सोमवार, 3 मार्च 2014

मोदी साहब आप किस स्कूल से पढ़े हैं और कितना पढ़े हैं ?

आज बाराबंकी कचेहरी में एक साहब आये और उन्होंने कहा कि मोदी जब सामान्य ज्ञान या इतिहास के ऊपर बोलते हैं तो वह गलत हो जाता है तो आप बताओ कि नरेंद्र मोदी कितना पढ़ा लिखा है ?  मुझे कोई उत्तर नही सूझा साथ में दो पत्रकार भी बैठे हुए थे उनको भी यह जानकारी नहीं थी कि नरेंद्र मोदी ने स्कूल का मुंह देखा है या नही।  फिर क्या था वह साहब कहने लगे कि भाई कुछ लोग देश का प्रधानमंत्री बनाने जा रहे हैं और आप लोगों को यह भी जानकारी नही हो पायी हैं कि मोदी पढ़ा लिखा है या साक्षर है।  फिर उन्होंने हम लोगों के ऊपर धौंस ज़माने के लिए कहा कि मोदी जब कभी-कभी इंग्लिश के वाक्यांश का
प्रयोग करता है तो वह भी गलत-शलत होते हैं। उससे बढ़िया अंग्रेजी तो मैं बोल लेता हूँ।
                               उस शख्स के जाने के बाद मैं सोचने लगा।  अगर  भगत सिंह के अंडमान जेल में बंद होने की बात हमारे प्राइमरी स्कूल के उस समय के हेड मास्टर पंडित श्याम लाल के सामने कही गयी होती तो बेहया का डंडा पूरे शरीर के ऊपर कितने टूट जाते यह उस छात्र को भी नही मालूम होता। जूनियर हाई स्कूल के अध्यापक राजा राम यादव के सामने पटना में सिकंदर की बात किसी छात्र ने कही होती तो मास्टर साहब चटकना से लेकर उस छात्र के ऊपर पूरी तरह से घूसेबाजी कर दिए होते।  यह सब साड़ी ग़लतफहमी मंचासीन कुछ पढ़े लिखे नेताओं और हजारो लोगों कि भीड़ के समक्ष होती रही और किसी भी नेता के मुंह से आह भी नही निकली जैसे कि वह लोग मोदी के व्यक्तिगत नौकर कि भूमिका में हो और बोलने पर नौकरी चले जाने का डर हो। स्मृतियों में खोकर बहुत सारी चीजें याद आने लगी और फिर हंसी। 
वास्तव में कुर्सी का प्रेम सब कुछ छीन लेता है। बुद्धि और विवेक भी, मोदी तिरंगा-तिरंगा चिल्लाते हैं , राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात करते हैं। उनके साथ बैठे हुए लोगों ने मंच पर जब मोदी गलत उवाच कर रहे  होते हैं, तो पढ़े लिखे और संघ के सिद्धांतकार गुरु गोलवलकर , हेड़गवारकर की लिखी हुई किताबों और बातों को भूल जाते हैं।  जिस संगठन का इस देश कि जंगे आजादी की लड़ाई से, संविधान से कोई वास्ता नहीं रहा है वह राष्ट्र और तिरंगे की बात प्रधानमंत्री पद का स्वघोषित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी करता है तो उनको कैसा लगता है।
             आज सबसे पहले मोदी को अपनी पढाई लिखाई की जानकारी संपूर्ण राष्ट्र को देनी चाहिए साथ में यह भी बताना चाहिए कि उनकी रैलियों का खर्च कौन उठा रहा है अन्यथा यह समझा जायेगा कि कोई कार्पोरेट सेक्टर या विदेशी शक्ति लाखों करोडो रुपये खर्च कर मोदी को मुखौटा बना कर इस देश को कब्ज़ा करना चाहता है।  

सुमन 

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (04-03-2014) को "कभी पलट कर देखना" (चर्चा मंच-1541) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

SHIV SAGAR YADAV ने कहा…

sundar