अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ध्वंस के बाद राम लला टाट में और उनको टाट में पहुँचाने वाले लोग ठाठ में हैं. जब-जब चुनाव आता है तो संघ के एजेंडे में राम मंदिर निर्माण की बात जरूर आती है. अभी बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं और संघ की बैठक में प्रधानमंत्री व संघ के कुल वक्ती कार्यकर्ता नरेन्द्र दामोदर मोदी एक कार्यकर्ता की हैसियत से उपस्थित हुए. वहां अयोध्या में राम मंदिर के मामले में संघ ने कहा कि हम राम मंदिर के लिए
प्रतिबद्ध है, लेकिन हम सरकार की समय-सारणी के अनुसार उनके क्रियान्वयन का
इंतजार करेंगे। कुछ दिन पूर्व अमित शाह ने कहा कि राम मंदिर के लिए 370 सीटें चाहिए. राम लला के नाम पर हमेशा हिन्दू जनमानस को झकझोर कर वोट लेकर सत्ता हासिल की जाती रही है और फिर उस मुद्दे को जिन्दा भी रखा जाता है जिससे धार्मिक आस्था और विश्वास को भुनाकर वोट प्राप्त कर सत्ता हासिल की जाए. उन्माद भरने के लिए यह नारा तो प्रिय है कि ' राम लला हम आयेंगे, मंदिर वहीँ बनायेंगे '. किन्तु
यह सब हिन्दू आस्था का लाभ उठाने के लिए राजनीति का प्रयोग है जो संघ की
प्रयोगशाला का सबसे बढ़िया हथियार है जिससे वोट पैदा करने का सबसे बढ़िया तरीका है.
इसके अतिरिक्त न इनका राम में विशवास है न धर्म मेंसत्ता ही धर्म है. जो लोग बाबरी मस्जिद के ध्वंस के अपराधिक
कृत्य में मारे गए थे उनके परिवारों का भी कोई पुरसाहाल नहीं है जब यह राम के भी
नहीं हुए तो उनके नाम पर मरने वाले लोगों के भी यह नहीं हुए हैं
सच्चिदानंद हरी साक्षी जो इस समय उन्नाव से सांसद हैं और जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी तब उन्होंने कहा था , "मेरे सामने सिंघल ने महाराज वामदेव ने कहा कि
आंदोलन तब तक तेज नहीं होगा, जब तक कोई मरता नहीं है। महाराज वामदेव ने
कहा कि अगर बच्चे मरे, तो यह काफी बुरा होगा। सिंघल ने फिर कहा कि जब तक
ऐसा नहीं होगा, आंदोलन गति नहीं पकड़ेगा।"