शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

मोदी के चेहरे के सारे मुखौटे को नोच दिया

वो बादशाह बन बैठे हैं मुकद्दर से ,
मगर मिजाज है अब तक वो ही भिखारी का 
 -मंजर  भोपाली 

यह शेर मंजर भोपाली ने चाहे जो सोच कर लिखा हो लेकिन काले धन में आकंठ तक डूबे नरेन्द्र मोदी के ऊपर पूरी तरह से लागू होता है. कल बनारस की सभा में सांसद राहुल गाँधी के सम्बन्ध में जो जो टिप्पणियां प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने कि हैं वह इस देश में पहली बार हो रहा है. राहुल गाँधी ने सीधे-सीधे मोदी से यह पूछा है कि सहारा से रुपया लिया है या नहीं लिया है ? जिसका कोई जवाब मोदी नहीं दे पा रहे हैं. वहीँ नोट बंदी के सवाल के ऊपर उत्तराखंड में राहुल गाँधी ने कहा कि यह नोटबंदी कालेधन या भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई निर्णय नहीं है. यह नोटबंदी आर्थिक लूट है. यह देश के गरीबों पर हमला है.’’ उन्होंने प्रधानमंत्री से उन चोरों का नाम पूछा जिनका स्विस बैंकों में कालाधन है.
 ‘‘गरीबों का पैसा खींचो और अमीरों को सींचो. 99 फीसदी ईमानदार का पैसा खींचो और 50 परिवारों को सींचो. ये है नोटबंदी की सच्चाई.’’नोटबंदी के चलते हुई 100 लोगों की मौत पर विपक्ष को शोक भी नहीं मनाने दिया गया. 15 महाधनाढ्यों का 1.40 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है.
वहीँ दूसरी तरफ, मोदी ने उत्तराखंड को 2013 की बाढ़ के बाद विकास के वास्ते दरकार 60,000 करोड़ रुपये नहीं दिए जबकि उन्होंने विजय माल्या को 1200 करोड़ रुपये ‘टाफी’ की तरह दे दिया गया.
 अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने अपने संपादकीय में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए नोटबंदी के कदम को जनता के पैसे पर डाका तक बता दिया है। फोर्ब्स ने इस फैसले से आतंकवादी गतिविधि कम होने के तर्क को भी खारिज किया है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के कैश आधारित होने की बात करते हुए लिखा कि डिजिटाइजेश खुद-ब-खुद समय और फ्री मार्केट इकॉनमी की मांग से होगा। 
 फोर्ब्स ने लिखा है कि मोदी सरकार ने बिना किसी चेतावनी के देश की 85 फीसदी करंसी को खत्म कर दिया। हैरान जनता को बैंकों से कैश बदलवाने के लिए महज कुछ हफ्तों का समय दिया गया।
फोर्ब्स पत्रिका का यह प्रमाण पत्र जारी करना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए ब्रह्म वाक्य है क्यूंकि संघ का अनुवांशिक संगठन भाजपा है. मुख्य संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ही है जो आजादी की लड़ाई के समय अंग्रेजों की मदद करने का काम कर रहा था. यह संगठन अब अमेरिकी साम्राज्यवाद के एजेंट की भूमिका में कार्य कर रहा है और अमेरिकी पत्रिका द्वारा उक्त टिप्पणियां करना इनके चेहरे के सारे मुखौटे को नोच देता है. 

सुमन 

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (25-12-2016) को "हार नहीं मानूँगा रार नहीं ठानूँगा" (चर्चा अंक-2567) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'