शनिवार, 9 जनवरी 2016

हिन्दू तालिबानी विचारों का प्रतिबिम्ब

भारतीय विज्ञान कांग्रेस जिसमें विज्ञान के सम्बन्ध में और नए अविष्कारों के सम्बन्ध में बात होनी चाहिए. 'मानव जीवन को किस तरह और अच्छे तरीके से जिया जा सके उसके लिए उसमें नए अविष्कारों की क्या भूमिका हो सकती है' की बातें होनी चाहिए लेकिन संघ की प्रयोगशाला से निकले हुए लोग तमाम सारे साहित्यिक मिथकों को पुरातन व पुराने आविष्कार बता कर विज्ञान कांग्रेस की गरिमा तथा तर्क व बुद्धि की बातें न करके लाली और लिपस्टिक की बातें शुरू हो गयी हैं. बेंगलुरु में इंडियन साइंस कांग्रेस में कर्नाटक के राज्यपाल वाजूभाई वाला ने कहा कि देश की आधी आबादी को फैशन और लिपस्टिक से दूर रहना चाहिए, क्‍योंकि कॉलेज ब्यूटी कॉन्टेस्ट का प्‍लेटफॉर्म नहीं है। वजूभाई वाला ने यह भी कहा है कि लड़कियां कॉलेज पढ़ने जाती हैं न कि ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेने। ऐसे में वह लिपस्टिक लगाकर और आईब्रो बनाकर न जाएं।
                कानपुर में अडिशनल कमिश्नर के पद पर तैनात राजीव शर्मा का कहना है कि अगर सही तरीके से शंखनाद किया जाए तो सफेद बाल काले हो जाते हैं उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि
इससे खून का प्रवाह तेज होता है जिससे सफेद बाल काले हो जाते है .
                    वहीँ  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन 'विज्ञान भारती ' ने को प्रधानमंत्री कार्यालय की आलोचना करनी शुरू कर दी क्योंकि आखिरी मौके पर इस संगठन को भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दौरान पुरस्कार देने से मना कर दिया। यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना था। पुरस्कार देने से इनकार किए जाने पर आक्रोश में आए इस संगठन ने प्रधानमंत्री से निजी तौर पर इस मसले में हस्तक्षेप करने और प्रधानमंत्री से तात्कालिक आधार पर एक वैज्ञानिक सलाहकारी समिति का गठन करने की । संघ चाहता है कि सलाहकार समिति बनाकर अपने विचारो  को देश में लागू  करे .संघ की हिन्दू  विज्ञानं की बात करता है और धर्म से जोड़ना चाहता है
संघ अपने एजेंडे के अनुरूप विज्ञान व गणित को भी तालिबानी हिन्दू विचारों की तरफ मोड़ रहा है जिसका असर आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा.

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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