सोमवार, 3 अक्तूबर 2011

महा भ्रष्ट कांग्रेसियों से भी बदतर है पवित्र गंगा का ढोंग रचाने वाले भाजपाई


कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में वाकयुद्ध प्रारंभ है वह उनको भ्रष्ट कहते हैं और वह उनको। वस्तुस्तिथि यह है कि अगर दोनों में तुलना की जाये तो इस समय महा भ्रष्ट कांग्रेसियों की सरकार में भी ए.राजा से लेकर सुरेश कलमाड़ी और अमर सिंह से लेकर सुधीर कुलकर्णी तक तिहाड़ जेल में पिकनिक मना रहे हैं। वहीँ भाजपा येदुरप्पा से लेकर बंगारू लक्ष्मण तक किसी भी अपने नेता को या सहयोगी दल के नेता को तिहाड़ जेल की पिकनिक नही करा पायी क्यूंकि उसका मानना है कि वह पवित्र गंगा है और उस पवित्र गंगा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के कथित दामाद से लेकर पीसी धनिया में घोड़े की लीद मिला कर बेचने वाला कार्यकर्ता पवित्र गंगा के नाम से पवित्र रहता है।
हद तो यहाँ तक हो गयी कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संजीव भट्ट को शपथ पत्र देने की सजा भुगतनी पड़ रही है। उनको निलंबित कर फर्जी केस गढ़ कर उनके घर में पुलिस द्वारा तोड़ फोड़ की गयी और उनको गिरफ्तार कर पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग न्यायालय में की गयी जिस पर न्यायालय ने पुलिस कस्टडी रिमांड के प्रार्थना पत्र को ख़ारिज कर दिया। अडवाणी से लेकर नागपुर मुख्यालय तक किसी भी नेता की नैतिकता जाग्रत नही हुई। संजीव भट्ट की पत्नी ने गृह मंत्री चिदंबरम को पत्र लिखकर संजीव भट्ट की सुरक्षा की मांग की है। इस प्रकरण से पवित्रता का दंभ भरने वाली भाजपा को जरा भी शर्म नही महसूस हुई। यह काम उसी तरीके से है जिस तरह से एक थर्ड क्लास पुलिसिया आये दिन जनता में करता रहता है। हम न कांग्रेस की वकालत कर रहे हैं और न भाजपा की। दोनों राजनीतिक दल भारतीय राजनीति में एक सिक्के के दो पहलु हैं और दोनों ही दल इस समय अमेरिकन साम्राज्यवाद के भक्त हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

3 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

'दोनों राजनीतिक दल भारतीय राजनीति में एक सिक्के के दो पहलु हैं और दोनों ही दल इस समय अमेरिकन साम्राज्यवाद के भक्त हैं।'--काफी है इतना...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

यह बात एक देश की नहीं है, यह बात एक काल की भी नहीं है।
धर्म कहता है कि सच बोलो और सच बोलने वाले को शासक मार देते हैं हमेशा से,
यह दुनिया हमारे लिए नहीं है।
अच्छी बात है कि यहां मौत आ जाती है।
अगर जीवन अनंत होता यहां पर तो हम कैसे जी पाते ?

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

जमाल साहब
एक लिंक दे रहा हूँ जिसमें आपको और जानकारी मिल जायेगी। मैंने देखा तो सोचा आपको भी बताता चलू। इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए
http://kharee-kharee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html

