मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

साम्प्रदायिक दंगे 2011 -3


अगस्त महीने की 8 तारीख को मुरादाबाद शहर एक बार फिर साम्प्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया। काँवड़ियों (गंगाजल ले जा रहे शिवभक्त) के एक जुलूस को एक मुस्लिम मोहल्ले से होकर निकलने की इजाजत नहीं दी गई। काँवड़िये एक मस्जिद के सामने से अपना जुलूस ले जाना चाहते थे। काँवड़ियों ने पहले पुलिस से हुज्जत की और उसके बाद उनमें से कुछ ने मस्जिद पर गोलियाँ दागीं। चूँकि रोज़ा अफ्तार का समय नजदीक आ रहा था इसलिए पुलिस कोई जोखिम उठाना नहीं चाहती थी।
जब मुस्लिम तराबी के लिए अपने घरों से निकले तब काँवड़ियों ने उन्हें मस्जिद जाने से रोका। इसके बाद हिंसा भड़क उठी। काँवड़ियों ने कई मोटर साइकिलों और अन्य वाहनों में आग लगा दीं और पुलिस की गाड़ियों पर भी गोलियाँ दागीं। उन्होंने एक मस्जिद पर भी पत्थरबाजी की। आसपास खड़े कुछ ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया गया। एक पुल पर से गुजर रहे लोगों पर पुल के नीचे से गोलियाँ चलाई गईं। ऐसा लगता है कि यह हिंसा पूर्व नियोजित थी।
अगस्त महीने की 22 तारीख को मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में एक धार्मिक जुलूस को लेकर शुरू हुए विवाद ने दो समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। जमकर पत्थरबाजी हुई जिसके बाद पुलिस ने 6 थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू लगाकर स्थिति को नियंत्रित किया। जबलपुर शहर का साम्प्रदायिक हिंसा का लंबा इतिहास है। यही वह शहर था जहाँ सन 1961 में स्वतंत्र भारत का पहला साम्प्रदायिक दंगा हुआ था।
इसके तीन दिन बाद, उत्तर प्रदेश के बहराइच शहर में साम्प्रदायिक हिंसा हुई। बहराइच भी साम्प्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील शहर है। एक मस्जिद के सामने दो समुदायों के सदस्यों के बीच किसी मुद्दे पर बहसबाजी हुई। उसके बाद दोनों गुटों ने एकदूसरे पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। बीच में किसी ने गोलियाँ भी चलाईं जिससे एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के लिए लखनऊ ले जाते वक्त रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। हिंसा में कई लोग घायल भी हुए।
इसी दिन महाराष्ट्र के ठाणे जिले के टिटवाला में हिंसा भड़क उठी। उस दिन जन्माष्टमी थी। कुछ हिन्दू असामाजिक तत्वों ने मुस्लिम युवकों की पिटाई कर दी और मुसलमानों की गाड़ियों और सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया। वहाँ हुई हिंसा के फोटो सहित मुसलमानों का एक प्रतिनिधि मंडल महाराष्ट्र के गृहमंत्री श्री आर0 आर0 पाटिल से मिला। गृहमंत्री को बताया गया कि हमलावर अब भी खुलओम मुस्लिम बस्तियों में घूम रहे हैं और मुसलमान डर के साए में जीने को मजबूर हैं। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्यवाही पर भी प्रश्न चिन्ह लगाए।
2 सितम्बर को ईद थी। इस दिन महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले के नेवासा में साम्प्रदायिक दंगा हुआ। ऐसा आरोप है कि पुलिस का व्यवहार अत्यंत पक्षपातपूर्ण रहा। जो मुसलमान थाने में एफ0आई0आर0 लिखवाने गए उन्हें ही आई0पी0सी0 की धारा 307 का आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया। मुसलमानों के साथ ऐसा अक्सर होता है और इसलिए वे एफ0आई0आर0 दर्ज कराने से भी घबराते हैं। कई मुसलमानों ने नेवासा से भागकर अहमद नगर में शरण ली। इस दंगे में मुसलमानों पर चाकुओं और तलवारों से हमला किया गया और ज़की नामक एक व्यक्ति का कार्यालय पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। इसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की और उल्टै मुसलमानों को हत्या के प्रयास का आरोपी बना दिया। इसके अगले दिन 3 सितम्बर को मध्यप्रदेश के उज्जैन में साम्प्रदायिक दंगा हुआ। उज्जैन में खासी मुस्लिम आबादी है। इस हिंसा में दो लोग मारे गए और 16 घायल हुए। ऐसा कहा जा रहा है कि विवाद की शुरुआत शहर के पुराने इलाके दौलतगंज में स्थित एक दुकान में गणेश की मूर्ति की स्थापना को लेकर हुई। यह दुकान एक मस्जिद के बगल में है। यह स्पष्ट नहीं है कि दंगे का कारण केवल वह मूर्ति थी या कुछ और। वैसे गणेश की मूर्ति की स्थापना को लेकर ही मस्जिद के बगल में विवाद का कारण नहीं बननी चाहिए। सितम्बर माह की 7 तारीख को आंध्रप्रदेश के कुरनूल जिले की अधूनी तहसील में हुई हिंसा में सैकड़ों लोग घायल हुए। इनमें से तीन को गंभीर चोटें आईं। कारण वही पुराना था मस्जिद के सामने संगीत बजाया जाना। पुलिस को भीड़ को तितरबितर करने के लिए कई बार लाठी चार्ज करना पड़ा। दोनों ओर से पत्थरबाजी हुई और यह सिलसिला चार घंटे तक चलता रहा। इसके बाद पुलिस ने हवा में गोलियाँ भी चलाईं। गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जा रहा था। यह जुलूस एक मस्जिद के सामने रुक गया और वहाँ काफी समय तक बाजे बजाए गए। इसके बाद हिंसा शुरू हुई। दोनों पक्ष ट्रकों और आटो रिक्शों में पत्थर भरकर लाए थे।
महाराष्ट्र के आदिवासी इलाके नंदूरबार में 8 सितम्बर को गणेश विसर्जन के दौरान हिंसा हुई जिसमें दो लोगों ने अपनी जानें गवाईं और कई घायल हो गए। बताया जाता है कि विवाद एक गैरकानूनी गणेश मंडप को लेकर शुरू हुआ। मुसलमानों का आरोप है कि स्थानीय थाने के इंस्पेक्टर रमेश पाटिल का रवैया अत्यंत पक्षपातपूर्ण था और उन्होंने मुसलमानों को डराया धमकाया। यहाँ भी अपनी सम्पित्त को नुकसान पहुँचाए जाने की एफ0आई0आर0 लिखवाने थाने पहुँचे मुसलमानों को धारा 353 में गिरफ्तार कर लिया गया। इस धारा में 326 मुसलमानों को और केवल 12 गैर मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह, 6 मुसलमानों को धारा 302 और 12 को धारा 307 में गिरफ्तार किया गया। इन धाराओं में एक भी गैरमुस्लिम की गिरफ्तारी नहीं हुई। नंदूरबार के मुसलमान इतने आतंकित हैं कि उनमें से जो वहाँ बरसों से रह रहे थे वे भी अपने घर वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैं।

-डा. असगर अली इंजीनियर
क्रमश:

1 टिप्पणी:

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" ने कहा…

khuda dngaayion ko sadbuddhi de .........akhtar khan akela kota rajsthan