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सोमवार, 2 अप्रैल 2018

वो सुर्ख सवेरा आयेगा


हम जिसका ख्वाब सजाएँ है, वो सुर्ख सवेरा आयेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर, तूफान नही रूक पायेगा ।
ये जनता भोली-भाली है,
वादों पे यकीं कर लेती है ।
जन्तर से मदारी के यारो,
अपनी झोली भर लेती है ।
जादू के जोर से सोचता है,
सपना पूरा हो जाएगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर,
तुफान नही रूक पायेगा ।
तकदीर को किसके हाथ मे दे,
तुम लम्बी तान के सोए हो ।
कल अच्छे दीन आ जायेंगे,
झूठे सपनो मे खोए हो ।
तुम अपनी हिफाजत आप करो,
जो होगा देखा जायेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर,
तुफान नही रूक पायेगा ।
फिर खूं की गर्दिश तेज करो,
जागो उठो अंगड़ाई लो,
इन सारे जमाखोरो से,
तुम सब आना पाई लो।
जब मिल के लड़ोगो ऐ लोगो,
फिर हक भी तेरा मिल जायेगा ।
रोकेगा जमाना लाख मगर, तुफान नही रूक पायेगा ।
हम जिसका ख्वाब सजाए है,
वो सुर्ख सवेरा आयेगा ।
  -डॉ बशर आज़मी
मो. 9984145683

       

कार्ल मार्क्स





दीन-हीन लोगों को संघर्षों का पाठ पढाया,
जिसके विचारों से दुनिया ने इन्कलाब अपनाया.
समता के रस्ते पर जिसने पहला कदम बढाया,
घोर तिमिर से घिरी थी दुनिया दीपक एक जलाया.
           जिसने विचारों और कलम से लड़ी है एक लड़ाई.
           ऊँच-नीच और रंग भेद की पाटी सारी खाई.
सत्ता में तय जिसने कर दी सबकी भागीदारी,
जो भी पूँजी राष्ट्र की होगी, होगी सब सरकारी.
दुनिया को सामंतवाद का रोग लगा था भारी,
कैपिटल लिख कर ख़त्म किया इतनी भारी बीमारी.
          साम्यवाद के ख़त्म होने का जो दावा करते हैं,
          उनको शायद पता नही सिद्धांत कहाँ मरते हैं?
पूँजीवाद के मकड़जाल में फंसा है यह संसार,
धरती पर कोहराम मचा है लाशों का व्यापार.
धर्म और गुटबाजी में है बंटा हुआ संसार,
आग का दरिया डूबकर इसको करना होगा पार.
           दो वर्गों में बंटा हुआ है यारों ये संसार,
         एक अमीरी-एक गरीबी, बाकी सब बेकार.






 -डॉ बशर आज़मी
मो. 9984145683
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