1- जब ये जनाब 1996 मे बनासकाठा के एसपी थे तब इन्होने सिपाही पद की भर्ती मे बड़ा घोटाला किया था . इनके खिलाफ बड़े गंभीर आरोप लगे ..इन्होने भर्ती की पूरी प्रक्रिया को नकार दिया था और ना ही उमीदवारों के रिकार्ड रखे थे .
2- ये जनाब 2001 में राजस्तान [पाली ]का एक वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित जो अपनी कार से अहमदाबाद आ रहा था उससे चेकिंग के नाम पर पैसे की मांग की थी जब उसने मना किया तो इन्होने उसके कर में 500 ग्राम हेरोइन बरामद बताकर उसे नार्कोटिक्स की गंभीर धाराओं में जेल में डाल दिया .. असल में उस वकील के पास उस वक्त कोई सुबूत नहीं था जिससे पता चले की वो एक वकील है .बाद में पाली बार एसोसियेसन की अपील पर राजस्थान हाई कोर्ट ने क्राईम ब्रांच से अपने अंडर जाँच करवाई तो संजीव भट्ट को दोषी पाया गया .. जिसके खिलाफ संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील किया जो आज भी चल रहा है. लेकिन भारत सरकार के मानवाधिकार आगोग ने अपनी जाचं में संजीव भट्ट को दोषी पाते हुए गुजरात सरकार को सुमेर सिंह राजपुरोहित को एक लाख रूपये हर्जाना अदा करके का हुक्कम दिया जो गुजरात सरकार के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते से अदा किया गया .ये सारी घटनाये गुजरात दंगे से पहले की है .. ....
3-अहमदाबाद के पास अडालज में नर्मदा केनाल के करीब 2000 वार की सरकारी जमीन पर कब्जा करके बैठे है .. जब ये बात मीडिया में आई तो उन्होंने बताया की उन्होंने सुरम्य सोसाइटी में 1000 वार का प्लाट ख़रीदा है जो उनकी माँ के नाम है ..उन्होंने उस प्लाट की बाउंड्री करवा कर उनमे दो कमरे भी बनवा दिए लेकिन जब प्लाट को नापा गया तो वो 2000 वार का निकला . असल में इन्होने केनाल की तरफ सरकारी जमीन को भी अपने कब्ज्जे में ले लिया ..जब पत्रकारों ने उनसे पूछा की आपने अपने सम्पति डिक्लेरेशन में इस प्लाट का जिक्र क्यों नहीं किया तो वो चुप हो गए ..और मोदी सरकार पर उलटे ये आरोप लगाने लगे की उनको बदनाम किया जा रहा है ..
4- 1990 में जब संजीव भट्ट जी जाम नगर में डीएसपी थे तो पुलिस की पिटाई से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई , संजीव भट्ट समेत छ अन्य पुलिस वाले आरोपी बनाए गए | ये केस आज भी जाम खंभालिया कोर्ट मे चल रहा है ..
5- ये जनाब लगातार 10 महीने तक डियूटी से अनुपस्थित रहे ..और सरकार की किसी भी नोटिस का जबाब नहीं दिया
6- इनके उपर एक कांस्टेबल के डी पंथ ने बहुत ही गंभीर आरोप लगाये है .. इन्होने मोदी के उपर लगाये गए आरोपों को और मजबूत करने के इरादे से पंथ का अपहरण करके गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोधवाडिया के बंगले पर ले गये और फिर वहा पर उससे जबरजस्ती कई फर्जी कागजो पर साइन करवाया .
7- इनके उपर गुजरात के सहायक अटार्नी जनरल का ई मेल हैक करके कई गोपनीय सुचनाये चुराने का केस दर्ज है ..जिसमे आई टी एक्ट भी लगाया गया है
8- इन्होने मोदी के उपर जिस मीटिंग मे मुसलमानों के उपर हमलेका आदेश देने का आरोप लगाया है तत्कालीन डीजीपी श्री के चक्रवर्ती ने कहा की संजीव भट्ट उस बैठक में शामिल ही नहीं थे जिसका जिक्र संजीव भट्ट ने एफिडेविट में किया है |
9- आखिर इनके एफिडेविट को सुप्रीम कोर्ट ने लेने से ही मना क्यों कर दिया ?

अब मै इस देश की मीडिया जो बिक चुकी है से कुछ सवाल क्या मेरे इन सवालों का जबाब देगी ?

1-आखिर मिडिया संजीव भट्ट या उनके पत्नी से ये क्यों नहीं पूछता कि, गुजरात दंगे के 10 साल के बाद क्यों अचानक अपना फर्ज याद आया ?
2-आखिर ये 10 साल तक चुप क्यों थे? क्या इनका जमीर 10 साल के बाद जगा जब रिटायरमेंट के बाद केद्र मे कांग्रेस के द्वारा बड़ा पद मिलने का लालच दिया गया?
3-और एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि, सादिक हुसैन शेख नामक जिस नोटरी से तीस्ता ने गुजरात दंगों के फर्जी हलफनामे बनवाये, उसी नोटरी से संजीव भट्ट साहब ने भी अपना हलफनामा बनवाया. क्या ये इत्तेफाक है?
4- आज की तारीख मे पंजाब मे 100 से ज्यादा पुलिस कर्मी आतंकवाद के दौरन मानवाधिकारों के हनन और फर्जी एन्काउंटर के आरोप मे कई सालो से जेल मे बंद है और कई पुलिस अधिकारी आत्महत्या तक कर चुके है .. जिसमे सबसे दुखद वाकया तरन तारन के युवा और कर्तव्यनिष्ठ एस एस पी श्री अजित सिंह संधू द्वारा चालीस मुकदमे से तंग आकर ट्रेन से आगे कूदकर आत्महत्या करना रहा है . फिर किस मुंह से मोदी पर आरोप?