शनिवार, 17 सितंबर 2016

जोगेंद्र नाथ मंडल का सांप्रदायिकीकरण

आजादी से पहले पश्चिम बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार बनती थी. जिसमें शेड्यूल्ड कास्ट के नेता जोगेंद्र नाथ मंडल मंत्री होते थे तो वहीँ मुस्लिम लीग के मुख्यमंत्री वाले कैबिनेट में भारतीय जनसंघ के बाद में संस्थापक अध्यक्ष डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी भी होते थे. बंगाल के उप-मुख्यमंत्री रहते हुए मुखर्जी ने अंग्रेज़ गवर्नर को चिट्ठी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए हर संभव मदद का आश्वासन देते रहते थे.
जोगेंद्र नाथ मंडल बंगाल या देश के अन्दर अनुसूचित जाति, जनजाति के उत्थान के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार थे. पकिस्तान के निर्माण के समय मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में पकिस्तान के कानून एवं श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल बनाये गए. कहा यह भी जाता है कि पकिस्तान के संविधान की रचना भी उन्होंने की. भारत पकिस्तान विभाजन के समय कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू मुसलमानों का कत्लेआम इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक है. पकिस्तान के अन्दर कत्लेआम देख कर हताश व निराश जोगेंद्र नाथ मंडल 8 अक्टूबर 1950 को लियाकत अली मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर भारत वापस आ गए थे . जिन्ना की मृत्यु 11 सितम्बर 1948 को हो गयी जोगेंद्र नाथ मंडल के सारे कसमें वादे जिन्ना के साथ थे.  उनके न रहने के बाद उनका कोई पुरसाहाल नहीं रहा. 
        इस घटना को लेकर संघ विचारक राकेश सिन्हा की नई पत्रिका ‘पाकिस्तान वॉच’ के पहले अंक में प्रकाशित किया गया है और उसके बाद सुनियोजित तरीके से संघ के लोगों ने सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक जोगेंद्र नाथ मंडल के इस्तीफे का सहारा लेकर तथ्यों और परिस्तिथियों के विपरीत जाकर यह साबित करने की कोशिश में संघ परिवार लगा है कि दलित और मुसलमान स्वाभाविक रूप से एक दुसरे के दुश्मन हैं. पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के इस्तीफा से जुड़े कुछ घटनाओं का जिक्र सांप्रदायिक भावना से किया है।
            संघ की नागपुरी विष प्रयोगशाला इस समय जोगेंद्र नाथ मंडल से जुडी हुई तमाम सारे किस्से कहानियां सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करा रहा है जिससे दलितों व मुसलमानों के बीच की दूरी बढ़ सके और इस बात को दबाया जा सके कि धर्म के आधार पर अनुसूचित जातियों का शोषण नहीं किया गया है.ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि संघ व हिन्दू महासभा एक तरफ मुसलमानों के खिलाफ विष वमन कर देश को विभाजित करना चाहते थे तो वहीँ मुस्लिम लीग इस्लाम के मतावलंबियों को लेकर अलग राष्ट्र के निर्माण की मांग कर रही थी. यह दोनों पक्ष अंग्रेजों की एक जोड़ी बैल के दांये व बांये बैल थे. यह  दोनों अंग्रेजों के इशारे पर हमेशा कार्य करने के लिए तत्पर रहते थे देश की एकता और अखंडता से इनका कोई मतलब नहीं था.
संघ इतिहास के तथ्यों को तोड मारोड़ कर एक नया इतिहास तैयार कर रहा है जिसका आधार हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष को बढ़ावा देना और अंग्रेजों की गुलामी करने के उसके कार्य को छिपाना है. उसी प्रक्रिया के तहत जोगेंद्र नाथ मंडल सांप्रदायिकीकरण किया जा रहा है

सुमन 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (19-09-2016) को "नमकीन पानी में बहुत से जीव ठहरे हैं" (चर्चा अंक-2470) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'