मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

आम आदमी की मौत और झूठों की प्रतियोगिता

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में आर्याव्रत ग्रामीण बैंक में मजदूर पेशा भगवान दीन गौतम की बैंक से रुपया निकालने की लाइन में लगे हुए ही मौत हो गयी. वहीँ जनपद में लाइन में लोगों का बेहोश हो जाना, दो-दो दिन तक रुपया न प्राप्त होना आम आदमी के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है. वहीँ, भाजपा-मोदी-रिज़र्व बैंक में झूठ बोलने कि प्रतियोगिता थमने का नाम ही नही लेती है. मोदी साहब पहले यह फरमाते थे कि नोट बंदी कि योजना की भनक किसी को लगने नहीं दी गयी थी. वहीँ भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं कि कैश की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों की वजह वित्त मंत्रालय की लापरवाही हैं, अगर इस फैसले के लिए वित्त मंत्रालय ने पहले से तैयारी की होती तो आज ऐसे हालात पैदा न होते।  भ्रष्टाचार और कालेधन के खात्मे के लिए सरकार ने 2014 में ही फैसला ले लिया था।
                    अब आप ही देखें कि कौन सच्चा है और कौन झूठा है. दोनों लोगों का विश्लेषण करने से यह बात निकल कर आती है कि दोनों लोग झूठ का सहारा लेकर जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं. झूठों की प्रतियोगिता के कारण रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया व बैंकिंग इंडस्ट्रीज की विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है.आठ नवंबर को सरकार द्वारा की गयी नोटबंदी की घोषणा के बाद इस मामले में अब तक नियमों में 125 बदलाव किए जा चुके हैं. सुबह कोई नोटीफिकेशन आता है और शाम होते-होते उसके विपरीत नोटीफिकेशन आ जाता है. 30 दिसम्बर तक जनता को हज़ार और 500 और 1000 का नोट जमा करने का हक़ हासिल था लेकिन 19 दिसम्बर के नोटीफिकेशन के अनुसार अब एक बार ही आप अपने खाते में पुराने नोट जमा कर सकते हैं और उसकी अधिकतम सीमा 5000 रुपये बैंकों ने तय कर रखी है. नोटीफिकेशन कुछ कहता है व्यवहार में कुछ और हो रहा है. अरुण जेटली से लेकर मोदी तक अपनी-अपनी फख्ताएं उड़ाई जा रही हैं. झूठ बोलने कि इस प्रतियोगिता में बैंक भी शामिल हैं. इस तरह से सरकार, बैंक और अन्य वित्तीय संसथान अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं. आम आदमी जिंदा रहे तो दुनिया का आठवां आश्चर्य  है और मर जाए तो उनके ठेंगे से. 

सुमन 

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