, जलाशय, भूगर्भ जल व हवा को उद्योगपतियों ने जिस तरीके से प्रदूषित किया है उसकी भरपाई हाजारों-हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं हो पा रही है. चाहे गंगा हो या कावेरी साफ़ नहीं कर सकते हैं. उद्योगों का सारा कचरा जल को गन्दा करने में ही इस्तेमाल होता है. उसी तरह इन से निकल्लने वाली गैसों से हवा प्रदूषित होती है. कोई कानून काम नहीं करता है. जमीन के अन्दर मौजूद जल को जिस तरह से निकाल कर उद्योगपति इस्तेमाल कर रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं उसके ऊपर कोई रोक नहीं है. हमारे और आप के हिस्से का हवा पानी, जमीन उद्योगपतियों को देने का किसी भी सरकार को हक़ नहीं है. हमारे मोदी प्रधानमन्त्री बनने के बाद जनता के प्रधानमंत्री मालूम ही नहीं होते हैं वह मल्टी नेशनल कंपनियों व उद्योगपतियों को ही फायदा पहुंचाने में उनका अंकगणित लगा रहता है. इसी तरह सोमालिया को मल्टी नेशनल कंपनियों ने बर्बाद कर दिया था.

सुमन 

2 टिप्‍पणियां:

JEEWANTIPS ने कहा…

सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार! मकर संक्रान्ति पर्व की शुभकामनाएँ!

मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-01-2016) को "देश की दौलत मिलकर खाई, सबके सब मौसेरे भाई" (चर्चा अंक-2225) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'