मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

आँख के अंधे नाम नैनसुख रखो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी जनता से संवाद करने के लिए आकाशवाणी से मन की बात कहते हैं. मोदी ने विकलांगो को विकलांग न कहने के लिए लोगों को प्रेरित किया और उन्हें नया नाम दिव्यांग कहने के लिए कहा. यह उसी तरह की बात है आँख के अंधे नाम नैनसुख रख दो. प्रधानमंत्री कुछ कर पाए हो न कर पाए हो लेकिन पुराने नाम को हटा कर नया नाम रखने का कार्य करने में पूर्ण कुशल हैं या यूँ कहिये की पुरानी बोतल में नयी शराब. योजना आयोग का नाम बदल कर नीति आयोग, इंदिरा गाँधी आवास योजना का भी नाम बदलने की तौयारी है, चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह की जगह मंगल सेन का प्रस्ताव किया जा चुका है. विकास जिसकी रट वह हमेशा लगाए रखते हैं वह महंगाई के डर से पैदा नहीं हो पा रहा है. पिछली सरकार की योजनाओं का नया नामकरण ही हो रहा है.
                   मन की बात में जो बातें की जा रही हैं, उसमें काफी बातें आधारहीन हैं जैसे पिछले मन की बात में मोदी ने कहा था- 'मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भोजपुरा गांव में एक कारीगर दिलीप सिंह मालवीय ने एक अनूठा काम किया है।' 'उन्होंने तय किया कि अगर कोई मटेरियल प्रोवाइड करता है तो शौचालय बनाने की मज़दूरी वो नहीं लेंगे। 100 शौचालयों का निर्माण कर चुके हैं। मैं दिलीप सिंह मालवीय को ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, अभिनन्दन करता हूं।' मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में 100 टॉयलेट बनवाने वाले एक शख्स की तारीफ की थी। दिलीप सिंह जिस भोजपुरा गांव में रहते हैं, वहां सिर्फ 53 घर हैं. सौ शौचालय बनवाने की बात पूर्णतय: असत्य है और दिलीप सिंह शौचालय बनवाने का पैसा भी लेते हैं और मध्य प्रदेश के मंत्री से लेकर कांग्रेस के नेताओं मन की बात को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है. 
                         प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए तर्क व तथ्य अगर गलत साबित हो रहे हैं तो निश्चित रूप से अच्छे दिन आने वाली मुहावरे की बात ही है. उनकी सभी बातें सोशल मीडिया से लेकर समाज में हंसी-मजाक की बातें ही होकर रह जा रही हैं. भारतीय गणतंत्र के 125 करोड़ नागरिकों का प्रधानमंत्री अगर इसी तरह से मन की बात करता रहेगा तो शेख चिल्ली और प्रधानमंत्री में कोई अंतर नहीं रह जायेगा. इतना अधिक आत्म मुग्धता ठीक नहीं है. 
किसान आत्महत्या कर रहे हैं. हिमाचल में उन उत्पादक अपनी भेड़ों का ऊन जला रहे हैं. मोदी साहब को आम जनता की समस्याओं से और उसके कष्टों से कोई लेना-देना नहीं रह गया हो. 

सुमन 

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