सोमवार, 2 अप्रैल 2018

वो सुर्ख सवेरा आयेगा


हम जिसका ख्वाब सजाएँ है, वो सुर्ख सवेरा आयेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर, तूफान नही रूक पायेगा ।
ये जनता भोली-भाली है,
वादों पे यकीं कर लेती है ।
जन्तर से मदारी के यारो,
अपनी झोली भर लेती है ।
जादू के जोर से सोचता है,
सपना पूरा हो जाएगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर,
तुफान नही रूक पायेगा ।
तकदीर को किसके हाथ मे दे,
तुम लम्बी तान के सोए हो ।
कल अच्छे दीन आ जायेंगे,
झूठे सपनो मे खोए हो ।
तुम अपनी हिफाजत आप करो,
जो होगा देखा जायेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर,
तुफान नही रूक पायेगा ।
फिर खूं की गर्दिश तेज करो,
जागो उठो अंगड़ाई लो,
इन सारे जमाखोरो से,
तुम सब आना पाई लो।
जब मिल के लड़ोगो ऐ लोगो,
फिर हक भी तेरा मिल जायेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर, तुफान नही रूक पायेगा ।
हम जिसका ख्वाब सजाए है,
वो सुर्ख सवेरा आयेगा ।
  -डॉ बशर आज़मी
मो. 9984145683

       

1 टिप्पणी:

radha tiwari( radhegopal) ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (04-04-2018) को ) "रहने दो सम्बन्ध" (चर्चा अंक-2930) पर होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

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